किसी भी बिजनेस को चलाने के लिए दो प्रकार के धन की आवश्यकता होती है। निश्चित धन और कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल। निश्चित धन से जहां बिजनेस का स्ट्रक्चर यानी ताना – बाना बुना जाता है। कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल से बिजनेस सही तरीके संचालित किया जाता है। वर्किंग कैपिटल को हिंदी (वर्किंग कैपिटल इन हिंदी) में कार्यशील पूंजी कहते हैं।

बिजनेस में लगने वाली निश्चित धनराशि को हम अगर नींव कहेंगे तो वर्किंग कैपिटल को दीवाल कहना गलत नहीं होगा। वर्किंग कैपिटल किसी भी कारोबार का जीवनदाता होता है। कारोबारियों को अपना बिजनेस सही से चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ती है।

कई बार ऐसा होता है कि कुछ संस्थाएं/कंपनियां अपने गैर-जरूरी खर्चो में कटौती करके वर्किंग कैपिटल का इंतजाम करती हैं। लेकिन, बहुत बड़ी संख्या में ऐसी संस्थाएं/कंपनियां हैं जिनके लिए कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल का खुद से इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में काम आता है वर्किंग कैपिटल लोन।

वर्किंग कैपिटल क्या है – What is Working Capital

कार्यशील पूंजी को अगर एक वाक्य में समझे तो इसे – किसी कारोबार की वर्तमान संपत्ति और वर्तमान देनदारियों यानी बकाया के बीच का अंतर है। वर्किंग कैपिटल फ़ॉर्मूला निम्न होता है:

वर्किंग कैपिटल फ़ॉर्मूला:

Working Capital (वर्किंग कैपिटल) = Current Assets (करंट एसेट्स) – Current Liabilities (करंट लायबिलिटीज)

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इसे और सिंपल तरीके से समझते हैं: मान लीजिए, आपके पास 10,00,000 की वर्तमान संपत्ति और  वर्तमान देनदारी यानी बकाया 8,00,000 हो तो इस स्थिति में आपके पास 2,00,000 रुपये वर्किंग कैपिटल इन हिंदी कार्यशील पूंजी बनता है।

वर्किंग कैपिटल इन हिंदी कार्यशील पूंजी आपके द्वारा कम समय की देनदारियों का हिसाब रखने के बाद आपके द्वारा छोड़ी गई नगद रकम का माप है। कार्यशील पूंजी दो तरह के होते हैं। पॉजिटिव और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल यानी सकारात्मक और नकारात्मक कार्यशील पूंजी।

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पॉजिटिव और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल क्या होता है?

सकारात्मक कार्यशील पूंजी

सकारात्मक कार्यशील पूंजी उस स्थिति को कहा जाता है जिसमे वर्तमान संपत्ति वर्तमान देनदारियों (बकाया) से अधिक हो। इस स्थिति में वर्तमान देनदारियों (बकाया) का तुरंत निपटारा किया जा सकता है यानी बकाया चुकाया जा सकता है। इन्वेंट्री खरीदा जा सकता है और बिजनेस को सतत रुप से चलाया जा सकता है।

नकारात्मक कार्यशील पूंजी – नेगेटिव वर्किंग कैपिटल

यह पॉजिटिव वर्किंग कैपिटल से ठीक उलटा है। नेगेटिव वर्किंग कैपिटल की स्थिति में कम समय के लोन को वापस करना, इन्वेंट्री खरीदना या बिजनेस की दैनिक जरूरतों को पूरा करके बिजनेस का संचालन करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में आपको वर्किंग कैपिटल लोन यानी कार्यशील पूंजी ऋण लेना अनिवार्य हो जाता है।

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आपको कितना वर्किंग कैपिटल चाहिए?

