एसएमई सेक्टर यानी लघु और मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। SME उद्योगों की विशेषता होती है कि ये लागत और आकर में छोटे होने के बावजूद प्रभावशाली होते है। अच्छी संख्या में रोजगार पैदा करते है। देश के विकास सूचकांक जीडीपी में अहम योगदान करते है। लेकिन क्या आपको लगता है कि इन उद्योग क्षेत्र में चुनौतियाँ नहीं होती? आइए समझते हैं कि SME सेक्टर का देश में क्या योगदान है और इन उद्योग क्षेत्र की अपनी चुनौतियां क्या हैं।

एसएमई (SME) क्या है?

एक वाक्य में कहें तो ‘वह व्यवसाय जिसे कम जगह और कम संसाधनों के बल चलाया जा रहा हो और जिसमे प्रोडक्ट निर्माण हो रहे हो उसे SME कहते है। लेकिन यह परिभाषा पर्याप्त नहीं है। SME को समझने के लिए हमें विस्तार से चर्चा करना चाहिए।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा 2018 में बनाई गई परिभाषा के अनुसार देखे तो 5 करोड़ तक सालाना कारोबार करने वाले उद्योग SME के तहत आते है। यह परिभाषा सालाना टर्नओवर के आधार पर तय की गई है। इसके पहले 2006 में लघु उद्योग की परिभाषा उद्यम में इन्वेस्ट होने वाले खर्च के आधार पर तय होती थी।

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लघु उद्योग के लिए सरकार द्वारा निर्धारित परिभाषा के अतिरिक्त देखे तो वह सभी कारोबार आते हैं जिसमे प्रोडक्ट निर्माण होता है और सर्विस यानी सेवा प्रदान किया जाता है। इसे एक उदाहरण के तहत समझते हैं – मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के लिए जिन उद्योग में जूता, चप्पल या किसी फैक्ट्री में खिलौने बनते हो उन्हें एसएमई उद्योग कहा जाता है। सर्विस सेक्टर में इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण ट्रेवेल एजेंसी का है। ट्रेवेल एजेंसी सर्विस सेक्टर के लिए SME का उदाहरण है।

भारत में एसएमई के लिए सरकारी दिशानिर्देश

दिशानिर्देश कहने का मतलब है कि सरकार द्वारा इन उद्योगों के लिए क्या निर्देश और प्रक्रिया तय किया गया है। आधार उद्योग के हिसाब से वर्गीकरण इस तरह है:

  • मैनुफैक्चरिंग सेक्टर (प्रोडक्शन सेक्टर)
  • सर्विस सेक्टर (सेवा क्षेत्र)

लघु उद्योग: मैनुफैक्चरिंग सेक्टर

मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में लघु उद्योग उन उद्यमों को कहा जाता है जिनमें 25 से 5 करोड़ तक का आर्थिक निवेश यानी पैसा इन्वेस्ट  किया गया हो। यह इन्वेस्ट मशीनरी खरीदने के लिए और अन्य जरूरतों को पर होना चाहिए।

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लघु उद्योग: सर्विस सेक्टर

सर्विस सेक्टर में लघु उद्योग उन उद्यमों को कहा जाता है जिनमें 10 लाख से 2 करोड़ तक धन इन्वेस्ट किया गया हो। यह इन्वेस्टमेंट मशीनरी और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए होना चाहिए।

मध्यम उद्योग: मैनुफैक्चरिंग सेक्टर

मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में मध्यम उद्योग उन कारोबार को कहा जाता है जिसमे 5 करोड़ से 10 करोड़ के बीच धन इन्वेस्ट किया गया है। यह धन इन्वेस्ट मशीनरी खरीदने के लिए और दूसरी जरूरतों के लिए होना चाहिए।

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मध्यम उद्योग: सर्विस सेक्टर

सर्विस सेक्टर में मध्यम उद्योग उन उद्योग को कहा जाता है जिनमें 2 करोड़ से 75 करोड़ तक का धन इन्वेस्ट किया गया हो। यह धन इन्वेस्ट मशीनरी खरीदने के लिए और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के लिए होना चाहिए।

