आज करीब 20 साल पहले तक कारोबारियों को बिजनेस लोन मिलना बहुत कठिन हुआ करता था। लेकिन, इधर 15 – 20 वर्षों के दौरान लोन मार्केट में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। भारत में जब से फिनटेक सेक्टर की कंपनियों द्वारा लोन सेक्टर में दस्तक दी गई तब से सौकड़ों की तादात में एनबीएफसी कम्पनियां अस्तिव में आ गई हैं।

एनबीएफसी कंपनियों की खास बात यह है कि ये कम्पनियां लोन देने की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी कर लेती हैं। कई नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कम्पनियां ऐसी हैं जो सिर्फ 3 दिनों के भीतर लोन देने का दावा करती हैं। ZipLoan एक ऐसी ही एनबीएफसी कंपनी है जहां से सिर्फ 3 दिन में भीतर बिजनेस लोन अप्रूव हो जाता है।

कारोबारियों को अक्सर ही अपने बिजनेस का विस्तार करने के लिए या कारोबार की किसी खास जरूरत जैसे- नई मशीनरी खरीदने हो या बिजनेस के दैनिक खर्चों को पूरा करना हो, इन सभी को पूरा करने के लिए बिजनेस लोन की जरूरत पड़ती रहती है।

कारोबारी को जब भी बिजनेस लोन की जरूरत पड़ती है तो जब वह बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करता है तो उससे सभी सवालों के अलावा 2 खास सवाल खासतौर पर पूछे जाते हैं। पहला सवाल यह कि आपको कितनी रकम बिजनेस लोन के रुप में चाहिए और दूसरा सवाल यह कि आप बिजनेस लोन की रकम को कितनी EMI में चुकायेंगे।

हो सकता है कि कारोबारियों का यह सवाल हो कि EMI क्या होती है? और EMI कैसे कैलकुलेट करते हैं? यह सवाल स्वभाविक भी है। आइये इस ब्लॉग में EMI से संबंधित सभी सवालों जैसे – EMI की होती है? EMI कैलकुलेट कैसे करते हैं? EMI कैलक्यूलेटर क्या होता है? इत्यादि जैसे सभी सवालों के उत्तर समझते हैं।

EMI क्या होती है? – What is EMI?

EMI या समेकित मासिक किस्त एक निश्चित राशि है, जो आपके द्वारा बैंक को हर महीने एक विशिष्ट तारीख पर भुगतान की जाती है। जब भी हम ऐसा कोई लोन लेते है, जिसे एकबार में चुकाना नामुमकिन हो जाता है, तो बैंक हमें EMI का ऑप्शन देती है। यानि ईएमआई के तौर पर हमें हर महीने उस लोन की कुछ रकम बैंक में जमा करानी पड़ती है। यानि बैंक हमें लोन को किश्तों में चुकाने की सुविधा देती है। बैंकों या फाइनेन्शियल कंपनियों द्वारा लोन को किस्तों में चुकाने की सुविधा को EMI कहते है।

जानिए बिजनेस लोन के लिए प्री-ईएमआई क्या होती है?

EMI में क्या – क्या शामिल होता है?

प्रत्येक ईएमआई में कुछ मात्रा में मूलधन और कुछ मात्रा में ब्याज शामिल होता है। जब बैंक या फाइनेन्शियल कंपनियां बिजनेस लोन को किस्तों में चुकाने की सुविधा देती हैं, तो उस पर थोड़ा ब्याज भी लगाती हैं। ऐसे में जब भी आप ईएमआई की इंस्टालमेंट (किश्त) चुकाते हैं, तो समय के साथ साथ मूलधन और ब्याज भी कम होता जाता है।

EMI कैलकुलेट कैसे होती है? – How to Calculate EMI?