आपके बिजनेस के लिए कितना वर्किंग कैपिटल यानी कार्यशील पूंजी की आवश्यकता है? यह समझने के लिए वर्किंग कैपिटल फ़ॉर्मूला यानी कार्यशील पूंजी निकालने वाले फ़ॉर्मूला का उपयोग करना चाहिए। यह इस तरह निकलेगा:

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वर्किंग कैपिटल रेशियों (Working Capital Ratio) = (करंट एसेट्स) Current Assets / (करंट लायबिलिटीज) Current Liabilities

एक उदाहरण: 1,000,000 / 800,000

= 1.25

आइडियल रुप में कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल का अनुपात 1।2 से 2।0 तक होना चाहिए। इतना होने का मतलब है कि आपको अपने बिजनेस के दैनिक खर्चो को पूरा करने में कठिनाई हो रही है। वहीं अनुपात 2।0 या इससे अधिक है तो इसका मतलब है कि आपको अपने कारोबार का विस्तार करने में कठिनाई की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

वर्किंग कैपिटल लोन लेने की तरफ आगे बढ़े

वर्किंग कैपिटल को कार्यशील पूंजी कहा जाता है। कार्यशील पूंजी यानी वह रकम जिससे बिजनेस के दैनिक खर्चो को पूरा किया जाता है। वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट के जरिए कारोबार होने वाले हर रोज के खर्चो को पूरा किया जाता है। जब वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट ठीक से न हो तो उस स्थिति में वर्किंग कैपिटल लोन लेना ही बेहतर विकल्प साबित होगा। आइए समझते हैं कि वर्किंग कैपिटल लोन किन स्थितियों के लिए ठीक होता है:

रेगुलर कैश फ्लो ठीक रखने के लिए

लघु उद्योग या अन्य छोटे एवं मध्यम कारोबार में ग्राहक सामान उधारी पर लेते हैं। उधारी पर सामान देने से कारोबारी का कैश फ्लो गड़बड़ा जाता है। क्योंकि, उधारी मिलने में समय लगता है। लेकिन कारोबार में तो हर रोज धन की जरूरत पड़ती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन बेहतर साबित होगा।

मौसमी सेल्स में उतार – चढ़ाव ठीक रखने के लिए

अपने देश में साल के कुछ महीने ऐसे होते हैं जिनमें कारोबार मंदा पड़ जाता है। बिक्री ठप हो जाती है। स्टॉक किया गया प्रोडक्ट जब ठप हो जाता है तो उसमे लागत लगे होने के कारण कारोबारी का धन फंस जाता है। इस स्थिति में कारोबार चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन लिया जा सकता है।

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बिजनेस के नए अवसर तलाशने में सहायक

किसी कारोबारी का कोई एक बिजनेस अगर अच्छा चल रहा तो वह कोई दूसरा बिजनेस खोलने के बारे में भी विचार कर सकता है। इस कार्य के लिए वर्किंग कैपिटल लोन बेहतर मदद करेगा।

कैश की कमी पूरी करने के लिए

बिजनेस में नगद कैश की कमी पूरी करने के लिए भी वर्किंग कैपिटल लोन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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वर्किंग कैपिटल लोन कितने प्रकार का होता है

  • ट्रेड लोन
  • बैंक ओवरड्राफ्ट सुविधा
  • शार्ट टर्म लोन
  • बिजनेस की अन्य जरूरत के लिए लोन

ZipLoan से मिलता है वर्किंग कैपिटल लोन

फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan द्वारा कारोबारियों की वित्तीय जरूरतों का ख्याल रखते हुए बिना कुछ गिरवी रखे 1 से 7.5 लाख तक का वर्किंग कैपिटल यानी कार्यशील पूंजी प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से वर्किंग कैपिटल लोन के लिए शर्ते बेहद मामूली हैं, जैसे- बिजनेस 2 साल पुराना हो, सालाना टर्नओवर कम से कम 10 लाख से अधिक हो और पिछले साल भरी गई ITR न्यूनतम डेढ़ लाख की हो।

इन मामूली शर्तों को कोई कारोबारी पूरा करता है तो उसे ZipLoan से प्राप्त होगा 1 से 7.5 लाख तक का वर्किंग कैपिटल लोन। ZipLoan से मिलने वाला लोन बिना कुछ गिरवी रखे होता है और 6 महीने बाद प्री पेमेंट चार्जेस फ्री होता है।

 

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