ईएमआई यानी लोन चुकाने के लिए हर महीने जमा की जाने वाली धनराशि। विस्तार से समझते हैं- जब भी कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का लोन लेता है तो उस लोन को एक निश्चित समय – सीमा के भीतर चुकाना होता है। लोन चुकाने के लिए लोन लेने वाला व्यक्ति छोटे – छोटे अमाउंट यानी अपने मुताबिक एक निश्चित धनराशि तय करता है और निश्चित तारीख पर उसको जमा करता है।

यह फाइनेन्शियल कंपनियों और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद होता है। फाइनेन्शियल कंपनी को जहां अपना पैसा मिल जाता है वो भी ब्याज के साथ, वहीं ग्राहक को अपना लोन चुकाने में आसानी होती है। छोटी – छोटी राशि में लोन भुगतान भी हो जाता है और ग्राहक को इसका भार भी नहीं पड़ता है।

व्यक्ति अगर बैंक से लोन लेता है तो उसे बैंक में हर महीने एक निश्चित तारीख को जाकर पैसा जमा करना होता है। कुछ बैंक ऑनलाइन भी EMI जमा करने का विकल्प देते हैं। एनबीएफसी की अधिकतर कंपनियां ऑनलाइन ही EMI  डीडेक्ट करती हैं जिसके लिए ग्राहक से पहले ही ब्लांक चेक ले लिया जाता है।

ईएमआई दो तरह की होती हैं- पहली प्री EMI और दूसरी रेगुलर EMI । कभी – कभी ग्राहक जब लोन लेने जाते हैं या लोन के लिए किसी कंपनी से संपर्क करते हैं तो ईएमआई और प्री EMI को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन जाती है। आइए इस ब्लॉग में EMI और प्री EMI के बारे में विस्तार से समझते हैं।

EMI क्या होती है?- What is EMI?

Equated monthly instalments (EMI) यानी समेकित मासिक किस्त। आइए इसे आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं- यह एक मंथली किश्त होती है। जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या फाइनेंसियल कंपनी से एक बड़ा अमाउंट का लोन लेता है जिसे एक ही बार चुकाना संभव नहीं होता है तो उस धनराशि को चुकाने के लिए छोटी – छोटी कई किश्तें बनाई जाती है, ईएमआई की किश्तों को महीने के शुरुवात में जमा करना होता है। इसे ही EMI कहते हैं।

ईएमआई का निर्धारण लोन इस बात से तय किया जाता है कि लोन कितना बड़ा है और कितने समय के लिए है। अगर लोन की अवधि यानी लोन चुकाने का समय अधिक होता है तो EMI कम होती है। लोन की धनराशि अधिक होने के साथ – साथ चुकाने का समय भी कम होता है तो इस स्थिति में EMI की धनराशि अधिक होती है।

इसे और बेहतर तरीके से समझने के लिए एक उदाहरण के रुप में समझते हैं:

माना रमेश ने किसी कंपनी से 5 लाख का बिजनेस लोन लेता है जिसे चुकाने के लिए 2 साल का समय तय किया गया है। ब्याज दर 28 प्रतिशत के करीब हो तो उस स्थिति में रमेश की मंथली EMI करीब 28 हजार रुपये होगी। (यह सिर्फ उदाहरण दिया गया है EMI को समझने के लिए, वास्तविक ब्याज दर और मासिक ईएमआई अलग हो सकती है)

प्री ईएमआई क्या होती है – What is pre EMI?

प्री का मतलब पहले से होता है। प्री ईएमआई का मतलब है – जिस महीने लोन की धनराशि आपके बैंक खाता में आती है उसी महीने से EMI कटनी शुरु हो जाती है। आइए अब इसे विस्तार से समझते हैं:

माना दिनेश ने 5 लाख का बिजनेस लोन लिया। दिनेश का बिजनेस लोन 2 साल के लिए तय किया गया है, EMI 28 हजार रुपये सालाना है और हर महीने की 5 2 1 तारीख को EMI जमा करने की तारीख तय की गई है। लोन की रकम 15 तारीख को दिनेश के बैंक खाता में जमा हुई हो गई। अब जब ज्यों ही 1 तारीख आयेगी दिनेश के बैंक अकाउंट से 12 हजार रुपये प्री EMI के रूप में कट जायेगा।

अब आप सोचेंगे कि अभी तो महीना भी पूरा नहीं हुआ और लोन की ईएमआई कटनी शुरु हो गई, ऐसा क्यों? तो इसका उत्तर है यह प्री ईएमआई के रुप में पैसा कटा है। अब आप कहेंगे कि फिर EMI और प्री ईएमआई में अंतर क्या हुआ? तो इसका उत्तर है – ईएमआई के रुप में जो पैसा कटता है उसपर ब्याज भी लगता है जबकि प्री ईएमआई के रुप में कटने वाला पैसे पर किसी भी तरह का ब्याज नहीं लगता है। प्री ईएमआई की धनराशि रेगुलर ईएमआई से कम होती है। प्री-ईएमआई कैलकुलेटर लोन के लिए कारकों कैसे प्रभावित कर सकता है।

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प्री-ईएमआई लोन का विकल्प कौन सकता है ?