EMI कैलुकेशन तीन चीजों पर आधारित होती है। पहला लोन की धनराशि, दूसरा ऐप्लिकेबल ब्याज दर और तीसरा रिपेमेंट यानी का कार्यकाल (लोन चुकाने का समय) । जितनी ज्यादा लोन राशि और एप्लिकेबल ब्याज दर होती है, उतनी ज्यादा ईएमआई की राशि होती है।

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वहीं दूसरी ओर जितना लंबा रिपेमेंट का कार्यकाल होगा उतनी कम ईएमआई होगा। आप इसके लिए ऑनलाइन कैल्कूलेंटर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कि बैंक और एग्रिगेटर्स की वेबसाइट पर मौजूद होते हैं। या फिर आप इसकी गणना खुद भी कर सकते हैं।

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EMI कैलकुलेट करने में अपनाई जाती है निम्न प्रक्रिया

  • आप कितनी रकम तक का लोन लेना चाहते है
  • लोन पर इंटरेस्ट रेट यानी ब्याज दर कितनी है
  • जो आप लोन ले रहे हैं उसको कितने समय में चुकायेंगे

बिजनेस लोन की EMI कैलकुलेट करने के लिए सूत्र निम्न है:-

EMI = [P x R x (1+R) ^ N]/ [(1+R) ^ (N-1)]

  • E = ईएमआई
  • P = लोन की टोटल धनराशि
  • R = हर महीने लगने वाला ब्याज
  • N = लोन कितने समय के लिए लिया गया है उसका टोटल समय

बिजनेस लोन पाने में ईएमआई कैलकुलेटर की भूमिका

जिस प्रकार बिजनेस लोन के लिए क्रेडिट स्कोर यानी सिबिल स्कोर की जरूरत पड़ती है ठीक वैसी ही  ईएमआई कैलकुलेटर का भी प्रयोग अनिवार्य होता है। ईएमआई कैलकुलेटर के जरिए कारोबारी को यह अंदाजा हो जाता है कि उनको कितनी रकम तक का बिजनेस लोन मिल सकता है और उस लोन पर उनको हर महीने कितनी EMI भरना होगा। ये सभी जानकारी जब कारोबारी को होती है तो उस आत्मविश्वास के साथ अपने बिजनेस का विस्तार करता है।

ईएमआई कैलकुलेटर उपयोग का करने से लाभ

  • मंथली EMI के रुप में जो रकम आपको भरना होगा उसकी रकम आपको पहले से पता चल जाती है, इससे आप पहले से ही मानसिक तौर से इतनी रकम जमा करने के लिए तैयार रहते हैं।
  • बैंक में जाकर या एनबीएफसी कंपनी से यह पता करने की जरूरत नही पड़ेगी की आपको आपके लोन पर कितनी EMI मंथली बन रही है।
  • जब EMI की रकम पहले से पता चल जाती है तो कारोबारी मंथली किश्तों की शेड्यूल बना सकते हैं। अपनी जरूरत के अनुसार अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं
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कब बदल सकती है EMI

क्या आप जानते हैं कि मंथली EMI को बदला भी जा सकता है? जी हां मंथली EMI में समय के बदलाव संभव है। हालाँकि इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होता है। मंथली EMI की धनराशि में बदलाव एप्लिकेबल ब्याज दर पर निर्भर करता है ।

फिक्स्ड ब्याज दर लोन जैसे कि ऑटो लोन में इंस्टॉलमेंट की राशि बदलती नहीं है। हालांकि फ्लोटिंग रेट इंटरेस्ट लोन जैसे कि होम लोन के लिए ईएसआई बदल सकती है। अगर आप पार्शियल प्री पेमेंट करते हैं तो ईएमआई उस हिसाब से ही बदलेगी।

जब आप पार्शियली प्री-पेमेंट करते हैं, तो लोन के कार्यकाल को कम करने के विकल्प का भी चयन कर सकते हैं। लेकिन कई बार प्री-पेमेंट करने पर बैंक या फाइनेंशियल कंपनियां चार्ज लगा देती हैं। ऐसे में अगर आप ZipLoan से बिजनेस लोन लेते हैं, तो प्री-प्रेमेंट पर किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं लगाया जाता है।

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