SME (छोटा एवं मध्यम श्रेणी का बिजनेस) को बैंक और एनबीएफसी बिजनेस लोन मिलता है। जबकि एक स्टार्टअप को इन्वेस्टर्स के माध्यम से फंड प्राप्त होता है। स्टार्टअप और SME में यह एक बुनियादी अंतर हैं। यह अंतर क्यों है? स्टार्टअप क्या होता है? SME क्या होता है? आइये समझते हैं।

स्टार्टअप क्या होता है?  What is a start-up?

पुरे विश्व सहित भारत में स्टार्टअप एक नई अवधारणा (कांसेप्ट) है। यह परमपरागत बिजनेस से जरा अलग होता है और कुछ हद तक मेल भी खाता है। जी हां, इसमें दोनों क्वालिटी होती है। ‘स्टार्ट-अप’ की अवधारणा इनोवेशन (innovation) यानी नवीनता, नवपरिवर्तन, नयापन, नवोत्थान, नवीनीकरण के बुनियाद पर आधारित है। स्टार्टअप का लक्ष्य मार्केट में अपने प्रोडक्ट की स्थापना करना लंबे समय तक बाजार में जगह बनाएं रखना होता है।

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इसे आसान और सहज भाषा में समझिये कि जब किसी नये आइडिया पर बिजनेस शुरु किया जाता है तो वह स्टार्टअप कहलाता है। नया आइडिया से तात्पर्य यह है कि ‘बिजनेस करने का आइडिया यूनिक हो जिससे उपभोक्ता बेहतरीन अनुभव प्राप्त होता हो। साथ ही एक स्टार्टअप से यह उम्मीद की जाती है कि बिजनेस का आइडिया किसी का कॉपी किया हुआ नहीं होना चाहिए।

SME क्या होता है?

एसएमई या फुल फॉर्म स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) है। SME में परम्परागत तरीके से चलने वाले सर्विस सेक्टर (सेवा क्षेत्र) और मैनुफैक्चरिंग सेक्टर ​(विनिनिर्माण क्षेत्र का) का बिजनेस आता है। SME क्षेत्र का बिजनेस मुख्यतः लाभ कमाने के उद्धेश्य से शुरु किया जाता है। स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) शुरु होने के पहले दिन से मुनाफा प्रदान करने वाला हो सकता है।

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SME बिजनेस के पीछे किसी तरह का कोई इनोवेशन अप्रोच नहीं होता है बल्कि मार्केट की जरूरत और ग्राहकों की संख्या के आधार पर यह बिजनेस शुरु कर दिया जाता है। स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) को आम बोल चाल की भाषा में छोटा बिजनेस, मध्यम श्रेणी का बिजनेस इत्यादि कहा जाता है।

स्टार्टअप और SME में अंतर क्या है?

जैसा कि इस आर्टिकल के शुरुवात में ही बताया गया है कि ‘स्टार्टअप’ बिजनेस का एक नया टर्म है, जो कि इनोवेशन (नवाचार) पर आधारित है। जिसका लक्ष्य लोगों की जरूरतों की नये तरीके से पूरा करना। उदाहारण के तौर पर आपको बता दें कि फिनटेक सेक्टर का सफल स्टार्टअप ZipLoan है। ZipLoan द्वारा MSME और SME कारोबारियों को 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है।

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SME परम्परागत तरीके से चलाए जाने वाला बिजनेस ही, जिसका मकसद है विशुद्ध रुप से मुनाफा कमाना। SME बिजनेस आपके गली में किराना दुकान चलाने वाला बिजनेसमैन हो सकता है और स्टील को पिघलाकर स्टील का बर्तन बनाने का उधमी भी हो सकता है। इसी के साथ स्टार्टअप और SME में बहुत सरे अंतर अंतर हैं। आइये समझते हैं।

स्टार्टअप और SME की परिभाषा में अंतर

भारत सरकार द्वारा भारत में चलाने वाले सभी कारोबार के लिए एक निश्चित परिभाषा बनाई गई है। बनाई गई परिभाषा के आधार पर ही कारोबारों पर टैक्स लगाया जाता है और सरकारी योजना का निर्माण किया जाता है। भारत सरकार के अनुसार स्टार्टअप और SME के लिए जो परिभाषा निर्धारित की गई है, वह निम्न है:

स्टार्टअप की परिभाषा

स्टार्टअप बिजनेस की एक इकाई है, किसी कंपनी को उसके रजिस्ट्रेशन से 10 साल तक स्टार्टअप माना जायेगा। कोई भी प्रौद्योगिकी टेक्नोलॉजी) या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार (इनोवेशन), विकास (डेवलपमेंट), प्रविस्तारण (प्रोसेसिंग) या व्यवसायीकरण (कारोबार) की दिशा में काम करने वाली तब तक स्टार्टअप है तब तक उस कंपनी के किसी फाइनेंशियल ईयर का टर्नओवर 100 करोड़ से अधिक नहीं हो जाता है’।

