हमारे देश में अगर कोई व्यक्ति दिव्यांग/विकलांग होता है तो उसे सहानभूति की नजरों से लोग देखने का प्रयास करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लोगों के नजरिये में बदलाव देखने को आया है। इस बदलाव के पीछे दिव्यांग/विकलांग लोगों का आर्थिक रुप से समर्थ होना है।

अब केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे दिव्यांग/विकलांग भी सम्मानित जीवन जी सकते हैं। केन्द्र सरकार द्वारा कई ऐसी सरकारी योजना शुरु हुई है जिसमे विकलांगों/दिव्यंगों को कारोबार करने के लिए बिजनेस लोन मुहैया कराया जाता है।

एक ऐसी ही योजना नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन द्वारा चलाई जा रही है। नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन द्वारा दिव्यांग/विकलांग लोगों को बिजनेस शुरु करने के लिए 5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन स्वीकृत किया जाता है।

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (NHFDC) द्वारा स्वीकृत बिजनेस लोन का भुगतान लिस्टेड बैंक और एनबीएफसी से होता है। सरल भाषा में कहें तो पहले NHFDC द्वारा बिजनेस लोन स्वीकृत किया जाता है। फिर NHFDC के यहां लिस्टेड बैंक और एनबीएफसी से बिजनेस लोन मिलता है।

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नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (NHFDC) क्या है?

यह एक केन्द्र सरकार का संगठन है। इस संगठन का मुख्य कार्य दिव्यांग/विकलांग लोगों की आर्थिक से रुप से मदद करके उन्हें सशक्त करना है। इसे हम इस तरह भी कह सकते हैं कि भारत सरकार द्वारा दिव्यांग/विकलांग लोगों की जिंदगी आसान करने के लिए नेशनल हैंडीकैप्ड फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन‘ (NHFDC) का गठन किया गया है।

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नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (NHFDC) की स्थापना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 24 फरवरी, 1997 को की गई थी। NHFDC, कम्पनी अधिनियम, 1956, अनुच्छेद-25 के तहत पंजीकृत है तथा ये गैर-लाभ वाली (नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन) कम्पनी है।

यह भारत सरकार द्वारा पूर्णतया स्वामित्व वाली कम्पनी है और इसकी प्राधिकृत अंश पूंजी 400 करोड़ रुपये (चार सौ करोड़ रुपये मात्र) है। कम्पनी निदेशकों के बोर्ड द्वारा प्रबंधित की जाती है जो भारत सरकार द्वारा नामांकित किये जाते है।

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (NHFDC) का उद्देश्य क्या है?

NHFDC का उद्देश्य दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों के लाभार्थ आर्थिक विकास क्रियाकलापों को बढ़ावा देना। दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों के लाभ/आर्थिक पुनर्वास के लिए अन्य उपक्रमों एवं स्वरोजगार को प्रोत्साहन देना। उन विकलांग व्यक्तियों लोन प्रदान करना जो बिजनेस करने के लिए कोई वोकेशनल ट्रेनिंग लेना चाहते हैं।

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मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट (उत्पादन इकाई) के पर्याप्त एवं दक्ष प्रबंधन के लिए विकलांग व्यक्तियों के तकनीकी एवं उद्यमीय कौशल के उन्नयन में सहायता प्रदान करना। तैयार माल की बिक्री के लिए विकलांग व्यक्तियों की मदद करना। बिजनेस को शरू करने के लिए बिजनेस लोन देना ही नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (NHFDC) का उद्देश्य है।

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से किस बिजनेस के लिए लोन मिलता है?

