किसी भी बिजनेस को शुरु करने के लिए पुराने बिजनेस का विस्तार करने के लिए धन यानी पैसों की जरूरत पड़ती है। कारोबारियों के लिए धन का प्रबंध करना अतिआवश्यक होता है बिना धन के कारोबार स्थिर हो जाता है। रुक जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए कारोबारियों को धन का इंतजाम करना ही होता है।

कई बार कारोबारी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से जरूरी धन ले लेते हैं या मांग करते हैं। लेकिन, यह एक अस्थाई तरीका है। क्योंकि, जिस व्यक्ति से कारोबारी पैसे लेते हैं उसने बहुत कम समय के लिए लेते हैं। ऐसे में पैसा जल्दी वापस लौटना भी होता है।

जब कारोबार में पैसों की जरूरत होती है तो इसके लिए बिजनेस लोन लेना एक बेहतर विकल्प है। अधिकांश कारोबारी बिजनेस लोन लेते भी हैं। वहीं कुछ कारोबारी लाइन ऑफ़ क्रेडिट का भी इस्तेमाल करते हैं। ये दोनों ही तरीकों से कारोबार में धन की जरूरत की भरपाई बहुत कम समय में हो जाती है।

व्यवसाय में बिजनेस लोन लाइन ऑफ़ क्रेडिट बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है। इन दोनों तरीकों से धन प्राप्त करके करोबारी कारोबार में आवश्यक मशीनरी, उपकरण या दैनिक खर्च को पूरा कर सकते हैं। अगर अपने बिजनेस की एक और ब्रांच खोलना भी चाहें तो वह खोल सकते हैं।

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि बिजनेस लोन और लाइन ऑफ़ क्रेडिट दोनों तरीके कारोबार के लिए पैसा जुटाने का तरीका है लेकिन इन दोनों शब्दों का अर्थ और उद्देश्य अलग – अलग होता है। आइए इसको विस्तार से समझते हैं:

बिजनेस लोन क्या होता है?

जैसा कि नाम से पता चल रहा है। इसका मतलब बहुत सिंपल है। बिजनेस लोन यानी बिजनेस के लिए दिया जाने वाला लोन। मतलब जो धन कारोबार करने के लिए या कारोबार बढ़ाने के लिए दिया जाता है उसे बिजनेस लोन कहते हैं।

भारत में बिजनेस लोन मुख्य रुप से सरकारी बैंक और प्राइवेट सेक्टर की नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (एनबीएफसी) संस्थाएं प्रदान करती हैं। बिजनेस लोन तहत ली गई राशि का उपयोग का कारोबार की जरूरत के अनुसार किया जाता है।

बिजनेस लोन दो तरीके का होता है

कारोबार के लिए दिया जाने वाला बिजनेस लोन मुख्य रुप से दो तरीके का होता हो:

  • सिक्योर्ड बिजनेस लोन
  • अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन

सिक्योर्ड बिजनेस लोन वह होता है जिसे प्रॉपर्टी गिरवी रखकर लिया जाता है। इस तरह के लोग लॉन्ग टाइम के लिए होते हैं यानी इसे चुकाने के लिए एक लंबा समय मिलता है।

अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन यह वह बिजनेस लोन होता है जिसके बदले कोई प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखना होता है। इसे बिना गिरवी बिजनेस लोन भी कहते हैं। इस तरह के लिए शार्ट टर्म लोन कहलाते हैं।

लाइन ऑफ़ क्रेडिट क्या होता है – What is Line of Credit 

इसे अगर बिल्कुल सिंपल भाषा में कहें तो यह व्यापारियों का क्रेडिट कार्ड होता है। लाइन ऑफ़ क्रेडिट एक प्रकार की निधि (Fund) है जिससे लोन आम तौर पर कारोबारियों, कंपनियों या सरकारी संस्थानों को दिया जाता है। ये लोन बैंको या वित्तीय संस्थानों (financial institutions) द्वारा दिया जाता है। लाइन ऑफ़ क्रेडिट विशेष गतिविधियों के लिए ही उपलब्ध होता है।

लाइन ऑफ़ क्रेडिट से उद्योग अपने बिजनेस के प्रोडक्ट के इम्पोर्ट – एक्सपोर्ट (आयात – निर्यात) में तथा दूसरे प्रदेश और किसी दूसरे देशों में अपना उद्योग स्थापित करने तथा बढ़ाने के लिए ले सकते हैं।