स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) की परिभाषा

SME के तहत 2 बिजनेस आते हैं। स्माल एंटरप्राइज (लघु उद्योग) और मीडियम एंटरप्राइज (मध्यम उद्योग)। लॉकडाउन के समय MSME की परिभाषा में बदलाव किया गया था। SME के तहत आने वाले एंटरप्राइज की परिभाषा निम्न है:

स्माल इंटरप्राइज की परिभाषा: जिस उद्योग में 10 करोड़ रुपये तक का इन्वेस्टमेंट हो और 50 करोड़ रुपये तक का सालाना टर्नओवर होता है, उन्हें स्मॉल यूनिट एंटरप्राइज (लघु उद्योग) माना जाता है। यह परिभाषा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर के लिए मान्य है।

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मीडियम एंटरप्राइज (मध्यम उद्योग) की परिभाषा: जिस उद्योग में 30 करोड़ रुपये तक का इन्वेस्टमेंट हो और 100 करोड़ रुपये तक का सालाना टर्नओवर होता है, उन्हें मीडियम एंटरप्राइज (मध्यम उद्योग) माना जाता है। यह परिभाषा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर के लिए मान्य है।

स्टार्टअप और SME में मुनाफ़े का अंतर

स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) और स्टार्टअप में एक प्रमुख अंतर ‘मुनाफा’ होता है। किसी स्टार्टअप की स्थापना सर्वप्रथम किसी नवीन बिजनेस आइडिया को स्थापित करने के लिए होती है। बिजनेस के लिए नई अवधारणा की कल्पना की जाती है। मार्केट में बिजनेस को स्थापित किया जाता है फिर मुनाफा के बारें में सोचा जाता है। जबकि स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) की स्थापना ही मुनाफ़े के लिए होती है।

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SME के तौर एक दुकान लगाने से लेकर कोई मीडियम स्तर का पावर प्लांट लगाने तक का आता है। इन सभी को स्थापित करने के पीछे मकसद यही होता है कि पहले दिन से ही मुनाफा होना शुरु हो जाये। ऐसा होता भी है। जबकि किसी स्टार्टअप के शुरुवात साल से मुनाफे की उम्मीद करना खुद की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है।

स्टार्टअप और SME में मैंन पावर का अंतर

जैसा कि बताया गया है कि स्टार्टअप किसी नवीन बिजनेस आइडिया को मूर्त रुप देने का काम होता है। यह बहुत श्रम वाला और कई लोगों द्वारा संयुक्त रुप से किया जाने वाला काम होता है। स्टार्टअप चलाने के लिए एक साथ बहुत से लोगों की आवश्यकता होती है।

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लेकिन, स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) के साथ ऐसा नहीं है। क्योंकि, SME में एक दुकान भी आ सकती और कोई मीडियम स्तर की फैक्ट्री भी। तो यहां आवश्यकता के अनुसार मैंन पवार लगाया जाता है। वैसे SME में में कोई व्यक्ति खुद अकेले भी काम करता सकता है और अपने जरूरत के मुताबिक मुनाफा निकाल सकता है। जबकि स्टार्टअप के साथ यह संभव नहीं है। क्योंकि स्टार्टअप कोई दुकान नहीं होता है लेकिन SME में दुकान हो सकता है।

स्टार्टअप और SME में फंड जुटाने का अंतर

स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) हो या कोई स्टार्टअप, दोनों को ही चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है। जहां स्टार्टअप के लिए इन्वेस्टर्स के जरिये धन प्राप्त होता है। इसी के साथ सरकार द्वारा चलाई जा रही स्टार्टअप इंडिया द्वारा भी स्टार्टअप के लिए मिलता है। वहीं स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज़ (SME) की शुरुवात खुद के धन की जाती है।

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हालांकि, सरकार द्वारा चलाई जा रहे मुद्रा लोन योजना के जरिये लोन मिलता है लेकिन बिजनेस शुरु करने के लिए अधिकांश धन खुद से लगाना होता है। हां, SME के साथ यह सुविधा है कि बिजनेस का जब विस्तार करना हो तो कई वित्तीय संस्थाओं से बिजनेस लोन बहुत आसानी से मिल जाता है।

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आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश की प्रमुख नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी ‘ZipLoan’ द्वारा MSME और SME कारोबारियों को अपने बिजनेस का विस्तार करने के लिए 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, सिर्फ 3 दिन में दिया जाता है। ZipLoan द्वारा मिलने वाला बिजनेस लोन 6 महीने बाद प्री पेमेंट चार्जेस फ्री होता है।

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