NHFDC द्वारा जिन कारोबार के लिए बिजनेस लोन मिलता है, वह कारोबार निम्न हैं:

  • कमर्शियल वाहन खरीदने के लिए
  • सर्विस/ट्रेडिंग का बिजनेस करने के लिए लोन
  • कृषि गतिविधियाँ चलाने के लिए लोन
  • छोटी औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए लोन
  • मानसिक रुप से अविकसित व्यक्तियों के लिए लोन

कमर्शियल वाहन खरीदने के लिए लोन

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से कमर्शियल वाहन खरीदने के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन मिलता है। लोन की राशि का उपयोग ऑटोरिक्शा सहित सभी वाहन की खरीद करने के लिए किया जा सकता है।

सर्विस/ट्रेडिंग का बिजनेस करने के लिए लोन

सर्विस/ट्रेडिंग क्रियाकलाप के लिए 3 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन और सर्विस सेक्टर का बिजनेस करने के लिए लिए 5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से मिलता है।

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आपको जानकारी के लिए बता दें कि जिस छोटे व्यवसाय, परियोजना अथवा क्रियाकलाप के लिए वित्तीय सहायता मांगी गई है उसे विकलांग व्यक्ति को स्वयं चलाना होगा और इस उपक्रम में कम से कम 15 प्रतिशत दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों को रोजगार देना होगा।

कृषि गतिविधियाँ चलाने के लिए लोन

एग्रीकल्चर वर्क यानी कृषि गतिविधियाँ चलाने के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन मिलता है। यह लोन सहायता दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों को कृषि उत्पादन, सिंचाई, बागवानी, रेशमपालन, कृषि सेवा के लिए कृषि  संबधी मशीनरी/उपकरण  की खरीद, कृषि उत्पादकों के विपणन आदि के लिए मुहैया कराया जाता है।

छोटी औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए लोन

एमएसएमई लगाने के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन मिलता है। यह लोन दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों को निर्माण, गढ़ाई एवं उत्पादन के लिए मुहैया कराया जाता है। दिव्यांग/विकलांग व्यक्ति ही इस कम्पनी का मालिक/मुख्य कार्यकारी होगा और अपनी कम्पनी में कम से कम 15 प्रतिशत  विकलांग व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करेगा।

मानसिक रुप से अविकसित व्यक्तियों के लिए लोन

सेरेबरल पालसी और ऑटिज्म से पीड़ित यानी मानसिक रुप से अविकसित व्यक्तियों को स्व:रोजगार करने के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन की स्टेट चैनलाइजिंग एजेंसी (एस.सी.ए) नियम के तहत प्रदान किया जाता है।

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ऐसे मामलों में, वित्तीय सहायता आश्रित मानसिक रुप से अविकसित अथवा कानूनी अभिभावक अथवा पत्नी के माध्यम से प्रदान की जाती है।

NHFDC के तहत इन बैंको से लोन मिलता है

  • नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन
  • पंजाब एण्ड सिंध बैंक
  • ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC)

NHFDC के तहत मिलने वाले बिजनेस लोन पर ब्याज दर इतना होता है

बिजनेस लोन की रकम ब्याज दर का रेट
50 हजार रुपये से कम लोन5 प्रतिशत ब्याज दर
50 हजार से 5 लाख रुपये तक का लोन6 प्रतिशत ब्याज दर
5 लाख से 15 लाख रुपये तक का लोन7 प्रतिशत ब्याज दर
15 लाख से 25 लाख रुपये लोन8 प्रतिशत ब्याज दर

यहां बताई गई ब्याज दरें बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है। ब्याज दर तय करने का अधिकार भारतीय रिजर्ब बैंक (RBI) और बैंकों का है। ब्याज दर समय – समय बदलती रहती है। लोन के लिए आवेदन करते समय बैंक से ब्याज दर के बारें में जरुर जानकारी प्राप्त करें।

महिलाओं के लिए ब्याज दर कम होती है

जब नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से लोन के लिए कोई महिला दिव्यांग/विकलांग आवेदन करती हैं तो ब्याज दर पुरुषों के अपेक्षा कम लागू किया जाता है। महिलाओं को ब्याज दर में 1 प्रतिशत की अतिरिक्त की छूट प्रदान की जाती है।

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से लोन के लिए शर्तें क्या हैं?

