कारोबारी दुनिया ऐसी खबरे अक्सर सुनने को मिलती है जिनमे किसी कारोबारी का सूद पर पैसा लेकर चुका न पाने की स्थिति में आत्महत्या करने की खबर लिखी गई होती है। अक्सर ऐसा समाचार अख़बारों में देखने को मिलती है।

ऐसा क्यों होता है कि कारोबारी सूद पर पैसा लेकर चुका नही पाते और उन्हें आत्महत्या करना पड़ जाता है? क्या कभी किसी ने इस बात पर विचार किया है? ऐसा इसलिए होता क्योंकि जब कारोबारी को पैसों की जरूरत पड़ती है तो उसे ठीक समय पर पैसा नही मिलता और वह सूद पर पैसा ले लेता है।

सूद यानी ब्याज पर पैसा लेने के बाद कारोबरी फंस जाता है क्योंकि सूद की रकम इतनी अधिक होती है कि वह मूल रकम चुकाने की बजाय सूद वाली रकम यानी ब्याज के पैसों को ही भरता रह जाता है। ऐसी स्थिति में कारोबारी कभी अपना बिजनेस का मुनाफा कमा ही नही पाता है।

तो समाधान क्या है? कारोबारियों का यही सवाल होगा कि व्यापारी सूदखोरों के चंगुल से कैसे बचे? इसका समाधान उपलब्ध है। कारोबारियों को सूदखोरों के चंगुल से बचने का उपाय है – बिजनेस लोन।

कारोबारियों को कम समय में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का यह माध्यम सबसे महत्वपूर्ण है। बिजनेस लोन के जरिये कारोबारी शार्ट टर्म के लिए लोन लेते हैं और अपने बिजनेस में लगाते हैं और लोन की रकम को 1 से 2 साल के भीतर वापस करते हैं।

बिजनेस लोन क्या है?

भारत में बिजनेस लोन का टर्म नया है। आज से 10 साल पहले तक लोन के नाम पर सिर्फ पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और अन्य तरह के लोन वितरित किये जाते रहे हैं। अब भारत में बिजनेस लोन का टर्म शुरु हुआ है।

बिजनेस लोन वह रकम होती है जो कारोबार करने वालें लोगों को बैंक, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी – एनबीएफसी और अन्य भारतीय रिजर्व बैंक से रजिस्टर्ड संस्थाओं से दिया जाता है। केन्द्र सरकार द्वारा बिजनेस लोन के लिए कई सरकारी योजना चलाई जा रही है।

सरकारी योजनाओं में मुद्रा लोन योजना, स्टैंड अप इंडिया लोन योजना, स्टार्टअप लोन योजना इत्यादि जैसी योजना चल रही है। आपको बता दें कि मुद्रा लोन योजना में 10 लाख तक का बिजनेस लोन दिया जाता है।

अगर नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी की बात करें तो देश की प्रमुख एनबीएफसी कंपनी ZipLoan है जहां से 1 से 5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन* में मिलता है।

बिजनेस लोन का लाभ क्या है?

जहां एक तरफ साहूकारों से ब्याज पर पैसा लेना पड़ता है वह भी अपनी कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखकर वही दूसरी तरफ बिजनेस लोन के बदले कुछ गिरवी नही रखन होता है। बिजनेस लोन की ब्याज दर भी पारदर्शी होती है।

जब भी कारोबारी किसी भी कंपनी या बैंक से बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करता है तो उसको लोन की रकम वितरण करते वक्त एक पत्र दिया जाता है। उस पत्र पर लोन की रकम, लोन चुकाने की समयसीमा, लागु ब्याज दर और नियम और शर्तें लिखी गई होती हैं।

इस तरह देखा जाये तो बिजनेस लोन की प्रक्रिया काफी पारदर्शी होने के साथ – साथ क़ानूनी रुप से भी सही होती है। बिजनेस लोन के संबंध में महत्वपूर्ण बात यह है कि बिजनेस लोन के कई प्रकार होता है जो बिजनेस की सभी जरूरतों को पूरा करते हैं:

  • वर्किंग कैपिटल लोन
  • मशीनरी लोन
  • सर्विस लोन
  • टर्म लोन

बिजनेस लोन कैसे मिलता है?

भारत में जब से टेक्नोलॉजी का दौर आया है तब से बैंकिंग सेक्टर में क्रांति हो गई है। आज के दौर में बड़ी संख्या में फिनटेक कम्पनियां एनबीएफसी सेक्टर में उतर चुकी हैं। फिनटेक कंपनियों के लोन मार्केट में आ जाने से अब बिजनेस लोन मिलना काफी आसान हो गया है।

एनबीएफसी के अलावा लगभग सभी सरकारी-प्राइवेट बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों से बिजनेस लोन मिलता है। सरकार की तरफ से मुद्रा लोन योजना चलाई जा रही है जिसमे उद्यमियों को बैंक, एनबीएफसी कंपनी और ग्रामीण बैंकों से 10 लाख तक का बिजनेस दिया जाता है।

जैसा कि हमने पहले ही चर्चा किया है कि बिजनेस लोन मार्केट में प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan है जहां से कारोबारियों को 5 लाख तक का बिजनेस लोन बिना कुछ गिरवी रखे सिर्फ 3 दिन में दिया जाता है। ZipLoan से बिजनेस लोन पाने की शर्तें बेहद आसान हैं:

  • बिजनेस कम से कम 2 साला पुराना होना चाहिए
  • बिजनेस का सालना टर्नओवर 5 लाख से अधिक होना चाहिए
  • बिजनेस में पिछले साल भरी गई ITR कम से कम 1.5 लाख अधिक होनी चाहिए
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर या ब्लड रिलेशन में से किसी एक के नाम पर होनी चाहिए

बिजनेस लोन का फायदा क्या है?

बिजनेस के कई फायदे हैं:

  • कारोबारी को साहूकारों से पैसा नही लेना पड़ता है।
  • बिजनेस बढ़ाना आसान हो जाता है।
  • बिजनेस की जरूरतें ठीक समय पर पूरी हो जाती है।
  • कारोबारी का आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • कारोबारी को अपने बिजनेस की एक नई ब्रांच खोलने में काफी आसानी हो जाती है।
  • इत्यादि।