रिटायर्मेंट एक ऐसी ऐज होती है, जिसमे व्यक्ति की आमदनी बंद हो जाती है, उम्र बढ़ जाती है और व्यक्ति पूरी तरह से दूसरे पर निर्भर हो जाता है। रिटायर्मेंट की उम्र ही वह उम्र होती है जिसमे व्यक्ति को सबसे अधिक सपोर्ट की जरूरत होती है।

रिटायर्मेंट की उम्र व्यक्ति को पैसों से लेकर मानसिक सपोर्ट करने की जरूरत होती है। अमूमन व्यक्ति 60 से 62 साल के बाद रिटायर हो जाता है। अगर कोई व्यक्ति जब रोजगार में हो और अपने आने वाले भविष्य के लिए कुछ बचत कर रहा हो, तो वही बचत उसके काम आती है।

अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब व्यक्ति नौजवान होता है तो उसकी खर्च की करने की आदत होती है। व्यक्ति सोचता है की कल के लिए कल सोचा जायेगा। यह सोचते ही सोचते व्यक्ति कब रिटायर हो जाता है, उसको पता भी नहीं चलता है।

ऐसी स्थिति में रिटायरमेंट प्लानिंग करना और रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट करना सबसे सही विकल्प साबित होता है। रिटायमेंट इन्वेटमेंट से संबंधित कुछ बातों का ध्यान हमेशा रखना चाहिए:

जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी इन्वेस्टमेंट शुरु कर देना चाहिए

इन्वेस्टमेंट एक ऐसी चीज है जिसको सतत करना पड़ता है यानी बिना रुके लगातार पैसे जमा करना करता पड़ता है। यहां पर बूंद – बूंद घड़ा भरने वाली कहावत लागू होती है।

जिस प्रकार बूंद – बूंद पानी इक्कठा करने से एक समय बाद घड़ा पानी से भर जाता है, ठीक उसी प्रकार धीरे – धीरे पैसे जमा करने से भी एक दिन वह बड़ा अमाउंट बन जाता है। लेकिन, यहां पर आपको इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि जितना जल्दी हो सके, उतनी जल्दी पैसा इन्वेस्टमेंट शुरु करना बेहतर रहता है।

अब किसी का स्वभाविक तौर पर यह सवाल हो सकता है कि पैसे का इन्वेस्टमेंट कहा करें जिससे, एक लंबे समय बाद बेहतर रिटर्न मिल सके? आइये समझते हैं कि कहा – कहा पैसा इन्वेस्ट करने से बेहतर आमदनी हो सकती है।

सिप (SIP) प्लान में इन्वेटमेंट 

यह एक म्यूच्यूअल फंड (Mutual Fund) की एक स्कीम है। SIP (सिप) का पूरा नाम सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान है। सिप प्लान लेने वाले व्यक्ति को यह आजादी रहती है की वह हर महीने अपने मनमुताबिक पैसा, अपनी किसी पसंदीदा म्यूच्यूअल फंड (Mutual Fund) स्कीम में डाल सकता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में सिप स्कीम के जरिये इन्वेस्ट तेजी से बढ़ा है। सिप में इन्वेस्टमेंट बढ़ने का एक ही कारण है, वह है- बेहतर रिटर्न मिलना। जी हां, सिप के जरिये किसी भी म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्ट रकम पर बेहतर रिटर्न मिलता है।

सिप इन्वेस्टमेंट के बारें में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

  • अगर आपने किसी म्यूच्यूअल फंड में सिप स्कीम के जरिये हर महीने पैसा इन्वेस्ट करने का फैसला किया है, तो आपको इसके लिए बहुत सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इसमें एक भी महीने का पैसा बाउंस हुआ तो, बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना कम रहती है।
  • सिप स्कीम में पैसा इन्वेस्ट करने से डरने वाली कोई बात नहीं है, क्योंकि सिप स्कीम के तहत आप किसी भी अपनी मनपसन्द म्यूच्यूअल फंड में पैसा डाल सकते हैं, किसी एक कंपनी के लिए बाध्यता नहीं है।
  • इसमें कम्पाउंडिंग का फायदा मिलता है, मतलब अगर आप कोई धनराशि काफी लंबे समय के लिए इन्वेस्ट करते हैं और उस इन्वेस्ट की गई धनराशि पर इंटरेस्ट कमाते हैं, तो आपको इंटरेस्ट पर भी इंटरेस्ट मिलेगा। इस तरह आप जब तक पूरा पैसा निकाल नहीं लेते हैं तब तक आपको इंटरेस्ट मिलता रहेगा।
  • सबसे अच्छी बात यह है कि सिप स्कीम के तहत किसी भी म्यूच्यूअल फंड में न्यूनतम 500 रुपये के साथ इन्वेस्टमेंट शुरु किया जा सकता है।

सैलरी बढ़ने के साथ इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए  

किसी भी व्यक्ति की सैलरी बढ़ने का एक प्रोसेस होता है। सैलरी शुरुवात में कम होती है, लेकिन समय के साथ बढ़ती रहती है। ऐसे में जब कम सैलरी हो तो, कम पैसों का इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है, लेकिन जब सैलरी बढ़े तो इन्वेस्टमेंट की रकम भी बढ़ा देना चाहिए।

हेल्थ इंश्योरेंस जरुर कराए

अगर आपकी उम्र 40 साल वर्ष से अधिक है, तो आपको सभी जरूरी कामों की तरह हेल्थ इंश्योरेंस भी कराना चाहिए। चूंकि 40 साल के बाद लोगों को तरह – तरह की बीमारियां घेर लेती हैं, ऐसे में सभी बिमारियों का ईलाज खुद के पैसे से कराए तो, इसमें ज्यादा खर्च हो सकता है।

वहीं व्यक्ति अपना हेल्थ इंश्योरेंस कराए रहता है, तो उसके ईलाज का सभी खर्च इंश्योरेंस कंपनी वजह करती है। ऐसे में खुद का और अपने पाटर्नर का हेल्थ इंश्योरेंस कराना एक बहुत बड़ा फायदे वाला सौदा साबित हो सकता है। हमारी सलाह है कि अपने रिटायर्मेंट इन्वेस्टमेंट प्लान में हेल्थ इंश्योरेंस को जरुर शामिल करें।

संभव हो तो कोई सूटेबल बिजनेस की नीव भी रखें

चूंकि रिटायर्मेंट के बाद लोगों के पास काम नहीं रह जाता है और आमदनी भी बंद हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति घर बैठे बोर होता है। बेटे – बेटियां अपनी जिंदगी संवारने में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में नौकरी के साथ रिटायरमेंट के प्लान में बिजनेस शुरु करना एक बेहद समझदारी भरा फैसला साबित होगा।

बेशक शुरुवात में बिजनेस छोटे स्केल पर हो, लेकिन महत्वपूर्ण बिजनेस का होना है। अगर बिजनेस होगा तो, उसे समय के साथ बड़ा किया जा सकता है। अगर इनता पैसा जमा नहीं हो पाता है, जिससे बिजनेस बढ़ाना मुश्किल हो जाये, तो बिजनेस लोन से बिजनेस बढ़ाने में बहुत अधिक सहायता मिल सकती है।

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  • बिजनेस 2 साल से अधिक पुराना हो
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर 5 लाख से अधिक हो
  • सालाना आईटीआर डेढ़ लाख से अधिक की फाइल होती हो
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर हो (यह माता – पिता, भाई – बहन, पति – पत्नी, पुत्र – पुत्री के नाम पर भी रहेगा तो मान्य किया जायेगा।)

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बिजनेस लोन के लिए निम्न कागजातों की जरूरत होती है:

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