सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन करते हुए उद्योगों से कहा कि वह उत्पादों कि बेहतर गुणवत्ता और लागत पर ध्यान दें। आगे बोलते हुए श्री गडकरी के कहा कि MSME क्षेत्र की देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जीडीपी और निर्यात क्षेत्र में एमएसएमई की भूमिका बढ़ रही है। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनायें भी तेजी से बढ़ रही हैं।

आपको बता दें कि प्रगति मैदान में 39वां भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (Indian International Trade Fair) का आयोजन हुआ था। यह मेला 14 नवंबर 19 से 27 नवंबर 19 तक चलेगा। इस साल व्यापार मेले में हर रोज करीब 20-25 हजार से ज्यादा लोगों के आने की संभावना जताई गई थी, जो कि सच साबित हो रही है।

भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का केन्द्रीय मेले का का विधिवत उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया गया। गडकरी ने कारोबारियों को संबोधित भी किया। गडकरी के संबोधन से जो मुख्य बातें निकल कर आई वह इस तरह से हैं:

  • एमएसएमई उद्योग का विस्तार करना है।
  • देश के निर्यात मे एमएसएमई कारोबार का योगदान बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना है और आर्थिक वृद्धि में 50 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बढ़ाना है।
  • जीडीपी में वर्तमान हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना है।
  • उत्पादों कि गुणवत्ता और लागत पर ध्यान देना है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग में रोजगार की संभावनायें भी तेजी से बढ़ाना है।
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ये तो बातें हो गई कि केन्द्रीय मंत्री ने ऐसा बोल दिया। लेकिन जो चीजें बोली गई उस रिजल्ट तक कैसे पहुंचा जा सकता है आइये उस पॉइंट्स को समझते हैं।

एक्सपोर्ट सेक्टर (निर्यात क्षेत्र) में MSME का योदगान बढ़ाना

निर्यात सेक्टर में एमएसएमई का योगदान बढ़ाने के लिए उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धा के लिये बिजली और दूसरी लागतों को भी कम करना होगा। नये टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग (प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण) केंद्रों पर जोर देते हुये गडकरी ने कहा कि बिना प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) के बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करना मुश्किल काम है। उन्होंने इसके लिये बेहतर प्रदर्शनी स्थलों की जरूरत बताया।

लेदर निर्यात (एक्सपोर्ट) इंडस्ट्री में क्लस्टर बनाना

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के ही एक अलग कार्यक्रम जो कि चमड़ा उद्योग से जुड़ा था। चमड़ा उद्योग से जुड़े कार्यक्रम में गडकरी ने कहा, चमड़ा उद्योग को पिछड़े इलाकों में संकुल (Clusters) विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। इन इलाकों में उन्हें कम लागत पर भूमि और मानव संसाधन मिल सकता है।

केन्द्रीय मंत्री ने सरकार की तरफ से कहा कि सरकार ऐसे संकुलों को कुछ रियायत देने पर विचार कर सकती है जो प्रयोगशाला और डिजाइनिंग केंद्र जैसी सुविधाओं से पूर्ण हों। आपको बता दें कि वह यहां चर्म निर्यात परिषद (सीएलई) के राष्ट्रीय निर्यात उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह के अवसर पर बोल रहे थे।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली और कानपुर के पास भूमि महंगी है। इसलिए चमड़ा उद्योग को नए क्षेत्रों में विस्तार करना चाहिए। साथ ही सुझाव देते हुए गडकरी ने कहा कि देश में 22 एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। जरूरत पड़ी तो इन 22 एक्सप्रेस-वे के आसपास जमीन खरीदकर संकुल बनाने पर विचार किया जा सकता।

उदाहरण देते हुए दिल्ली-मुंबई राजमार्ग मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा के जो पिछड़े या जनजातीय इलाकों से गुजरता है। इन इलाकों का नाम लेते हुए कहा कि इन इलाकों में उद्योगों को सस्ती भूमि और श्रम उपलब्ध हो सकता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम मंत्री इस बात सहमत हुए कि सरकार एमएसएमई के लिये तय कारोबार सीमा को भी बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर और तेजी से बढ़ें। हम चाहते हैं कि पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में एमएसएमई क्षेत्र का तेजी से विकास हो।

 

 

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