TIN नंबर और PIN नंबर को लेकर लोगों के मन में अक्सर संदेह रहता है। ज्यादातर लोग अपने ATM PIN को ही अपना TIN नंबर समझ लेते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि TIN नंबर एक यूनिक रजिस्‍ट्रेशन नंबर है, जिसका उपयोग पूरे देश में टैक्‍स से सबंधित जानकारी प्राप्‍त करने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही VAT कानून के तहत किसी डीलर की पहचान के लिए भी TIN का ही उपयोग किया जाता है।

TIN नंबर

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TIN नंबर क्‍या है-

राज्‍य सरकार द्वारा वस्‍तुओं के क्रय-विक्रय पर VAT या सेल्‍स टैक्‍स लगाया जाता है। जिसके लिए टिन नंबर की आवश्‍यकता होती है। TIN का फुलफॉर्म (Tax Information Network) होता है। देश के ज्‍यादातर राज्‍यों में 5 से 10 लाख तक की सालाना इनकम करने वाले व्‍यापारियों पर VAT नहीं लगाया जाता है। लेकिन अक्सर TIN तभी जरूरी होता है, जब सेल की छूट सीमा ज्‍यादा हो। इसके अलावा यह उस राज्‍य पर भी निर्भर करता है कि वहां पर अधिकतम कितनी सालाना आय के बाद VAT लगाया जाता है। कभी-कभी बिजनेस के दौरान माल खरीदने पर आपको विक्रेता को भी TIN नंबर देना होता है।

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TIN नंबर

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TIN नंबर के लिए कैसे करें आवेदन-

डिजिटलाइजेशन होने के बाद से TIN नंबर के लिए ज्‍यादातर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। आवेदन के लिए आप राज्‍य सरकार के कमर्शियल टैक्‍स विभाग या सेल्‍स टैक्‍स विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपने व्‍यापार से संबंधित जानकारी भरकर आवेदन कर सकते हैं। साधारण तौर पर TIN नंबर के रजिस्‍ट्रेशन के लिए कोई चार्जेज नहीं लगते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से फ्री होती है। लेकिन महाराष्‍ट्र जैसे कुछ राज्यों में सेल्‍स टैक्‍स रजिस्‍ट्रेशन के समय सरकार को कुछ सिक्‍योरिटी डिपॉजिट देने का नियम है।

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TIN नंबर के लिए जरूरी दस्तावेज-

TIN नंबर प्राप्‍त करने के लिए आप जरूरी डॉक्यूमेंट्स को ऑनलाइन सबमित कर सकते हैं। टिन नंबर प्राप्‍त करने के लिए ये डॉक्यूमेंट जरुरी हैं:

  • पहचान पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • रिफ्रेंस ऑफ सेक्‍योरिटी
  • निवास प्रमाण पत्र
  • बिजनेस प्रूफ ID
  • PAN कार्ड

TIN नंबर

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GST के बाद TIN का क्या हुआ-

GST लागू हो जाने के बाद से VAT, सर्विस टैक्‍स जैसे अप्रत्‍यक्ष कर में केवल GST ही लगेगा। इसलिए GST लागू हो जाने के बाद से TIN की जगह केवल GST नंबर या रजिस्‍ट्रेशन की ही जरुरत पड़ेगी।

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