एक ऐसा लोन जो किसी कारोबार/कंपनी के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए लिया जाता है उसे कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल लोन कहते हैं। वर्किंग कैपिटल का मुख्य उद्देश्य होता है – कारोबार का  बिना किसी रुकावट विकास करना।

इसे हम इस तरह भी कह सकते हैं कि Working Capital Loan किसी भी बिजनेस का ऑक्सीजन होता है। जिस तरह ऑक्सीजन का कार्य होता है इंसानों को जिन्दा रखना उसी तरह वर्किंग कैपिटल का भी काम होता है – बिजनेस को चलाना। बिजनेस का विस्तार करने में सहायता करना। बिजनेस की किसी भी छोटी और मध्यम स्तर की जरूरत को पूरा करना।

वर्किंग कैपिटल लोन की रकम का उपयोग बिजनेस की दैनिक जरूरतों जैसे – बिजली, पानी, नाश्ता, बिजनेस की जगह का किराया (अगर बिजनेस किराया की जगह पर चलता है तब) इत्यादि जैसे कार्यों में उपयोग किया जाता है।वर्किंग कैपिटल अंग्रेजी शब्द है इसे हिंदी में कार्यशील पूंजी कहा जाता है।

कारोबार चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल हर बिजनेस में साल में या 6 महीने के लिए एक ही बार सुरक्षित कर दिया जाता है। जिन कारोबार में इतना धन नही होता कि वह 1 साल या 6 महीने के लिए वर्किंग कैपिटल के रुप में इक्कठे धनराशी रख सके, उसको चाहिए कि वह Working Capital Loan के जरिये धन सुरक्षित कर लें। वर्किंग कैपिटल प्रमुख रुप से सरकारी बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (एनबीएफसी) संस्थाओं द्वारा दिया जाता है।

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वर्किंग कैपिटल कैसे काम करता है? – How Does Work Working Capital?

कोई भी बिजनेस हो, वह चाहें बड़ा हो या छोटा उसको चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल के रुप कुछ रकम रखी जाती है। इस रकम को सिर्फ उन्हीं खर्चों को पूरा करने के लिए खर्च किया जाता है जिसकी जरूरत तत्काल होती है। तत्काल जरूरतों को पूरा करने वाली रकम को वर्किंग कैपिटल कहते हैं।

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कार्यशील पूंजी को एक उदाहरण के रुप में समझते हैं। माना एक बिजनेस है। उस बिजनेस में कुल 20 लोग काम करते हैं। इन 20 लोगों की बैठने के लिए जगह चाहिए है। जगह किराये पर ली जाती है। जो जगह किराये पर ली जाने वाली उस जगह पर बिजली – पानी की भी व्यवस्था करना होता है।

कर्मचारियों को सुबह और शाम को चाय – नाश्ता देना होता है। इस तरह के सभी कार्यों को करने में धन की आवश्यकता होती है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए जो धन खर्च किया जाता है वह वर्किंग कैपिटल कहलाता है।

कुछ बिजनेस में यह वर्किंग कैपिटल की धनराशी पहले से ही निश्चित करके सुरक्षित कर दी जाती है। जिस बिजनेस में वर्किंग कैपिटल के रुप में धनराशी पहले सुरक्षित करने का फण्ड नही होता है उन कारोबारियों को Working Capital Loan लेना बेहतर साबित होता है।

लघु उद्योग के लिए वर्किंग कैपिटल लोन Working Capital Loans for Small Business

स्माल बिजनेस यानी लघु उद्योग के मामले में स्थिति जरा अलग होती है। अधिकतर लघु उद्योगों के पास इतना राजस्व यानी धन नही होता है कि वह वर्किंग कैपिटल के लिए अलग से पैसा निकाल कर सुरक्षित रख सकें।

लघु उद्योगों में प्रोड्क्शन और बिक्री सीजनल होती है जैसे मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के कारोबार में प्रोडक्ट की बिक्री चक्रीय होती है यानी एक सीजन में खूब बिक्री होती है तो हो सकता है कि दूसरे सीजन में बिक्री न हो या कम हो तो उस सीजन में उद्यमी प्रोड्क्शन करने का कार्य करते हैं।

अब जब जिस सीजन में बिक्री नही होती है तो उस सीजन में कारोबार कैसे चलेगा? ऐसा तो नही हो सकता है की बिजनेस को बंद कर दिया जाये। तो इसका सलूशन होता है – वर्किंग कैपिटल। वर्किंग कैपिटल के लिए सुरक्षित की गई धनराशी के जरिये बिक्री न होने वाले महीने के खर्चों को पूरा किया जाता है।

यहाँ पर आपको बता दें कि जिस लघु उद्योग में वर्किंग कैपिटल सुक्षित नही रखा गया होता है उस बिजनेस के मालिकों को Working Capital Loan लेना चाहिए। वर्किंग कैपिटल लोन के लिए फिनटेक सेक्टर की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan के द्वारा 1 से 7.5 लाख तक का वर्किंग कैपिटल लोन सिर्फ 3 दिन मिलता है।

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वर्किंग कैपिटल लोन का लाभBenefits of a Working Capital Loan