इस प्रकार का क्रेडिट सिर्फ एक संस्था को नहीं मिलता बल्कि लाइन ऑफ़ क्रेडिट की निधि (Fund) की सीमा तक कई संस्थाएं इसे उपयोग में ले सकती है।

अंततः जब क्रेडिट ऑफ़ लाइन लोन से किसी संस्थान या उद्योग को धन (Fund) दिया जाता है तो वो सामान्य लोन की तरह ही होता है और उसे वित्तीय संस्था द्वारा निर्धारित ब्याज दरों एवं निर्धारित समय सीमा में चुकाना होता है।

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बिजनेस लोन और लाइन ऑफ़ क्रेडिट में अंतर – Differences Between Business Loan & Line of Credit 

क्रेडिट ऑफ़ लाइन और बिजनेस लोन दोनों ही लोन प्रोडक्ट हैं लेकिन दोनों में कुछ असमानताएं भी हैं। लघु उद्योग लोन आम तौर पर बिजनेस की किसी एक जरूरत के लिए दिया जाने वाला लोन है। लाइन ऑफ़ क्रेडिट कारोबारी को क्रेडिट की लिमिट तक अपने मनमुताबिक और जरूरत के मुताबिक खर्च करने की आजादी देता है। ऐसे ही कई अंतर हैं, आइए समझते हैं:

पात्रता

बिजनेस लोन पाने के लिए कारोबारी को कुछ जरूरी पात्रता पूरी करना होता है। इन पात्रता में शामिल होता है – बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना होना चाहिए, एक निश्चित रकम तक वार्षिक टर्नओवर होना चाहिए, आईटीआर फाइल होना चाहिए, घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए इत्यादि।

लाइन ऑफ़ क्रेडिट में पात्रता अलग होती है जैसे- लाइन ऑफ़ क्रेडिट कार्ड पाने के लिए कारोबारी को अपना सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर बेहतर बनाएं रखने की जरूरत होती है। बेहतर इनकम होना चाहिए और इनकम सोर्स भी दिखाना होता है।

रकम चुकाने की शर्तें

बिजनेस लोन लेने के साथ ही कारोबारी को हर महीने एक निश्चित ईएमआई चुकाना होता है। बिजनेस लोन में ईएमआई को बदला नहीं जा सकता है।

लाइन ऑफ़ क्रेडिट के द्वारा ली गई रकम को कारोबारी अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार चुकाने के लिए स्वतंत्र होता है। मतलब जैसे – जैसे कारोबारी के पास धन आता जायेगा वह लाइन ऑफ़ क्रेडिट की रकम चुकाता जायेगा। यहां यह भी स्पष्ट है कि एक बार लाइन ऑफ़ क्रेडिट के तहत ली गई रकम चुका नहीं दी जाती तबतक कारोबारी दुबारा क्रेडिट कार्ड से खरीददारी नहीं कर सकता है।

लोन का समय (शार्ट टर्म यानी कम समय के लिए)

बिजनेस लोन हमेशा शार्ट टर्म लोन के अंतर्गत आते है। सामान्य तौर पर बिजनेस लोन को चुकाने का समय 1 साल से 2 साल भीतर का समय होता है। लोन लेते समय ही यह दर्ज हो जाता है कि लोन कितने समय में चुकाया जायेगा। समय से पहले चुकाने पर कई कंपनियां प्री पेमेंट चार्ज भी लेती हैं।

लाइन ऑफ़ क्रेडिट लोन के तहत लिए गए धन को कारोबारी जब चाहें तब चुका सकता है। कोई अधिक चार्ज नहीं देना पड़ता है।

इसके अलावा एक बहुत बड़ा अंतर यह है कि बिजनेस लोन लेने के बाद कारोबारी चाहें पैसो का उपयोग करें या न करें लेकिन उसको ब्याज देना ही पड़ता है। लाइन ऑफ़ क्रेडिट में ऐसा नहीं होता है। लाइन ऑफ़ क्रेडिट में उतने ही पैसों पर ब्याज लिया जाता है जितने पैसों का कारोबारी उपयोग करता है।

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