यह एक फैक्ट है की देश में केवल 3 प्रतिशत लोग ही टैक्स भरते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है की देश की पूरी जनसँख्या में से केवल 3 प्रतिशत लोग ही टैक्स भरने के लेयर में आते हैं।

टैक्स की लेयर में आने वाले लोग टैक्स बचाने का तरीका अपनाकर टैक्स बचा लेते हैं। ऐसे यह जानना बेहद जरूरी है की टैक्स बचाने के कौन – कौन सा तरीका उपलब्ध है।

सरकार द्वारा जब कोई नियम बनाया जाता है तब उसमे कुछ भी प्रावधान किया जाता है जिसका लोग लाभ उठाते हैं। इनकम टैक्स में भी कुछ ऐसा ही है। आयकर से ही देश में जनसुविधाएं प्रदान की जाती है लेकिन आयकर के कुछ नियमों का पालन करके व्यक्ति आयकर देने से बच सकता है।

टैक्स बचाने के कुछ पारंपरिक तरीके हैं। पारंपरिक टैक्‍स सेविंग इंस्‍ट्रूमेंट के तौर इंश्‍योरेंस प्लान का स्कोर ठीक नहीं होता है। इनसे मिलने वाला रिटर्न अपेक्षाकृत कम होता है।

अगर कोई व्यक्ति अपनी इनकम पर टैक्स बचाना चाहते हैं तो उन्हें साल के शुरुवात में ही इन्वेस्ट कर देना चाहिए। साल के अंतिम में इन्वेस्ट करना टैक्स बचाने में सहायक होगा या नहीं होगा, यह सुरक्षित नहीं होता है।

ऐसा भी नहीं होना चाहिए की टैक्स का पैसा बचाने के लिए खुद का पैसा कहीं भी इन्वेस्ट कर दें। गलत इन्वेस्ट करने पर पैसा फंसने का डर बना रहता है। पैसा इन्वेस्ट करते वक्त हमेशा रिटर्न के रुप में मिलने वाली रकम को प्राथमिकता देना चाहिए।

वित्त वर्ष 2019 समाप्त होने जा रहा है। वित्त वर्ष 2020 शुरु होगा। ऐसे में वित्त वर्ष 2019 जैसा भी बीत गया, बीत गया लेकिन टैक्स स्लैब में आने वाले लोग वित्त वर्ष 2020 के लिए टैक्स बचाने के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं और अगले वित्त वर्ष में बेहतरीन तरीके से टैक्स बचा सकते हैं।

आपको इस बात की जानकारी होना चाहिए की इनकम टैक्स बचाने के लिए सिर्फ इन्वेस्ट करना ही अंतिम विकल्प नहीं होता है। बल्कि, आयकर के नियमों के विभन्न सेक्शन के तहत भी टैक्स बचाया जा सकता है।

हालाँकि, आयकर नियमों के अनुसार कुछ सीमित मात्रा में ही टैक्स बचाया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति की इनकम आयकर विभाग के नियमों के अनुसार बचाने के बाद भी टैक्स के दायरे में आ रही है उन्हें इन्वेस्ट के अन्य विकल्पों के बारें में विचार करना चाहिए।

आयकर नियम के सेक्शन 80C, सेक्शन 80D और सेक्शन 24 के अनुसार किये गये खर्च या इन्वेस्ट से भी आयकर बचाने में मदद मिलती है। इनकम टैक्स बचाने के लिहाज से सेक्शन 80C बहुत महत्वपूर्ण है। 80C के तहत कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख 50 हजार तक का इन्वेस्ट पर आयकर छूट प्राप्त कर सकता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि आयकर नियम के सेक्शन 80C के तहत टैक्स सेविंग बैंक डिपाजिट, जीवन बिना पॉलिसी का प्रीमियम, एम्प्लॉई  प्राफिडेंट फंड (EPF), PPF, NSC, ELSS, SCSS जैसे इन्वेस्ट वाले विकल्प आते हैं।