एसएमई के लिए दी गई ये नई परिभाषा एमएसएमई एक्ट 2006 में पारित प्रावधान के अनुसार है। नई परिभाषा को वैश्विक कारोबार को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। नई परिभाषा तय करने के पीछे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सर्विस सेक्टर के बीच गैप को कम करने के लिए तय किया गया है। एमएसएमई सेक्टर अपने संचालन में क्या- क्या चुनौतियां फेस कर रहा है यह समझने से पहले कुछ सरकारी आकड़ों के बारे में जान लेते हैं।

  • देश में लघु एवं मध्यम उद्योग की संख्या: पंजीकृत और गैर पंजीकृत उद्योगों की कुल संख्या 42।50 मिलियन होने का अनुमान है। इसे देश में चल रही कुल औद्योगिक इकाइयों के अनुसार देखे तो यह संख्या अकेले 95 प्रतिशत हो जाती है।
  • लघु और मध्यम उद्योग में रोजगार की स्थिति: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 106 मिलियन लोगों को एसएमई सेक्टर में रोजगार मिला हुआ है। इसे अगर देश में कुल रोजगार के मुकाबले 40 प्रतिशत संख्या होती है।
  • प्रोडक्शन: msme सेक्टर से देश में 6000 से भी अधिक प्रोडक्ट का निर्माण होता है।
  • एसएमई आउटपुट: देश में कुल मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन का 45 प्रतिशत तक प्रोडक्शन एसएमई सेक्टर से होता है।
  • जीडीपी में योगदान: मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में 6।11 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर में 24।63 प्रतिशत का योगदान एसएमई सेक्टर से है।
  • एसएमई एक्सपोर्ट: देश में कुल एक्सपोर्ट में 40 प्रतिशत तक हिस्सा एसएमई सेक्टर का है।
  • बैंक लोन: बैंक लोन के कुल खातों का 16 प्रतिशत खाता एसएमई के है।
  • फिक्स्ड एसेट: एसएमई सेक्टर में वर्तमान में कुल 1,471,912।94 करोड़ तक की अचल संपत्ति है।
  • एसएमई ग्रोथ रेट: सालाना औसत वृद्धि दर 10 प्रतिशत है।
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एसएमई का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान

लघु और मध्यम उद्योग को 1960 के दशक में एक व्यवस्थित एवं संगठित सेक्टर के रुप में मान्यता प्रदान किया गया है। 1960 के बाद से ही यह क्षेत्र अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा रहा है निरंतर आगे बढ़ रहा है। देश में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन का कार्य रहा है। sme सेक्टर द्वारा लोगों की बेसिक जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान है।

1990 दशक के बाद देश में उदारीकरण का दौर आया। ग्रामीण एरिया से लोग रोजगार की तलाश में शहरों की तरफ जाने लगे। एक समय ऐसा भी दौर आया जब लगा कि गांवों से पूरी जनसंख्या ही शहर की तरफ पलायन कर जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र और शहरों दोनों ही में संतुलन स्थापित करने परेशानी होने लगी। ऐसे में इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया SME सेक्टर ने।

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लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र का विस्तार करने के लिए सरकार द्वारा कारोबार शुरु करने के लिए और कारोबार बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन पर्याप्त रुप में दिया गया। इससे अच्छी संख्या में कारोबार शुरु हुए और जो कारोबार पहले से संचालित हो रहे थे उनका विस्तार किया गया। इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों को ग्रामीण क्षेत्र में ही रोजगार मिलना शुरु हो गया।

इससे हम कह सकते है कि SME सेक्टर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बीच व्याप्त गैप को पाटने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से भी लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समय- समय आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं चलाई जाती है। नई टेक्नोलॉजी से परिचय कराया जाता है और ट्रेनिंग और कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

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एसएमई क्षेत्र में क्या चुनौतियां हैं?

