व्यापार में कुछ शब्द हर समय सुनाई पड़ते है। इन शब्दों में कैश फ्लो- cash flow, कैश फ्लो स्टेटमेंट- cash flow statement, बिजनेस लोन– business loan, फंड फ्लो- fund flow, आने वाला पैसा- Incoming Cash, जाने वाला पैसा- Outgoing Cash, कैश मूवमेंट- Cash Movement, प्राफिट- Profit, नुकसान- Loss, और न फायदा न नुकसान- No Profit No Loss इत्यादि शामिल होता है। इन शब्दों के कारोबार में अपना महत्व होता है। इन शब्दों के बारे में हर कारोबारी को पता होना चाहिए, इसी लिए इस ब्लॉग में हम इन सभी शब्दों को बतायेंगे विस्तार से।

Cash Flow क्या होता है?

Cash Flow (कैश फ्लो) को हिंदी में नकद प्रवाह कहा जाता है। यह नगद प्रवाह को आसान तरीके से इस तरह समझा जा सकता है- कारोबार में प्रोडक्ट बेचने के बदले पैसे आते हैं लेकिन प्रोडक्ट बनाने के मैटेरियल में पैसे चले जाते है। कारोबार में रोज़ाना की ज़रूरत होती है उनमें पैसे चले जाते है। कर्मचारियों को सैलरी देने में पैसे लगते हैं। इस तरह ज़रूरतों जिस रकम से पूरा किया जाता है उसे ही CASH FLOW (कैश फ्लो) कहा जाता है।

अक्सर लोग इसे बोलचाल की भाषा में बोलते रहते है कि- यार पैसा तो आता है लेकिन हाथ में टिकता नहीं, इधर से आता है उधर चला जाता है। पैसा हाथ का मैल है। पैसे के पैर हो गए हैं, रुकते ही नहीं हैं। इन्हीं सब को कैश फ्लो की कैटेगरी में रखा जाता है। आइए Cash Flow (कैश फ्लो) के बारे में विस्तार से समझते हैं।

कैश फ्लो- Cash Flow एक फ़ाइनेंशियल टर्म है। यह मूल रूप से एक विवरण पत्र- Statement होता है। इस विवरण- Statement में कारोबार/कंपनी या संस्था के पास पैसा कहा से आ रहा है और पैसा कहा जा रहा है। पैसा कितना आ रहा है और पैसा कितना जा रहा है। इन सब बातों को बहुत ही आसान तरीके से दर्शाया जाता है। बिजनेस में कैश फ्लो Cash Flow एक निश्चित समय पर आने वाली रकम और बाहर जाने वाली रकम की क्रिया Cash Movement या Cash flow कहलाती है।

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बिजनेस में आने और जाने वाले पैसे का प्रकार

किसी भी बिजनेस में आने और जाने वाले पैसे दो तरीके के होते हैं:

  • Incoming Cash
  • Outgoing Cash
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Incoming Cash- बिजनेस में सभी सोर्स से आने वाले पैसे इनकमिंग- Incoming Cash कहलाता है। इसमें प्रोडक्ट बेचने के बदले मिली रकम, सर्विस देने के बदले मिली रकम, किसी भी तरह की उधारी की मिली रकम शामिल होती है। इसे CASH generated from operation of business भी कहते है।

Outgoing Cash- बिजनेस में किसी भी तरह की खर्च की जाने वाली रकम को Outgoing कैश कहते हैं। इसमें रेंट, बिजनेस लोन पर ब्याज दर और किसी भी तरह की उधारी चुकाने के लिए दी जाने वाली रकम Outgoing कैश कहलाती है।

कैश फ्लो 3 प्रकार के होते है

  • सकारात्मक कैश फ्लो- Positive Cash Flow
  • नकारात्मक कैश फ्लो- Negative Cash Flow
  • ब्रेक इवन कैश फ्लो- Break Even Cash Flow

सकारात्मक कैश फ्लो- Positive Cash Flow-  जब कारोबार में ख़र्चा से अधिक मुनाफा होता है तो उसे Positive Cash Flow  कहते हैं।