जो व्यक्ति आयकर नियम के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ उठाना चाहते हैं उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख 50 हजार तक के इन्वेस्ट पर आयकर छूट मिलती है। इसलिए यहां पर इस बात का ध्यान देना जरूरी हो जाता है कि व्यक्ति के द्वारा इससे पहले कितना पैसा इन्वेस्ट किया गया है।

आयकर बचाने के लिए कुछ ऐसे इन्वेस्ट हैं जो हमेशा बेहतरीन साबित होते हैं। आइये जानते हैं कि इनकम टिक्स बचाने के लिए बेहतरीन इन्वेस्ट क्या होता है।

इन तरीकों से टैक्स बचाया जा सकता है:

  • एम्प्लॉई प्राफिडेंट फंड (EPF) में इन्वेस्ट करके
  • जीवन बीमा पॉलिसी लेकर
  • होमलोन लेकर
  • बच्चे की ट्यूशन फीस दिखाकर
  • हेल्थ पॉलिसी लेकर

एम्प्लॉई प्राफिडेंट फंड (EPF) में इन्वेस्ट आवश्यक है

यह विकल्प उनके लिए सबसे बेहतरीन साबित होता है जो लोग कहीं नौकरी का रहे होते हैं। नौकरी करने वाले लोगों की बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत एम्प्लॉई प्राफिडेंट फंड (EPF) में इन्वेस्ट किया जाता है। यह इन्वेस्ट

EPF में इन्वेस्ट पर आयकर अधिनियम के 80C के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है। चूंकि EPF में 12 प्रतिशत कर्मचारी की सैलरी का पैसा कटता है और 12 प्रतिशत कर्मचारी की नियोक्ता द्वारा भी जमा किया जाता है।

इस स्थिति में कई बार सेक्शन 80C का लाभ नहीं मिल पाता है। 80C के तहत आयकर छूट का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को अपनी सैलरी स्लिप देखना पड़ेगा की वह 80C के तहत कर छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं।

जीवन बीमा पॉलिसी से बच सकता है टैक्स

अगर किसी व्यक्ति ने जीवन बीमा पॉलिसी लिया है तो वह आयकर अधिनियम के सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स छूट प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है।

अगर संभव हो तो हर किसी को जीवन बीमा पॉलिसी लेना चाहिए। बीमा पॉलिसी लेने से परिवार के लोगों का भविष्य सुरक्षित हो जाता है और टैक्स में छूट भी मिल जाती है।

होमलोन पर भी टैक्स में छूट मिलती है

अगर किसी व्यक्ति ने होमलोन लिया है और होमलोन चुकाने के लिए EMI जमा कर रहा है तो उन्हें आयकर अधिनियम सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

होमलोन की EMI में ब्याज की हिस्सेदारी अधिक होती है और मूलधन की कम। होम लोन की मासिक किस्त के रूप में आप बैंक को जितनी रकम देते हैं, उस पर भी आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचा सकते हैं।

होमलोन लेने वाले व्यक्ति इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 24 के तहत आयकर में छूट का लाभ उठा सकते हैं। इनकम टैक्स के मौजूदा नियमों के मुताबिक घर खरीदने के लिए लेने वाले लोन के ब्याज पर सालाना दो लाख रुपये की रकम पर आयकर में राहत पा सकते हैं।

बच्चे की ट्यूशन फीस से टैक्स में छूट मिलती है

कोई भी व्यक्ति अपने दो बच्चों की सालाना स्कूल/कॉलेज की ट्यूशन फीस पर आयकर अधिनियम के सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स में छूट प्राप्त कर सकता है।

हेल्थ पॉलिसी लेने से भी टैक्स में छूट मिलती है

हेल्थ बीमा कराना स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति दोनों के लिए फायदेमंद होता है। खुद और परिजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा जरूर लेना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति हेल्थ पॉलिसी लेता है तो हेल्थ पॉलिसी के लिए चुकाए जाने वाले प्रीमियम पर उन्हें इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80D के तहत आयकर में छूट मिलेगी।