  • आवेदन कर्ता भारतीय नागरिक हो।
  • 18 वर्ष से अधिक उम्र होना चाहिए।
  • भारत सरकार के मानक अनुसार न्यूनतम 40% दिव्यांगता/विकलांगता होना चाहिए।
  • कम से कम 10वीं क्लास पास होना चाहिए।
  • जिस बिजनेस के लिए लोन की मांग की जा रही हो, वह बिजनेस CGS के अप्रूव्ड होना चाहिए

दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों की शिक्षा/प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत सरकार का प्रयास है कि देश में सभी दिव्यांग/विकलांग लोगों को उचित रोजगारपरक शिक्षा/ प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें समर्थ बनाया जाये। इसीलिए दिव्यांगजनों/विकलांगजनों को नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन द्वारा रोजगारपरक शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है।

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भारत एवं विदेशों में शिक्षा मान्यताप्राप्त शैक्षिक संस्थान से व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को करने के लिए ट्यूशन  एवं अन्य फीस/मैनटेनन्स कॉस्ट/बुक्स एवं उपकरण आदि पर होने वाले खर्च को नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन द्वारा वहन किया जाता है।

दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों की शिक्षा/प्रशिक्षण कार्यक्रम की पात्रता क्या है?

कोई भी भारतीय नागरिक जिसे 40 प्रतिशत अथवा उससे अधिक विकलांगता हो। विकलांगता सरकार के मानक के अनुसार होना चाहिए

क्या सहायता मिलती है?

दिव्यांग/विकलांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा/प्रशिक्षण की व्यवस्था सरकार द्वारा नि:शुल्क की जाती है। अगर लाभार्थी उच्च शिक्षा के लिए जाना चाहते हैं तो उन्हें एजुकेशन लोन मुहैया कराया जाता है। एजुकेशन लोन संयुक्त रुप से विकलांग विद्यार्थी और उसके माता-पिता/अभिभावक के नाम पर होता है।

एजुकेशन लोन की तौर पर कितना धन मिलता है?

आवश्यकता आधारित वित्त जो इस तथ्य पर निर्भर करेगा कि माता-पिता/विद्यार्थियों की लोन चुकाने की कितनी क्षमता है। इसके अतिरिक्त एजुकेशन लोन की कैटेगरी निम्न है:

  • भारत में पढ़ाई के लिए – अधिकतम 10 लाख रुपये एजुकेशन लोन के तौर मिलता है। यह रकम कॉलेज की ट्यूशन फीस के लिए होती है। इसके अतिरिक्त अधिकतम 4 लाख रुपये रहन – सहन इत्यादि खर्च के लिए मिलता है।
  • विदेशों में पढ़ाई के लिए – अधिकतम 20 लाख रुपये एजुकेशन लोन के तौर पर मिलता है। यह रकम कॉलेज की ट्यूशन फीस के लिए होती है। इसके अतिरिक्त अधिकतम 10 लाख रुपये रहन – सहन इत्यादि खर्च के लिए मिलता है।

 एजुकेशन लोन पर ब्याज कितना लगता है?

भारत सरकार का प्रयास है कि दिव्यांग यानी विकलांग लोग इतने समर्थ हो जाये कि वह किसी पर बोझ न बनें। इसीलिए सरकार के नियमों के अनुसार नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन के तहत मिलने वाले एजुकेशन लोन पर 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया जाता है। महिला अभ्यार्थी होने पर ब्याज में 0।5% की छूट भी मिलती है।

एजुकेशन लोन को वापस कितने समय में करना होता है?

  • एजुकेशन लोन अभ्यार्थी के बैंक खाते में आने के पश्चात् 07 वर्ष  के भीतर यह लोन चुकाना होगा।
  • लोन की वापसी नियमानुसार पाठ्यक्रम की समाप्ति की निर्धारित तिथि से छ: माह पश्चात् अथवा नौकरी मिलने के पश्चात्, जो भी पहले हो। इसके अनुसार करना होता है।

कौशल एवं उद्यमीय विकास हेतु वित्तीय सहायता    

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन की इस स्कीम का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को प्रशिक्षण मुहैया कराना है जिससे कि वे पारम्परिक एवं तकनीकि व्यवसायों एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उचित तकनीकि प्रशिक्षण के माध्यम से सक्षम एवं स्वावलंबी बन सकें।

वित्तीय सहायता अनुदान के अनुरुप में एस सी ए के माध्यम से उद्यम/बिजनेस/कारोबार शुरु करने का प्रशिक्षण/ट्रेनिग और वित्तीय मदद के रुप में बिजनेस लोन मुहैया कराया जाता है।

कौशल एवं उद्यमीय विकास स्कीम का लाभ किसे मिलता है?