नकारात्मक कैश फ्लो- Negative Cash Flow- कारोबार में जब खर्च अधिक लगे और मुनाफा कम हो तो उसे Negative Cash Flow कहते हैं।

ब्रेक इवन कैश फ्लो- Break Even Cash Flow- कारोबार में जब न घाटा हो और न ही मुनाफा यानी मामला बराबरी पर बना  रहे तो उसे Break Even Cash Flow कहते हैं।

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बिजनेस में Cash Flow का महत्व

कैश यानी धन की जरूरत हर किसी को होती है। कारोबार बड़ा हो या छोटा बिना धन की मदद से आगे नहीं बढ़ सकता। बिजनेस एक दूसरी जरूरी चीज यह होती है कि कारोबार में सकारात्मक कैश फ्लो- Positive Cash Flow जितना अधिक से अधिक हो उतना ही बेहतर होता है। सकारात्मक कैश फ्लो से कारोबारी के अंदर आत्मविश्वास पैदा होता है वह आगे बढ़ने के लिए उन्मुख होता है। कारोबार में सकारात्मक कैश फ्लो यह बताता है कि कारोबार में लाभ हो रहा है, इससे कारोबारी और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित होता है।

नए और छोटे कारोबार में पैसों की समस्या होना आम बात होती है, क्योंकि अधिकतर बिजनेस/कंपनी के पास रिजर्व कैश फंड नहीं होता है। ऐसे में जैसे ही कोई आर्थिक दिक्कत आती है तो कारोबार बंदी के कगार पर खड़ा हो जाता है। ऐसे में कैश फ्लो के लिए बिजनेस लोन बहुत कारगर होता है। बिजनेस लोन की सहायता से कारोबारी अपनी आर्थिक ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं।

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कारोबार में न लाभ न घाटा की स्थिति होना चिंताजनक होती है। ऐसी स्थिति में बिजनेस की रणनीतियों के तरफ ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है। नहीं तो कब या स्थिति घाटा में बदल जाए कहा नहीं जा सकता।

किसी भी कारोबार/बिजनेस में नेगेटिव कैश फ्लो का होना बहुत खतरनाक होता है। नेगेटिव कैश फ्लो का मतलब है की कारोबार में सिर्फ पैसा लगाया जा रहा है, मुनाफा नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में कारोबार की रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर कोई नई मशीनरी की जरूरत हो तो उसे बिजनेस लोन के जरिए ख़रीद लेना चाहिए लेकिन किसी भी कंडिशन में कारोबार का नेगेटिव कैश फ्लो नहीं होना चाहिए।

कैश फ्लो स्टेटमेंट – Cash Flow Statement

कैश फ्लो स्टेटमेंट किसी भी बिजनेस का लेखा – जोखा होता है। किसी भी बिजनेस का कैश फ्लो स्टेटमेंट Cash Flow Statement देखकर यह आसानी से पता चल सकता है कि बिजनेस में कितना पैसा आया और बिजनेस से कितना पैसा निकल गया।

बिजनेस के वित्तीय विवरणों के तीन महत्वपूर्ण भाग हैं: बैलेंस शीट, आय विवरण और कैश फ्लो विवरण। बैलेंस शीट कंपनी की संपत्ति और देनदारियों का एकमुश्त स्नैपशॉट देता है। आय विवरण एक निश्चित अवधि के दौरान व्यवसाय की लाभप्रदता को इंगित करता है।

कैश फ्लो स्टेटमेंट अन्य वित्तीय विवरणों से भिन्न होता है क्योंकि यह एक कॉर्पोरेट चेकबुक के रूप में कार्य करता है जो अन्य दो विवरणों को समेटता है। कैश फ्लो स्टेटमेंट दी गई अवधि के दौरान कंपनी के कैश ट्रांजैक्शन (इनफ्लो और आउटफ्लो) को रिकॉर्ड करता है। यह दर्शाता है कि आय विवरण पर बुक किए गए सभी राजस्व एकत्र किए गए हैं या नहीं।

