भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की तरफ से एक बार फिर रेपो रेट 2019 में कटौती की गई है। RBI के इस फैसले से लोन लेने वाले कारोबारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

6 अगस्त 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक के मैद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट और कर्ज को लेकर एक बैठक आयोजित की थी। बैठक का फैसला अब आ गया है। मैद्रिक नीति (एमपीएस) की बैठक में जो फैसला लिया गया उससे आम आदमी और कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

एमपीसी की बैठक में आम लोगों को राहत देते हुए बैंकों रेपो रेट में 35 बेसिस प्वाइंट (0.35%) की कटौती करने का फैसला किया गया है। रेपो रेट में कटौती होने के बाद रेपो रेट अब 5.40 प्रतिशत पर आ गई है। पहले रेपो रेट 5.75 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष में चौथी बार रेपो रेट में कटौती की गई है।

RBI द्वारा लिए गए इस फैसले से अब बैंक लोगों को कम EMI और कम ब्याज दर पर होम और व्हीकल लोन दे सकेंगे। उल्लेखनीय है की रेपो रेट के साथ ही रिवर्स रेपो रेट (Reverse repo rate) को भी घटाकर अब 5.15 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले रिवर्स रेपो रेट (Reverse repo rate) 5.50 प्रतिशत थी।

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क्या होती है रेपो रेट?

रेपो रेट से ही यह तय होता है की लोन सस्ता मिलेगा या महंगा। रेपो रेट वह दर होती है जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों को कर्ज देते हैं। RBI से कर्ज मिलने के बाद बैंक लोगों को कर्ज देते हैं। जिस रेपो रेट पर बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज मिलता है उसी रेपो रेट पर बैंक लोगों को कर्ज देते हैं। अगर बैंकों को RBI से कम रेपो रेट पर कर्ज मिलता है तो बैंक लोगों को सस्ता लोन देते हैं अगर बैंकों को अधिक रेपो रेट पर कर्ज मिलता है तो बैंक भी लोगों को महंगा कर्ज प्रदान करते हैं।

रिवर्स रेपो रेट (reverse repo rate) क्या होती है?

यह रेपो रेट के ठीक उलटा होती है। रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिसपर बैंकों को उनकी ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में जमा धन पर ब्याज मिलता है। यानी बैंक जो रकम RBI में जमा करते हैं उसपर बैंकों को ब्याज मिलता है।

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रेपो रेट में कटौती करने से 2 मेम्बर थे असहमत

रिजर्व बैंक द्वारा गठित मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) में कुल 6 सदस्य थे। रेपो रेट घटाने पर 2 सदस्य अपनी असहमति जताए लेकिन 4 सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया। रेपो रेट घटाने से असहमत होने वाले सदस्य- चेतन घटे और पामी दुआ सीधे 0.35 फीसदी कटौती करके 0.25 फीसदी कटौती करने के पक्ष में थे। बाकि के 4 सदस्य रविंद्र ढोलकिया, देवब्रत पात्रा, बिभु प्रसाद और गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस कटौती का समर्थन किया जिससे यह फैसला लिया जा सका।

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भारतीय रिजर्व बैंक का यह फैसला ऐतिहासिक है

RBI की पिछली तीन मौद्रिक समीक्षा बैठकों में रेपो रेट में क्रमशः 0.25  फीसदी की कटौती की जा चुकी है। अब अगस्त में हुई यह कटौती चौथी बार हुई है। चौथी बार RBI ने बैंकों को दिए जाने वाले कर्ज पर रेपो घटाने का काम किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब गर्वनर की नियुक्ति के बाद से लगातार चौथी बार रेपो रेट कम किया गया है। उर्जित पटेल के इस्‍तीफे के बाद शक्तिकांत दास गवर्नर के रुप में नियुक्त हुए थे।

रेपो रेट कटौती से जुड़ी अहम बातें

  • रेपो रेट घटकर अब 5.40 फीसदी हो गई है
  • घटने से पहले रेपो रेट 5.75 फीसदी थी
  • इससे पहले रेपो रेट में 0.75 फीसदी की कटौती पिछले तीन समीक्षा बैठकों में हो चुकी है।

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रेपो रेट में कटौती होने से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

रिजर्व बैंक के इस फैसले से उन सभी लोगों को सीधा फायदा होगा जो होम लोन, व्हीकल लोन या कारोबार करने के लिए लोन लेना चाहते हैं। RBI द्वारा रेपो रेट घटाने के बाद बैंकों पर लोन की ब्याज दर घटाने का दबाव होगा और मासिक EMI भी कम बनेगी। इस तरह देखा जाए तो लोगों को अब पहले की अपेक्षा अधिक लोन का लाभ उठा सकेंगे।

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  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख तक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

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  • बिजनेस लोन की रकम 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री है।
  • लोन की रकम 6 महीने से लेकर 36 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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