क्या आप जानतें हैं कि जिस कि जिस बिजनेस में 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं उनके यहां कमर्चारियों का कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) अकाउंट खुलवाना अनिवार्य होता है।

जी हां केन्द्र सरकार की यह गाइडलाइन है  कि जिन बिजनेस में 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं वहां पर कर्मचारियों के पेंशन प्लान के लिए PF (पीएफ अकाउंट) खुलवाना जरूरी होता है।

पीएफ अकाउंट में कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से पैसा जमा होता है। पीएफ अकाउंट के लिए जितना पैसा कर्मचारी की सैलरी से कटता है उतना ही पैसा कंपनी द्वारा कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में जमा किया जाता है।

इस आर्टिकल में आज हम बात करेंगे पीएफ अकाउंट के बारे में, जैसे पीएफ क्या होता है? पीएफ का पैसा कब मिलता है? पीएफ से क्या लाभ है इत्यादि के बारें में।

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कर्मचारी भविष्य निधि संघठन – EPFO

यह एक सरकारी संघठन है। EPFO की स्थापना 15 नवंबर 1951 को की गई थी। इस संघठन की स्थापना कर्मचारियों की हितों का रक्षा करने के लिए और उनके भविष्य को बेहतर बनाने का का उद्देश्य के साथ हुई है।

कर्मचारी भविष्य निधि की स्थापना कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1951 और उसके अन्दर बनी योजनाओं का क्रियान्वयन एक त्रिपक्षीय बोर्ड, केन्द्रीय न्यासी बोर्ड (Central Board of Trustee) द्वारा किया जाता है।

यह कानून जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू है | इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि कर्मचारी भविष्य निधि में हर महीने कुछ रुपये जमा करके व्यक्ति अपने रिटायर्मेंट को सुखद बनाता है |

कमर्चारी भविष्य निधि ऑफिस में उन सभी कंपनी, सरकारी ऑफिस  और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग को रजिस्टर्ड करना पड़ता है जहां पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

इस संस्था का मुख्य काम कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक प्लानिंग करना होता है। EPFO द्वारा कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट खुलता है। पीएफ अकाउंट में कर्मचारी के बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत और इतनी ही रकम जहां वह कर्मचारी काम कर रहा है उनके यहां से हर महीने जमा की जाती है।

पीएफ अकाउंट में पैसा कैसे जमा होता है?

जब कोई कर्मचारी कहीं नौकरी ज्वाइन करता है और उसका पहले से कोई पीएफ अकाउंट नही होता है तो उसके नौकरी ज्वाइन करते ही उस कर्मचारी का पेंशन अकाउंट खुल जाता है। यह जिम्मेदारी उस कंपनी की होती है जहां कर्मचारी नौकरी ज्वाइन करता है।

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कर्मचारी के बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत उसकी सैलरी से पीएफ के काटा जाता है और इतना ही योगदान कंपनी (Employer) की तरफ से दिया जाता है।

व्यक्ति की सैलरी का 12% कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में पूरा जमा हो जाता है जबकि कंपनी द्वारा किया गये योगदान का केवल 3.67 % ही EPF में जमा होता है। बकाया का 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना  (Employee’s Pension Scheme-EPS)  में जमा हो जाता है।

इसे एक उदहारण के रुप में समझते हैं: माना कर्मचारी दिनेश एक कंपनी में नौकरी ज्वाइन करता है। दिनेश की बेसिक सैलरी 5 हजार रुपये प्रति – महिना तय होती है। अब इसमें से सिर्फ 8.33% ( Rs 416)  ही कर्मचारी पेंशन योजना  (Employee’s Pension Scheme-EPS) में जमा होंगे बकाया रुपया EPF में जमा हो जायेगा।

इस तरह देखें तो कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) से कर्मचारियों के भविष्य के लिए व्यापक लाभ मिलता है। कर्मचारी को भविष्य में एक निश्चित रकम प्रतिमाह मिलती रहती है, जिससे उसका जीवन आसान हो जाता है।