कार्यशील पूंजी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसे प्राप्त करना बेहद आसान है। जब Working Capital Loan मिल जाता है तो कारोबारियों को अपने बिजनेस के लिए खर्च जुटाना आसान हो जाता है। कारोबारियों की आर्थिक मुश्किले आसान हो जाती है। बिजनेस में होने वाले दैनिक खर्च के लिए कारोबारियों को परेशान नही होता पड़ता है। ऐसे ही तमाम लाभ हैं जिसके लिए वर्किंग कैपिटल लोन की जरूरत पडती है।

वर्किंग कैपिटल लोन कितने प्रकार का होता है? – Types of Working Capital

जिस प्रकार बिजनेस लोन दो प्रकार का होता है ठीक उसी तरह वर्किंग कैपिटल लोन भी दो प्रकार का होता है। पहला – सिक्योर्ड वर्किंग कैपिटल लोन (प्रॉपर्टी गिरवी रखने के बदले) दूसरा अनसिक्योर्ड वर्किंग कैपिटल लोन (बिना कोई प्रॉपर्टी गिरवी गिरवी रखें)।

सिक्योर्ड वर्किंग कैपिटल लोन: सिक्योर्ड का अर्थ सुरक्षित होता है। लोन के मामले में बैंक या लोन देने वाली कम्पनियाँ अपने लोन की सुरक्षा के लिए प्रॉपर्टी गिरवी रखवा लेती हैं। कार्यशील पूंजी में भी ठीक यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। बिजनेस की कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखने के बदले वर्किंग कैपिटल लोन दिया जाता है।

बिना प्रॉपर्टी गिरवी रखे वर्किंग कैपिटल लोन: इसे अनसिक्योर्ड Working Capital Loan कहते हैं। यह सिक्योर्ड Working Capital Loan से ठीक उलटा होता है। इस तरह का Working Capital Loan लेने के लिए कुछ प्रॉपर्टी गिरवी नही रखना होता है।

किसी भी कारोबारी को वर्किंग कैपिटल के लिए कब अप्लाई करना चाहिएWhen should you apply for a Working Capital Loan?

समान्य तौर पर यह कारोबारियों की जरूर पर निर्भर करता है। लेकिन बिजनेस में कुछ स्थिति होती है जब Working Capital Loan लेना फायदेमंद होता है। आइये समझते हैं कि Working Capital Loan किन – किन परिस्थितों में लेना लाभप्रद होता है:

मौसमी प्रोडक्ट बिक्री के लिए वर्किंग कैपिटल लोन

एक साल में 12 महीने होते हैं। हमारे देश में 12 महीनों में 4 मौषम बदलते हैं। 3 महीने गर्मी होती है। 3 महीने ठंठी। 3 महीने बरसात के साथ और 3 महीने पतझड़। ऐसे में लोगों को बदलते मौषम के अनुसार कपड़ों के साथ अन्य जरूरी चीजों की भी जरूरत पड़ती है।

कारोबारी हर सीजन के अनुसार अपना बिजनेस सेट करते हैं। ऐसे में कोई भी सीजन शुरु होने से पहले ही उस सीजन के प्रोडक्ट पहले खरीद कर स्टोर कर लेना होता है। अगर किसी कारोबारी के पास प्रोडक्ट स्टोर करने के लिए पर्याप्त फण्ड नही होता है तो उसके लिए वर्किंग कैपिटल लोन लेना लेना फायदेमंद होता है।

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जानिए वर्किंग कैपिटल लोन लेने के लिए किन डाक्यूमेंट्स की पड़ती हैं जरूरत

Ziploan से वर्किग कैपिटल लोन लेने के लिए निम्नलिखित कागज़ातों की ज़रूरत होती है

  1. पिछले 9 महीने का बैंक स्टेटमेंट

  2. पिछले 1 साल के दौरान भरी गई ITR की कॉपी

  3. घर या कारोबार के पता का प्रमाण पत्र

  4. KYC डाक्यूमेंट्स (पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, या अन्य सरकारी प्रमाण पत्र)

बिजनेस में दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन 

कारोबार में हर रोज के कुछ खर्चें होते हैं। इन खर्चों को उसी समय पूरा करना होता है। इन खर्चों में कर्मचरियों के लिए चाय – नाश्ता, विभन्न बिलों का निपटारा और दैनिक कर्मचारियों की सैलरी इत्यादि शामिल होती है। जिन कारोबारियों को बिजनेस में इस तरह के खर्चों को पूरा करने में कठिनाई हो रही हो उन्हें Working Capital Loan लेना फायदेमंद साबित होगा।

कैश फ्लो ठीक रखने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन

कारोबार में हर रोज सामान की बिक्री होती है। कुछ का भुगतान नगद होता है, कुछ सामान उधार जाती है। मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में कच्चा माल खरीदना होता है। इन सभी के बिच कैश इधर से उधर जाता है। कारोबारियों को इस के कैश फ्लो को मेंटेन करने के लिए Working Capital Loan बेहतर साबित होगा।

ZipLoan से मिलता है सिर्फ 3 दिन में वर्किंग कैपिटल लोन

अगर आपका बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना है, पिछले साल आपने डेढ़ लाख की ITR फाइल की है और सालाना टर्नओवर कम से कम 10 लाख तक का होता है तो आपको ZipLoan से प्राप्त होगा सिर्फ 3 दिन में वर्किंग कैपिटल लोन, वो भी बिना 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री की सुविधा के साथ।

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