सफलता की कुछ कहानियां ऐसी होती है, जिन पर विश्वास करना मुश्किल होता है। ऐसी ही एक कहानी है, मूदबिदरी-कर्कला की जानी-मानी फर्म जीके डेकोरेटर्स के मालिक गणेश कामथ की। इसी साल 6 जनवरी को गणेश कामथ को मंगलुरू प्रेस क्लब अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

कहानी गणेश कामथ की-

गणेश कामथ वो बिजनेसमैन हैं, जिनकी कहानी अगर आपने सुन ली तो आपको समझ आ जाएगा कि जिंदगी में कोई भी चीज असंभव नहीं है। गणेश आज कर्नाटक के कर्कला में जीके डेकोरटर्स नाम की एक फर्म चलाते हैं, जो कि पूरे क्षेत्र में काफी मशहूर है। लेकिन गणेश कामथ के यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।

यह भी पढ़ें:- भगवान गणेश से सीखें छोटे बिजनेस को बड़ा बनाने के गुण

गणेश का संघर्ष-

कामथ का बचपन गरीबी में बीता। जिसके कारण उन्होंने 7वीं कक्षा में ही अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। उसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रेक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया था। बात 2001 की है जब कार्कला में एक आयोजन के दौरान गणेश के बॉस ने उसे एक फ्लड लाइट पर एक लाइट बल्ब ठीक करने के लिए 29 फीट ऊंचे मचान पर चढ़ने को कहा।

गणेश कामथ

कामथ बताते हैं, ‘जब वे लाइट्स कनेक्ट कर रहे थे, तभी उनका संतुलन बिगड़ा और वे नीचे जा गिरे।’ उसके बाद उन्हें सीधे अस्पताल में होश आया। जब तक गणेश होश में आए तब तक वह अपने दोनों हाथ खो चुके थे। गणेश के हाथ सीधे तार के संपर्क में आ गए थे जो कि पास के पोल से लगे थे और उसे करंट लग गया। उनके साथियों ने उन्हें करंट से बचाया लेकिन उनके दोनों हाथ खराब हो चुके थे।

यह भी पढ़ें:- अनिल अंबानी की इस चूक की वजह से आई कंपनी को बेचने की नौबत, आप भी रहें सावधान

जॉब से निकाल दिया गया-

अपने दोनो हाथ खो देने के बाद 25 साल के गणेश कामथ डिप्रेशन में आ गए थे। गणेश बताते हैं कि अपने दोनों हाथ खो देने के बाद वे बहुत परेशान हो गए थे। उन्हें लगा कि उनके हाथ ही आय के स्त्रोत थे, अब वे घर की जिम्मेदारी कैसे संभालेगें। गणेश कामथ को उनकी फर्म से निकाल दिया गया। वही फर्म जिसके लिए गणेश ने 13 साल तक काम किया था। आज उसी फर्म के लिए गणेश कामथ किसी काम के नहीं थे। गणेश उस वक्त इतना परेशान हो गए थे कि उन्होंने सुसाइड करने की सोच लिया था।

ऐसे बदली जिंदगी-

एक रिश्तेदार ने गणेश को समझाया और हार ना मानने की सलाह दी। उस रिश्तेदार ने गणेश कामथ से कहा कि उसने गणेश के चेहरे पर ‘राजयोग’ देखा है। गणेश बताते हैं कि, ‘भले ही उनका मकसद मुझे खुश करने का था, लेकिन उस वक्त मैं अपनी जिंदगी से इतना निराश था कि उनके ये शब्द मेरे लिए उम्मीद की एक किरण बन गए थे।’

यह भी पढ़ें:- जानिए सिर्फ 23 साल की उम्र में निधी गुप्ता, कैसे बनीं 500 करोड़ की कंपनी की मालिक

रिपोर्ट्स के अनुसार, गणेश को एक्सीडेंटल बीमा से जो पैसा मिला, उससे उन्होंने काम शुरू किया था। उन्होंने दो म्यूजिक सिस्टम्स खरीदे और उन्हें शादी और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में किराए से देना शुरू कर दिया। जिससे शुरुआत में वो एक दिन के 350 रुपये कमा लेते थे, लेकिन आज उनकी फर्म जीके डेकोरेटर्स का टर्न ओवर लाखों में है।

40 लोगों को दे रहे हैं रोजगार-

जीके डेकोरेटर्स पिछले 16 सालों से शादियों और आयोजनों में अपनी सेवाएं दे रहा है। वर्तमान समय में इस फर्म में आज 40 लोग काम करते हैं। गणेश कहते हैं, ‘आज भले ही मैं खुद अपने हाथ से खाना नहीं खा पाता हूं लेकिन मेरा वेंचर 40 लोगों और उनके परिवार का पेट भर रहा है।’

छोटे कारोबारी ये ले सकते हैं प्रेरणा-

कामथ की सफलता छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी सीख है। गणेश कामथ ने अपने एक्सीडेंटल बीमा से जो पैसा मिला था, उससे बिजनेस किया था। आप अपने बिजनेस के लिए बिजनेस लोन लेकर बिजनेस का विस्तार कर सकते हैं। छोटे कारोबार के लिए MSME बिजनेस लोन काफी सहायक होते हैं।