किसी व्यक्ति को कहीं जाना हो या कहीं से आना हो तो वह टैक्सी बुक करता है। अगर व्यक्ति टैक्सी नहीं बुक कर सकता है तो वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यूज करता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट मतलब जो बसें या गाडियां सवारी लाती और ले जाती हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कम किराया लगता है।

अगर किसी कारोबारी को अपने बिजनेस के लिए कोई माल मंगाना होता है तो वह ट्रक या टैम्पू बुक करता है। इसी तरह कम्पनियां या फक्ट्रियों से माल सप्लाई करने के लिए ट्रक या टैम्पू बुक होते हैं। बदले में इन ट्रक या टैम्पू मालिकों को किराया मिलता है।

ऊपर दिए गये सभी उदाहरण ट्रांसपोर्ट बिजनेस का उदाहरण है। ट्रांसपोर्ट बिजनेस के बारे में कहा जाता है कि यह सर्विस सेक्टर का ट्रांसपोर्ट बिजनेस सदाबहार बिजनेस है। इसके पीछे बहुत ही जेनविन कारण है।

जब तक यह धरती है और इस धरती पर लोग हैं, तब तक लोग इधर से उधर जाते रहेंगे और माल की सप्लाई होती रहेगी। इसलिए ट्रांसपोर्ट बिजनेस को सदाबहार बिजनेस की संज्ञा दी जाती है।

ट्रांसपोर्ट कारोबार के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि ट्रांसपोर्ट बिजनेस में कुछ समय के लिए मंदी जरुर आ सकती है लेकिन ट्रांसपोर्ट का बिजनेस कभी भी बंद नहीं हो सकता है। यह पूर्ण रुप से सत्य भी है।

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इस तरह हम देखते हैं कि ट्रांसपोर्ट बिजनेस एक मुनाफा वाला बिजनेस है। जो लोग बिजनेस कर रहे हैं या बिजनेस शुरु करने का विचार बना रहे हैं, उनके लिए ट्रांसपोर्ट का बिजनेस बहुत लकी साबित हो सकता है। इसलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएँगे कि ट्रांसपोर्ट बिजनेस की शुरुवात कैसे होती है? आइये समझते हैं कि ट्रांसपोर्ट का बिजनसे कैसे शुरु कर सकते हैं।

ट्रांसपोर्ट बिजनेस मुख्य रुप से दो प्रकार का होता है

जैसा कि आर्टिकल के शुरुवात में ही मैंने दो उदाहण दिया है। एक आने – जाने का और एक सामान लाने और सामान सप्लाई करने का। यही से पता चलता है कि ट्रांसपोर्ट का बिजनेस मुख्य रुप से दो तरह का होता है। हां यह अलग बात है कि ट्रांसपोर्ट के इन दो प्रकारों में डिफरेंट टाईप के वाहन उपयोग होते हैं। जिनके बारे में हम बाद में चर्चा करेंगे। आइये जानते है कि ट्रांसपोर्ट बिजनेस का मुख्य रुप क्या है?

ट्रांसपोर्ट बिजनेस का दो प्रकार

  1. सवारी ट्रांसपोर्ट
  2. माल ढुलाई ट्रांसपोर्ट

सवारी ट्रांसपोर्ट क्या होता है?

हम उन सभी गाड़ियों को सवारी गाड़ी के नाम से जानते हैं जिनका उपयोग कोई भी व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने या जाने के लिए करता है। हां बदले में गाड़ी मालिक या ड्राइवर को किराया भी देना होता है।

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सवारी ट्रासपोर्ट में भी कई प्रकार का बिजनेस है

वर्तमान में आपने देखा होगा कि तमाम ऐसे कारें सड़कों पर घुमती रहती हैं, जिनपर ओला, ऊबर या मेरु का स्टीकर लगा रहता है। इसी के साथ ऑटों बसें या जीप भी सड़कों पर घुमती रहती हैं। यह सभी सवारी ट्रांसपोर्ट बिजनेस में आती हैं। आइये इसके बारे में विस्तार से समझते हैं।

पब्लिक सवारी बिजनेस

वैसे तो वह सभी गाड़ीयां पब्लिक सवारी के तहत आती हैं जिनपर लोग किराया देकर यात्रा करते हैं। लेकिन वर्तमान समय में पब्लिक सवारी गाड़ी की अवधारणा बदल गई है। अब केवल उन्हीं को सवारी गाड़ी कहा जाता है जिन गाड़ीयों को एक निश्चित मार्ग पर चलाया जाता है।

इस तरह तरह की गाड़ीयों में बसें, ऑटो और जीप आते आते हैं। ये सभी गाड़ीयां एक निश्चित जगह पर खड़ी रहती हैं, वहां पर यात्री आते हैं और इन गाड़ीयों में बैठते हैं। कंडक्टर किराया लेता है और उन यात्रियों को उनके द्वारा बताई गई जगह पर उतार देता है।

सवारी गाड़ी: गाड़ी बुकिंग

कोई व्यक्ति किसी कार, ऑटो या टैक्सी को एक निश्चित जगह जाने के लिए बुक करता है और बदले में गाड़ी मालिक या ड्राइवर को उचित किराया देता है और अकेले या अपने परिवार के साथ यात्रा करता है तो उस गाड़ी को ट्रांसपोर्ट की भाषा में गाड़ी बुकिंग करना कहते हैं। मतलब यात्री ने वह गाड़ी बुक किया है। अब वह गाड़ी उस व्यक्ति के कहे अनुसार चलेगी।

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