अक्सर हम सुनते हैं कि सरकार ने इस क्षेत्र को इतना सब्सिडी प्रदान किया है। या उद्योग घराना को सब्सिडी प्रदान किया गया है। सब्सिडी अपने आप में एक बहुत बड़ा टर्म है। इसे समझने के लिए सर्वप्रथम सब्सिडी की परिभाषा और व्याख्या समझते हैं।

सब्सिडी की परिभाषा: सब्सिडी सरकार से एक इकाई के लिए धन का हस्तांतरण है। इससे सब्सिडी वाले उत्पाद की कीमत में गिरावट आती है।

व्याख्या: सब्सिडी का उद्देश्य समाज के कल्याण को बढ़ावा देना है। यह सरकार के गैर-योजनागत व्यय का एक हिस्सा है। भारत में प्रमुख सब्सिडी पेट्रोलियम सब्सिडी, उर्वरक सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, आदि हैं।

सब्सिडी क्या है? जानिए

सब्सिडी अंग्रेजी भाषा का शब्द है। हिंदी में सब्सिडी को सहायिकी या राजसहायता भी कहा जाता है। यह राजसहायता किसी आर्थिक या समाजिक निति को बढ़ाने के लिए वित्तिय सहायता के रुप में होता है। आगे के क्रम में हम सब्सिडी को सब्सिडी के रुप में ही कहेंगे।

सब्सिडी आमतौर से सरकार द्वारा व्यक्तियों, कम्पनियों या संस्थाओं को दी जाती है। सब्सिडी के कई रूप हो सकते हैं, जैसे कि सीधे पैसे देना, टैक्स छूट देना, बिना ब्याज़ के लोन देना, इत्यादि।

इसे भी जानिए- Mudra Loan Yojana में बिना गारंटी मिलेगा बिज़नेस लोन! जानिए क्या है प्रक्रिया

उपभोक्ताओं को सहायिकी किसी प्रोडक्ट या सर्विस की कीमत घटाने के लिए दी जाती है, मसलन भारत की राशन व्यवस्था में अनाज व अन्य आवश्यक खाद्य-सामग्री कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती है। इसका उदाहरण सरकारी राशन – गल्ले की दुकाने हैं। जहां पर पात्र लोगों को नाममात्र कीमत पर गेंहू और चावल मिलता है।

इसे इस तरह से भी समझ सकते हैं कि सरकार द्वारा किसी जरुरी चीज का मूल्य इतना कम कर दिया जाता है कि, उस वस्तु की पहुंच जन – सामान्य तक आसानी के साथ हो जाता है। हालांकि, उस वस्तु की पूरी कीमत सरकार चुकाती है।

सब्सिडी के लिए सरकार के पास पैसा कहां से आता है?

सरकार द्वारा जो कुछ भी किया जाता है, वह जनता के द्वारा भरे गए टैक्स के पैसो से होता है। सब्सिडी प्रदान करने का खर्चा अंततः दो ही सोर्स से मिलता है।

  1. टैक्स से
  2. मुद्रा छापकर

सब्सिडी का खर्च पूरा करने के लिए साधारण करदाता पर टैक्स बढ़ाकर लिया जाता है या फिर सरकार द्वारा मुद्रा छापकर पूरा करा जाता है। जिस से महंगाई बढ़ती है। यानि सब्सिडी का पूरा खर्च समाज उठाता है। कुछ क्षेत्रों में सीमित सब्सिडी देने से समाजिक कल्याण, कमज़ोर वर्गों की रक्षा और अर्थव्यवस्था में व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।

सब्सिडी का महत्व क्या है?

सब्सिडी आम तौर पर देश की अर्थव्यवस्था के विशेष क्षेत्रों का समर्थन करती है। यह उन पर लगाए गए बोझ को कम करके, या प्रयासों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके नए विकास को प्रोत्साहित करके संघर्षरत उद्योगों की सहायता कर सकता है। अक्सर, इन क्षेत्रों को सामान्य अर्थव्यवस्था की कार्रवाइयों के माध्यम से प्रभावी ढंग से समर्थन नहीं किया जा रहा है, या प्रतिद्वंद्वी अर्थव्यवस्थाओं में गतिविधियों से कम आंका जा सकता है।