ऐसे बहुत से लोग होते हैं जिनके पास इतना धन नहीं होता कि वह एक समय में ही दो EMI को भर सके। ऐसे में अगर किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए प्री ईएमआई का विकल्प बेहतर होता है। प्री ईएमआई की रकम तभी कटती है जब लोन का पैसा बैंक खाता में आ जाता है यानी जो पैसा लोन के रुप में मिलता है उसी में से प्री ईएमआई की रकम कटती है। यानी ग्राहक को अपनी पाकेट से पैसा नहीं देना होता है।

ZipLoan कंपनी कारोबारियों की आर्थिक जरूरतों को समझते हुए बिजनेस लोन की प्री ईएमआई का विकल्प सभी कारोबारियों को उपलब्ध कराती है। यानी आपके बैंक खाता में पैसा चला जाता है तभी प्री ईएमआई कटती है। प्री ईएमआई का विकल्प चुनना सभी कारोबारियों के लिए बेहतरीन विकल्प साबित होता है।

ईएमआई कैलकुलेटर कैसे काम करता है? – How an EMI Calculator Works?

किसी भी तरह की EMI की कैलकुलेशन EMI कैलकुलेटर के जरिए की जा सकती है। ZipLoan कंपनी में यह सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से उपलब्ध है। ये कैलकुलेटर आपको अंतिम रिजल्ट देते हैं यानी आप अपनी ईएमआई खुद से कैलकुलेट कर सकते हैं। ईएमआई कैलकुलेट करने में सिर्फ 4 से 5 मिनट का समय लगता ही।

आइए देखते हैं कि EMI निर्धारित होने किन कारकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है:

  • लोन की रकम: EMI में के लिए यह मूल है। मंथली EMI अधिक होगी या कम यह बात लोन की रकम पर ही निर्भर होता है। अगर लोन की रकम अधिक है तो ईएमआई अधिक होगी और लोन की रकम कम होगी तो मंथली ईएमआई कम होगी।
  • लोन चुकाने का समय: लोन चुकाने का समय से मतलब उस समय यानी अवधि से है जिसमे लिया गया लोन चुकाने की बात तय होती है। अगर लोन चुकाने का समय अधिक होगा तो मंथली EMI कम होगी और लोन चुकाने का समय कम होगा तो मंथली अधिक होगा।
  • ब्याज दर: ब्याज दर को इंग्लिश में इंटरेस्ट रेट भी कहा जाता है। ब्याज दर वह होती है जो लोन की रकम पर लगती है। इसे बिल्कुल सिंपल तरीके से समझिए जब बैंक या फाइनेंसियल कंपनी किसी को लोन देती है तो लोन पर ब्याज लेती है। ब्याज दर कई प्रकार की होती है जैसे – फ्लोटिंग / हाइब्रिड / फिक्स्ड रेट। ब्याज दर की राशि कंपनी और बैंक के नियमों के अनुसार बदलती रहती है।

लोन ईएमआई को प्रभावित करने वाले कारक – Factors Affecting Loan EMI

कई कारकों होते हैं जिसके कारण लोन की ईएमआई में समय के साथ बदलाव होता रहता है:

सिबिल स्कोर: बिजनेस लोन की EMIतय होने में सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर की भूमिका अहम होती है। अगर कारोबारी का सिबिल स्कोर 700 से अधिक हुआ तो लोन चुकाने के लिए अधिक समय मिलता है, जिसके कारण लोन की ईएमआई कम होती है।

गिरवी/कोलैटरल: लोन दो तरह का होता है। प्रॉपर्टी गिरवी रखने के बदले और बिना कुछ गिरवी रखे बिजनेस लोन। जब प्रॉपर्टी गिरवी रखने के बदले लोन लिया जाता है तो उसकी मंथली EMI कम होती है वहीं जब बिना प्रॉपर्टी गिरवी रखे बिजनेस लोन लिया जाता है तो उसकी मंथली EMIअपेक्षाकृत अधिक होती है।

ZipLoan से मिलता है बेहद आसान शर्तों पर बिजनेस लोन

फिनटेक सेक्टर की प्रमुख एनबीएफसी कंपनी ZipLoan द्वारा कारोबारियों को 1 से 5 लाख तक का बिजनेस सिर्फ 3 दिन में दिया जाता है। ZipLoan के बिजनेस लोन की शर्ते बेहद आसान हैं। जानिए ZipLoan से बिजनेस लोन लेने से होने वाले लाभों के बारे –  ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के फायदे

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