उसी समय, हालांकि, कैश फ्लो आवश्यक रूप से कंपनी के सभी खर्चों को नहीं दिखाता है क्योंकि कंपनी द्वारा अर्जित सभी खर्चों का भुगतान तुरंत नहीं किया जाता है। हालांकि कंपनी पर देनदारियां हो सकती हैं, लेन-देन होने तक इन देनदारियों के लिए कोई भी भुगतान नकद बहिर्वाह के रूप में दर्ज नहीं किया जाता है।

कैश फ्लो स्टेटमेंट पर ध्यान देने वाली पहली वस्तु बॉटम लाइन आइटम है। यह “नकदी और नकद समकक्षों (सीसीई) में शुद्ध वृद्धि/कमी” होने की संभावना है। निचला रेखा पिछली अवधि में कंपनी की नकदी और उसके समकक्षों (ऐसी संपत्ति जिन्हें तुरंत नकदी में परिवर्तित किया जा सकता है) में समग्र परिवर्तन की रिपोर्ट करता है। यदि आप बैलेंस शीट पर करंट एसेट्स के तहत चेक करते हैं, तो आपको सीसीई मिलेगा। यदि आप वर्तमान सीसीई और पिछले वर्ष या पिछली तिमाही के बीच का अंतर लेते हैं, तो आपके पास कैश फ्लो के विवरण के नीचे की संख्या के समान संख्या होनी चाहिए।

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कैश फ्लो का विश्लेषण

अन्य वित्तीय विवरणों के संयोजन के साथ कैश फ्लो विवरण का उपयोग करने से विश्लेषकों और निवेशकों को विभिन्न मैट्रिक्स और अनुपातों पर पहुंचने में मदद मिल सकती है जिनका उपयोग सूचित निर्णय और सिफारिशें करने के लिए किया जाता है।

लोन सर्विस कवरेज अनुपात (डीएससीआर)

यहां तक ​​कि लाभदायक कंपनियां भी विफल हो सकती हैं यदि उनकी परिचालन गतिविधियां लिक्विडिटी रहने के लिए पर्याप्त कैश उत्पन्न नहीं करती हैं। यह तब हो सकता है जब लाभ बकाया खातों में प्राप्य और ओवरस्टॉक की गई सूची में बंधे हों, या यदि कोई कंपनी पूंजीगत व्यय (CapEx) पर बहुत अधिक खर्च करती है।

इसलिए, निवेशक और लेनदार जानना चाहते हैं कि क्या कंपनी के पास अल्पकालिक देनदारियों को निपटाने के लिए पर्याप्त सीसीई है। यह देखने के लिए कि क्या कोई कंपनी परिचालन से उत्पन्न नकदी के साथ अपनी वर्तमान देनदारियों को पूरा कर

लोन सर्विस कवरेज अनुपात = शुद्ध परिचालन आय / अल्पकालिक लोन दायित्व (जिसे “लोन सर्विस” भी कहा जाता है)

लेकिन लिक्विडिटी हमें केवल इतना ही बताती है। एक कंपनी के पास बहुत अधिक नकदी हो सकती है क्योंकि वह अपनी दीर्घकालिक संपत्ति को बेचकर या ऋण के अस्थिर स्तरों को लेकर अपनी भविष्य की विकास क्षमता को गिरवी रख रही है।

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ZipLoan से मिलता है कैश फ्लो ठीक करने के लिए बिजनेस लोन

फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख NBFC कंपनी ‘ZipLoan’ कंपनी छोटे एवं मध्यम कारोबारियों की मदद करने के लिए 1 से 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिनों* में प्रदान करती है। ZipLoan कंपनी द्वारा प्रदान किये गए बिजनेस लोन का इस्तेमाल कारोबारी कैश फ्लो ठीक रखने में इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप अपने कारोबार में कैश फ्लो ठीक रखने की समस्या से जूझ रहे हैं तो ZipLoan के बिजनेस लोन का लाभ उठा सकते हैं।

 

कैश फ्लो स्टेटमेंट क्या होता है?

कैश फ्लो स्टेटमेंट किसी बिजनेस का लेखा – जोखा होता है। कैश फ्लो स्टेटमेंट काे देखकर पता लग सकता है कि बिजनेस में कितना कैश आया और बिजनेस से कितना कैश निकला।