सफलता और चुनौती ये दो ऐसे शब्द हैं जो हर व्यवसाय में समान रुप से चलते रहते है। कामयाब वह होता है जो चुनौतियों का सामना करता है और बेहतर रणनीति के तहत चुनौती को मात देते हुए सफलता प्राप्त करता है। कहा भी गया है-

‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।’

अगर बात करें SME सेक्टर की चुनौतियों की यह सेक्टर तमाम चुनौतियों से जूझते हुए भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। एसएमई सेक्टर में मुख्य चुनौतियां कुछ इस तरह की आती हैं:

  • परस्पर ट्रेनिंग की कमी या पर्याप्त साधन और संसाधन उपलब्ध न होना
  • सीमित धन की उपलब्धता
  • व्यापक नेटवर्किंग न होना या सीमित नेटवर्किंग होना
  • मार्केट रिसर्च का सही और सटीक जानकारी न होना
  • नवीनतम टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त धन न होना
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इसके अतिरिक्त एमएसएमई सेक्टर निम्नलिखित चुनौतियों से जूझ रहा है-

उचित मार्केटिंग प्लेटफॉर्म न मिलना

भारत में एमएसएमई और एसएमई के लिए कभी बेहतर मार्केटंग और ब्रांडिंग प्लेटफॉर्म नहीं उपलब्ध रहा है। अपर्याप्त सरकारी सहायता, अपर्याप्त मार्केटिंग सुविधाओं की कमी जैसे कारकों के कारण, एसएमई प्रोडक्ट के मार्केटिंग और सेल्स में गिरावट आती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोडक्ट या सेवाओं के मार्केटिंग के लिए, एसएमई को हमेशा बजट की कमी सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनकी वृद्धि और पहुंच सीमित हो जाती है।

नई तकनीक तक पहुंच न होना

देखा जाय तो टेक्नोलॉजी हाल के वर्षों में बहुत उन्नत हुई है, मोबाइल फोन और इंटरनेट का बहुत अधिक प्रसार हुआ है। हालांकि, उन्नत टेक्नोलॉजी का उपयोग करना काफी महंगा होता है। जिसके चलते एसएमई द्वारा कम टेक्नोलॉजी के उपयोग के रिणामस्वरूप हमेशा कम प्रोडक्शन होता है। जिससे यह उद्योग सेक्टर पिछड़ गया है।

समय पर बिजनेस लोन का न मिलना

हमारे देश में एसएमई की वृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाधा अपर्याप्त पूंजी और बिनजेस लोन सुविधाओं से संबंधित है। आने वाले वर्ष में भी, एसएमई को बैंकों द्वारा बिजनेस लोन के लिए जटिल प्रोसेस और बिजनेस लोन के लिए प्रॉपर्टी गिरवी रखने की मांग करना, लोन पर ऊंची ब्याज दर लागू करना बहुत बड़ी समस्या है। एक आसान और समय पर लोन प्राप्त करने में कठिनाई एसएमई वृद्धि में बाधा उत्पन्न करने वाला महत्वपूर्ण कारक है।

सरकारी विभागों की लाल-फिता शाही

विनियामक प्रथाओं जैसे निर्माण परमिट, दिवालियेपन का समाधान, संपार्श्विक प्रतिभूतियां / गारंटी, और कराधान आदि जैसे कई ऐसे सरकारी कार्य हैं, जहां पर एमएसएमई कारोबारियों को सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना होता है। हालांकि, 2021 में भारत सरकार द्वारा इन चीजों का सुधार करने का प्रयास जारी है।

इत्यादि ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना करते हुए भी लघु और मध्यम कारोबार निरंतर आगे बढ़ रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हुए अच्छी संख्या में रोजगार प्रदान कर रहे हैं। एसएमई के भविष्य की बात करें तो केंद्र सरकार के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 तक 5 ट्रिलियन की होने की उम्मीद है! जिसमे SME सेक्टर का महत्वपूर्ण योगदान होगा। इस लिहाज से यह कहा जा सकता है कि आगे आने वाले दिनों में लघु एवं मध्यम उद्योग का भविष्य उज्ज्वल है।

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