  • जिन लाभभोगियों को एस सी ए के माध्यम से एन एच एफ डी सी से –लोन प्राप्त हुआ है और अपनी आय के सृजन संबंधी क्रियाकलाप को सफलतापूर्वक जारी रखे हुए हैं।
  • जिन लाभभोगियों को लोन स्वीकृत हो चुका है और लोन प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
  • सम्भाव्य लाभभोगी जो एन एच एफ डी सी से लोन प्राप्त करना चाहते हैं और ऋण प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंडो को पूरा करते हैं।

कौशल एवं उद्यमीय विकास स्कीम की पात्रता क्या है?

नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन से कौशल एवं उद्यमीय विकास स्कीम का लाभ लेने के लिए आवेदनकर्ताओं को 12 महीने की ट्रेनिग/प्रशिक्षण पूरा करना होता है।

कौशल एवं उद्यमीय विकास स्कीम के तहत कितना अनुदान मिलता है?

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगने वाली कुल लागत का 100% हिस्सा नेशनल हैन्डीकैप्ड फाइनैंस एंड डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (एन एच एफ डी सी) द्वारा वहन किया जाता है।

स्कालरशिप: प्रशिक्षण में लगने वाली लागत में स्कालरशिप भी शामिल है। प्रशिक्षु को प्रति माह 2000 परिवहन और अन्य प्रासंगिक व्यय की लागत को कवर करने के लिए प्रदान किया जाता है।

वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रकिया

प्रशिक्षण के प्रस्ताव को राज्य माध्यम एजेंसी / बैंक द्वारा राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम को प्रस्तुत करना होता है। ऐसी एजेंसियों प्रशिक्षण प्रायोजक। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय / राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संगठनों को भी सीधे उनके प्रस्ताव को प्रशिक्षण के साथ NHFDC दृष्टिकोण हो सकता है। प्रशिक्षण के प्रस्ताव के अनुसार प्रशिक्षण का प्रस्ताव तैयार करने के लिए इस योजना के तहत दिशा निर्देशों के साथ तैयार रहना है।

ट्रेनिंग संस्थान – प्रशिक्षण संस्थान

एस सी ए उपयुक्त प्रशिक्षण संस्थान की पहचान करेगा जो अधिमानत:औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई0टी0आई0), पॉलीटेकनिक, इंजिनियरिंग कॉलेज, कृषि विश्वविद्यालय, राट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान आदि जैसे सरकारी संस्थान होंगे।

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ऐसे प्रशिक्षण प्रस्ताव भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं जिसमे प्रतिष्ठित निजी प्रशिक्षण संस्थान शामिल  हों। ऐसे मामलों में संस्थान का प्रोफाइल, उसका पिछला रिकॉर्ड विशेषकर  समाज के विकलांग वर्ग के लिए आयोजित किये गये प्रशिक्षण आदि प्रस्तुत किये जाने आवश्यक हैं।

अन्ध तथा मूक एवं बघिरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित कराने के लिए संस्थान की सुविधाओं की जांच की जानी चाहिए और उसका ब्यौरा प्रशिक्षण प्रस्ताव में दिया जाना चाहिए।

माइक्रो क्रेडिट योजना क्या है?

लघु वित्तीय सहायता योजना यानी माइक्रो क्रेडिट योजना वर्तमान में गैर सरकारी संगठन द्वारा कार्यान्वित सामाजिक क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे विकलांग व्यक्तियों के लिए है और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास के लिए कार्यक्रम शुरू करने के लिए पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। इस योजना के तहत आवेदन को राज्य माध्यम एजेंसी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इस योजना के तहत गैर सरकारी संगठन लाख 5 लाख रुपया प्राप्त कर सकते हैं।

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