दो प्रकार की सब्सिडी

जिस प्रकार टैक्स दो प्रकार का होता है, उसी प्रकार सब्सिडी भी दो प्रकार की होती है।

  1. प्रत्यक्ष सब्सिडी
  2. अप्रत्यक्ष सब्सिडी

प्रत्यक्ष सब्सिडी वे हैं जो किसी विशेष व्यक्ति, समूह या उद्योग की ओर धन का वास्तविक भुगतान शामिल करते हैं।

अप्रत्यक्ष सब्सिडी वे हैं जो एक पूर्व निर्धारित मौद्रिक मूल्य नहीं रखते हैं या वास्तविक नकद परिव्यय शामिल करते हैं। वे आवश्यक वस्तुओं या सेवाओं के लिए मूल्य में कमी जैसी गतिविधियों को शामिल कर सकते हैं जो सरकार द्वारा समर्थित हो सकते हैं। यह आवश्यक वस्तुओं को वर्तमान बाजार दर से नीचे खरीदने की अनुमति देता है, जिसके परिणामस्वरूप सब्सिडी के लिए बचत को मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारत में कितनी तरह की सब्सिडी मिलता है?

सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के कई रूप हैं। दो सबसे सामान्य प्रकार की व्यक्तिगत सब्सिडी कल्याणकारी भुगतान और बेरोजगारी लाभ हैं। इस प्रकार की सब्सिडी का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो अस्थायी रूप से आर्थिक रूप से पीड़ित हैं। अन्य सब्सिडी, जैसे कि छात्र ऋण पर रियायती ब्याज दर, लोगों को अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दी जाती है।

इसे भी जानिए- जिला उद्योग केंद्र लोन स्कीम क्या है और रजिस्ट्रेशन कैसे होता है?

सस्ती देखभाल अधिनियम के लागू होने के साथ, कई अमेरिकी परिवार घरेलू आय और आकार के आधार पर स्वास्थ्य देखभाल सब्सिडी के लिए पात्र बन गए। ये सब्सिडी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए आउट-ऑफ-पॉकेट लागत को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इन उदाहरणों में, सब्सिडी से जुड़े धन सीधे बीमा कंपनी को भेजे जाते हैं, जिसमें प्रीमियम देय होता है, जो कि घर से आवश्यक भुगतान राशि को कम करता है।

व्यवसायों को सब्सिडी एक उद्योग का समर्थन करने के लिए दी जाती है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के खिलाफ संघर्ष कर रही है, जिसने कीमतें कम की हैं, जैसे कि सब्सिडी के बिना घरेलू व्यवसाय लाभदायक नहीं है। सब्सिडी प्रमुख रुप से 5 क्षेत्रों को प्रदान की जाती है-

  1. उर्वरक सब्सिडी  
  2. खाद्य सब्सिडी    
  3. पैट्रोलियम सब्सिडी        
  4. ब्‍याज सब्सिडी   
  5. अन्‍य सब्सिडी

सब्सिडी का फायदा

भारत की अर्थव्यवस्था, मिश्रित अर्थव्यवस्था है। यहां पर सभी के योदगान को समान महत्व दिया जाता है। कुछ उद्योगों को घरेलू लाभ कमाने के लिए बाहरी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। जिसके लिए उसे सरकार से सहयोग का दरकार होता है। नहीं तो, कोई विदेशी कंपनी सभी लाभ अपने देश में लेकर चली जाएगी। यहां पर सब्सिडी के जरिए वह उद्योग बच जाएगा, जिससे भारत के लोगों को लाभ प्राप्त होगा।

इसे भी जानिए- बिजनेस लोन की सहायता से बढ़ाएं अपने पैथोलॉजी लैब के बिजनेस को

सब्सिडी का बेहतर उदाहरण एमएसएमई भी है। सरकार अभी देश के एमएसएमई को मजबूत करने के लिए तमाम उपाय कर रही है। उसमें से बिजनेस लोन सब्सिडी, क्रेडिट गारंटी योजना और  मुद्रा बिजनेस लोन योजना शामिला है। इससे लॉकडाउन से प्रभावित एमएसएमई को उबरने मदद मिल रहा है। इस तरह से हम कह सकते हैं कि सब्सिडी सामाजिक रूप से इष्टतम स्तर की वस्तुओं और सेवाओं को प्रदान करने के लिए उचित है।