बढ़ती टेक्नोलॉजी के इस दौर में लोगों का जीवन आसान भी हुआ है और इसके साथ ही कई तरह की चुनौतियां भी आई हैं। टेक्नोलॉजी में कारण लोग एक – दुसरे के करीब भी हुए हैं और लोगों में दूरियां भी बढ़ी हैं।

टेक्नोलॉजी का ही कमाल है कि लोग अब चंद मिनट में अपने किसी संबंधित को पैसा भेज सकते हैं। लेकिन, टेक्नोलॉजी के जरिये ही कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति का अकाउंट चंद मिनट में खाली कर सकता है।

इसे हम इस तरह भी कह सकते हैं कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में मौके के साथ – साथ कई तरह की चुनौतियां भी सामने आई हैं। पहले अगर किसी व्यक्ति को अपने किसी परीचित को पैसा भेजना होता था तो वह बैंक की लंबी लाइन में लगता था।

पैसा जमा करता था, फिर पैसा जमा होने के 2 दिन बाद संबंधित व्यक्ति के बैंक खाता में पैसा पहुंच पाता था। ठीक स्थिति पैसा निकालने के लिए भी थी। लोग पैसा निकालने के लिए बैंकों की लंबी – लंबी लाइनों में लगते थे, तब जाकर पैसा निकल पाता था।

जब कोई कारोबारी कोई बिजनेस डील करने के लिए किसी दूसरे शहर जाता था तब वह पैसों की थैला लेकर जाते थे, ऐसे में पैसों के साथ ही खुद की भी सुरक्षा की चिंता हरवक्त रहती थी। लेकिन, एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग आने की वजह से अब कैश में पैसा लेकर चलने का खतरा खत्म हो गया है।

अब कारोबारी पैसा बैंक में जमा कर लेते हैं और एटीएम लेकर जहां जाना होता था चले जाते हैं और जिसको पेमेंट देना होता है उसको एटीएम से पैसा निकालकर या इंटरनेट बैंकिंग से पैसा ट्रांसफर कर देते हैं।

इसी बीच यूपीआई (UPI) यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस आया। यूपीआई आने के बाद तो पेमेंट क्षेत्र में क्रांति आ गई। यूपीआई के द्वारा पैसा मोबाइल के जरिये भेजना और प्राप्त करना बेहद असान हो गया है।

दरअसल यूपीआई एक पेमेंट गेटवे है। जिसके माध्यम से पैसा ट्रांसफर होता है। पैसा ट्रांसफर करने के लिए बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से यूपीआई कोड जेनरेट करना होता है। यूपीआई कोड जेनरेट करने के बाद एक पेमेंट कोड बनाना होता है। बस इसी पेमेंट कोड के जरिये से पैसा ट्रांसफर होता रहता है।

पेटीएम, गूगल पे, फोन पे इत्यादि जैसे  मोबाइल एप्लीकेशन हैं जो यूपीआई से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही सभी बैंकों के मोबाइल ऐप भी यूपीआई से जुड़े होते हैं। यूपीआई आ जाने से पैसा भेजना और मंगाना बेहद असान हो गया है।

लेकिन, पैसा भेजने और मंगाने के अलावा यूपीआई से फ्राड होने की भी संभवना बहुत अधिक होती है। जरा सी लापरवाही किसी का भी बैंक अकाउंट खाली करवा सकती है।

ऐसी स्थिति में कुछ बातों का ख्याल रखकर यूपीआई पेमेंट से फ्राड होने से बचा जा सकता है।यूपीआई फ्राड से बचने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वह कैन – कौन से तरीके हैं जिससे यूपीआई में फ्राड किया जा सकता है।

इस तरह होता है यूपीआई में फ्रॉड

कई बार ऐसा होता है कि किसी को एक फोन कॉल जाता है और फोन पर बोलने वाला व्यक्ति खुद को बैंक का कर्मचारी बताते हुए व्यक्ति से उसका एटीएम कार्ड नंबर और एटीएम पिन यह कहते हुए मांगते हैं कि ग्राहक का एटीएम बंद हो गया है।

जबकि सभी बैंकों यह साफ़ तौर पर एडवाइजरी जारी कर रखा है कि उनके तरफ से कभी भी ग्राहक का एटीएम पिन नहीं मांगा जाता है। यह तो फ्राड करने के एक तरीका है। ऐसे ही अनेक तरीके और भी हैं।

बचाव का तरीका: यूपीआई का पासवर्ड किसी को भी नहीं बताना चाहिए।

ग्राहक से ओटीपी मांगना

यूपीआई पेमेंट में ग्राहक के मोबाइल नंबर पर आने वाला ओटीपी सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर ओटीपी एंटर कर दिया जाता है तो पेमेंट हो जाती है। ओटीपी को वन टाइम पासवर्ड के नाम से भी जाना जाता है।

धोखेबाज जब किसी तरह ग्राहक का एटीएम नंबर पता कर लेते हैं तब वह उससे कैश ट्रांसफर करने की कोशिश करता है। जब किसी के बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करने की कोशिश की जाती है तो ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक वन टाइम पासवर्ड ओटीपी आता है, उसी ओटीपी को एंटर करते ही कैसा कट जाता है।

बचाव का तरीका: आपको जानकारी के लिए बता दें कि ओटीपी एंटर करते ही पैसा कट जाता है ऐसे में किसी को भी ओटीपी नहीं बताना चाहिए।

AnyDesk का इस्तेमाल करके

टेक्नोलॉजी का फायदा होने के साथ – साथ कुछ नुकसान है। AnyDesk एक एप्लीकेशन है। इस एप्लीकेशन का उपयोग किसी दूसरे के फोन / लैपटॉप को रिमोट पर लेकर खुद से इस्तेमाल करने के लिए किया जाता है। ऐसे में धोखाधड़ी करने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

बचाव का तरीका: इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए जरूरी है कि AnyDesk जैसा कोई एप्लीकेशन डाउनलोड न किया जाये। अगर बहुत जरूरी है तो ही डाउनलोड किया जाये। हां इस बात का ध्यान जरुर रखना चाहिए कि रैंडम किसी के मांगने पर AnyDesk का एक्सेस दे दिया जाये।

किसी भी तरह की धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं?

  • अपने अलावा कभी भी किसी को भी अपने एटीएम नंबर, एटीएम कार्ड की एक्सपायरी डेट, रजिस्ट्रेशन नंबर, ओटीपी जैसी जरूरी डीटेल्स नहीं देना चाहिए
  • कभी भी कोई भी बैंक ग्राहक से एटीएम नंबर, एटीएम कार्ड की एक्सपायरी डेट, रजिस्ट्रेशन नंबर, ओटीपी इत्यादि जैसी डिटेल्स नहीं पूछता है।
  • अगर कोई बैंकिंग से संबंधित मैसेज आता है तो सबसे पहले यह जांचे कि मैसेज कहां से आया है। अगर बैंक से मैसेज न आया हो तो उस मैसेज में दी गई लिंक पर क्लिक न करें।
  • अगर आप यूपीआई उपयोग करते हैं तो आपको अपना MPIN किसी को भी नहीं बताना चाहिए।
  • आपको जानकारी के लिए बता दें कि धोखाधड़ी करने वाले लोग IRDAI और EPFO के नाम से भी SMS भेज सकते है। लेकिन, आपको यह जानकारी होना चाहिए कि IRDAI और EPFO के तरह से ऐसा कोई भी मैसेज नहीं भेजा जाता है।
  • कभी भी, किसी का भी फोन आये आपको अपना बैंक से संबंधित कोई भी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
  • बैंक से जुडी सभी जानकारी हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए।