हम अक्सर अपने कारोबारी दोस्तों या बिजनेस करने रिश्तेदारों से सुनते रहते हैं कि सिबिल स्कोर कम होने की वजह से बिजनेस लोन नहीं मिला। कारोबारियों की यह शिकायत आम होती है की बैंक वाले क्रेडिट स्कोर कम होने के चलते बिजनेस लोन नहीं देते। ऐसे में बिजनेस कैसे आगे बढ़े?

सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर) की इतनी शिकायत सुनने के बाद लगभग सभी के मन में यह जानने की इच्छा होती है कि आखिर ये सिबिल स्कोर है क्या? क्यों लोग क्रेडिट स्कोर को इतना दोष दे रहे हैं? आइए अब यह समझते हैं कि आखिर क्रेडिट स्कोर क्या है? और बिजनेस लोन पाने में इसकी इतनी महत्वपूर्ण भूमिका क्यों है।

सिबिल स्कोर क्या है?                                                               

इसे एक सिंपल उदाहरण से समझते हैं: आपने देखा होगा। आपके आसपास की कोई दुकान पर जिस तरह कोई व्यक्ति किसी दुकानदार से एक बार कोई सामान उधार लेता है। उधारी को ठीक समय से वापस नहीं करता है तो दुकानदार उस व्यक्ति को दोबारा उधार देने से मना कर देता है।

मतलब उस ग्राहक की ‘साख’ उस दुकानदार की नजरों में खराब हो गई है या कम हो गई है। साख खराब होने का मतलब है उस व्यक्ति विशेष को इस काबिल नहीं समझा जाता कि उसको दोबारा से उधार दिया जा सके। बिजनेस में इसे हम सिबिल स्कोर कहते हैं।

सिबिल स्कोर एक यूनिक संख्या होती है। यह संख्या 3 अंको की होती है, जो 300 से 900 के बीच की होती है। इस संख्या का निर्धारण व्यक्ति के द्वारा लिए गए लोन को वापस करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और तरीके पर होता है। अगर व्यक्ति ने लोन ठीक समय से वापस किया है तो सिबिल स्कोर ठीक रहता है। लोन की रकम समय से वापस नहीं होती तो सिबिल स्कोर खराब के कैटेगरी में गिना जाता है।

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CIBIL का फुल फॉर्म है (Full Form of CIBIL) – Credit Information Bureau (India) Limited) (क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड) है। यह संस्था बैंक या लोन देने वाली कंपनियों के ग्राहकों के सिबिल की जांच करती है और उसे लगातार अपडेट करती है।

सिबिल स्कोर की रेटिंग बिजनेस लोन, वर्किंग कैपिटल, होम लोन और क्रेडिट कार्ड इत्यादि जैसे लोन को वापस करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर निर्भर होता है।  आइए समझते हैं कि सिबिल स्कोर की मैपिंग कैसे की जाती है:

सिबिल स्कोर कैसे कैलकुलेट होता है

अधिकतर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती ही नहीं कि सिबिल स्कोर कैलकुलेट कैसे होता है। क्रेडिट स्कोर कैलकुलेट करने के लिए सिबिल संस्था द्वारा मुख्य रुप से इन 4 इन तरीके पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है:

पिछले लोन को चुकाने के तरीके का अवलोकन करके

सिबिल संस्था द्वारा पिछले लोन के हिस्ट्री पर पूरा ध्यान दिया जाता है। इस प्रक्रिया में शामिल होता है – व्यक्ति ने लोन कितना लिया? कितने समय में वापस करने का वचन दिया? कितने समय में वापस किया? कितनी EMI देर से जमा हुई?

लोन से संबंधित कोई घपला घोटाला तो नहीं किया गया इत्यादि जैसी बातों का ध्यान रखते हुए क्रेडिट स्कोर तैयार किया जाता है।

अगर ग्राहक द्वारा समयानुसार लोन नहीं चुकाया जाता है तो इससे ग्राहक के क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव पड़ेगा और आगे किसी भी प्रकार का लोन मिलने में कठिनाई हो सकती है।

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हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन

यह लोन लेने की अधिकतम धनराशि के तरफ इशारा करता है। हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन का मतलब है ग्राहक ने बहुत अधिक धनराशि लोन के रुप में लिया है। इससे भी क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।

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बहुत अधिक पूछताछ करना

कुछ मामलों में अधिक से अधिक पूछताछ करने पर अधिक जानकारी लेने का पर्पज होता है। लेकिन, लोन के मामले में अगर आप बहुत अधिक बैंक से पूछताछ करते हैं या बार- बैंक अधिकारी के यहां पहुंच कर अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो इससे भी आपके क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ेगा।

एक साथ अधिक लोन लेना

वर्तमान में अगर आपका एक सिक्योर्ड लोन चल रहा हो और उसी बीच आपने अनसिक्योर्ड यानी बिना कुछ गिरवी रखे लोन लिया तो इससे आपके क्रेडिट स्कोर पर नेगेटिव प्रभाव पड़ेगा।

क्रेडिट स्कोर को कैलकुलेट होने की स्थिति समझने के बाद यह समझना बहुत आवश्यक है कि सिबिल स्कोर को कैलकुलेट करने में किन चीजों का वेटेज दिया जाता है। पिछले लोन को चुकाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर कुल 30 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है।

कितने समय के लिए बिजनेस लोन लिया गया था, इसके लिए 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। 20 प्रतिशत का वेटेज वर्तमान में चल रहे लोन का उपयोग करने के तरीके के लिए दिया जाता है।

लोन देने वाली संस्थाओं के लिए सिबिल स्कोर महत्वपूर्ण क्यों है?

जो भी संस्था लोन देने का कार्य करती है सभी का लक्ष्य होता है कि उनको ग्राहक का काम होने के बाद उनको ब्याज सहित रकम वापस मिले। कई बार मामला एनपीए यानी नॉन पार्फेमिंग एसेट में बदल जाता है। एनपीए का मतलब होता है अब लोन के रुप में दी गई रकम को वापस आने की संभावना नहीं है।

एनपीए से बचने के लिए लोन देने वाली संस्थाएं उन्हीं लोगों को लोन देना चाहती हैं जिनसे लोन की रकम वापस आने की उम्मीद हो। क्रेडिट स्कोर से यह स्पष्ट हो जाता है की किन ग्राहकों की स्थिति लोन को वापस करने की है और किन ग्राहकों की स्थिति उस की नहीं है की वह लोन वापस कर सके।

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अगर एक बेहतर क्रेडिट स्कोर की बात करें जिसपर लोन देने वाली संस्थाएं लोन देने में पीछे नहीं हटती तो वह स्कोर है 700 से ऊपर का क्रेडिट स्कोर। 700 से अधिक सिबिल स्कोर होने पर आसान तरीके से लोन मिल जाता है।

अगर किसी कारोबारी का किन्ही कारणों से क्रेडिट स्कोर खराब हो गया हो लेकिन वह अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हो तो उनके लिए ZIpLoan द्वारा दिए जा रहे 1 से 5 लाख तक का बिजनेस लोन बहुत बेहतरीन विकल्प है। ZipLoan कंपनी द्वारा सिर्फ सिबिल संस्था द्वारा जारी क्रेडिट स्कोर को न ही नहीं मानती बल्कि अपने खुद के द्वारा विकसित क्रेडिट स्कोर ‘ZipScore’ पर बिजनेस बढ़ाने के लिए बिना कुछ गिरवी रखे लोन दिया जाता है।

बेहतर क्रेडिट स्कोर का प्रमुख लाभ

अगर आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर है यानी 700 से अधिक की संख्या में है तो आपके लिए बहुत ही अच्छी बात है। आपको एक साथ कई लाभ मिल सकता है। प्रमुख लाभ इस निम्न हैं:

  • बिजनेस लोन मार्केट रेट की अपेक्षा कम ब्याज दर पर मिलता है
  • लोन मिलने में देरी नहीं होती है
  • लंबे समय के लिए लोन मिल सकता है
  • एक समय में 2 लोन लेने की सुविधा

सिबिल स्कोर लोन लेने वालों के लिए एक जादू की तरह काम करता है। अगर क्रेडिट स्कोर ठीक तो झट से बिजनेस लोन या जो भी लोन लेना काहे वह मिल जाता है। अगर सिबिल स्कोर खराब हुआ तो जरा दिक्कत हो सकती है। इस स्थिति में ZipLoan से बिजनेस लोन का लाभ उठाया जा सकता है।

क्लिक कर जानिए सिबिल स्कोर कैसे सुधारें

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