कोरोना वायरस के चलते देश में एक महीने का लॉकडाउन घोषित किया गया है। इस लॉकडाउन में पूरा देश जैसे ठहर सा गया है। सभी कुछ थम गया है। इस ठहराव में अगर किसी का सबसे अधिक नुकसान हो रहा है तो वह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई कारोबार।

एमएसएमई उद्योग का चूंकि स्केल कम होता है। कम पूंजी होती है। ऐसे में उनके लिए एक महीने का ठहराव बहुत नुकसानदायक है। जिन कारोबारियों का बिजनेस लोन या किसी अन्य तरह का लोन चल रहा होगा, उनके लिए तो यह स्थिति किसी मुसीबत से कम नहीं है।

हालांकि केन्द्र सरकार द्वारा हर वह कदम उठाया जा रहा है, जिससे देशवाशियों को कम से कम नुकसान उठाना पड़े। पिछले दिनों केन्द्र सरकार के निर्देश पर भारतीय रिजर्ब बैंक (आरबीआई) ने बैंको, नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ ही अन्य वित्तीय संस्थाओं से लोन की मासिक किश्‍त (EMI) मोरेटोरियम यानी अगले 3 महीने के लिए लोन किश्‍त अभी नहीं लेने का सुझाव दिया था।

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इस सुझाव पर सभी बैंको के साथ ही अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा अमल भी किया गया है। सभी बैंकों और एनबीएफसी से द्वारा 31 मई तक लोन की किश्‍त नहीं ली जा रही है। हालांकि यह अलग बात है कि वित्तीय संस्थाओं के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह किश्‍त न लेने का क्या शर्त लगाती हैं।

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इसी क्रम क्रम भारतीय रिजर्ब बैंक द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों यानी एमएसएमई कारोबारियों के लिए और बड़ा फैसला किया गया है। इस यह फैसला एमएसएमई कारोबारियों के लिए बहुत फायदेमंद है।

भारतीय रिजर्व बैंक – आरबीआई द्वारा एमएसएमई के लिए एनपीए की अवधि बढ़ाने का फैसला किया गया है। अगर कोई एमएसएमई कारोबारी 6 महीने तक लोन की किश्‍त नहीं जमा कर पाता है, तब ही उसे एनपीए घोषित किया जा सकता है। पहले यह समय 3 महीने की था।

क्या है आरबीआई का फैसला?

आरबीआई द्वारा लोन लेने वाले कारोबारियों को फौरी तौर पर राहत पहुंचाने के लिए एक नया नियम बनाया गया है। नए नियम के मुताबिक, जो कारोबारी 90 दिन तक यानी 3 महीने तक लोन की किश्‍त का भुगतान नहीं करेगा, उन्‍हें एनपीए घोषित कर दिया जाएगा।

लेकिन उन कारोबारियों के लिए आरबीआई द्वारा एक और राहत दी गई है, जिन कारोबारियों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन है। जीएसटी पंजीकृत कारोबारियों को 180 दिन यानी 6 महीने की मोहल्लत प्रदान की गई है। मतलब जीएसटी पंजीकृत कारोबारी अगर 6 महीने तक भी लोन की किश्त का भुगतान नहीं करता है, तो भी वह एनपीए की कैटेगरी में नहीं आएगा।

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आरबीआई द्वारा बनाए गये इस नये नियम से 3 महीने की छूट से करीब 3 लाख कारोबारियों को फायदा पहुंचने का अनुमान है। वहीं जीएसटी पंजीकृत करीब 1।41 लाख छोटे एवं मझोले कारोबारियों को 6 महीने की छूट का लाभ मिलने कीउम्मीद है।

आरबीआई के इस फैसले में ऐसे कारोबारी भी शामिल हैं, जिनका सिबिल एमएसएमई रैंक (सीएमआर) 7 से 10 है और उन पर बैंकों का लगभग 82 हजार करोड़ रुपए बकाया है। यह आंकड़ा सिडबी (स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज डेवलपमेंट बैंक) और ट्रांसयूनियन सिबिल द्वारा जारी किया गया है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि तक़रीबन 1।41 लाख एमएसएमई कारोबारियों पर बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों का 12 हजार 910 करोड़ रुपया बकाया है।

जिनका सिबिल एमएसएमई रैंक (सीएमआर) 7 से 10 है, इनकी संख्या 1।66 लाख एसएमई के करीब है। इन एमएसई पर बैंकों का लगभग 82 हजार करोड़ रुपए बकाया है।

ऐसे में देखा जाए तो 90 दिन का ब्रेकेट में किश्त न जमा करने पर अधिकतर मामले एनपीए होने का खतरा था। अब इन कारोबारियों को आरबीआई द्वारा 6 महीन का समय देकर इन्हें एक बेहतरीन मौका प्रदान कर दिया है।

इन राज्यों में है सबसे अधिक एनपीए का आंकड़ा

जीएसटी और नोट्बंदी के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई सेक्‍टर में एनपीए की संख्‍या निरंतर बढ़ रही है। जहां बड़े राज्‍यों में छोटे कारोबारियों के एनपीए का प्रतिशत अधिक है। वहीं, स्‍टील, जेम्‍स एंड ज्‍वैलरी सेक्‍टर में एनपीए अधिक हो रहे हैं।

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एनपीए होने का आंकड़ा सिडबी और सिबिल द्वारा जॉइंट रुप से जारी की रिपोर्ट में सामने आया है। आइये आपको बताते हैं कि किन राज्यों में सबसे अधिक एनपीए के मामले किन राज्यों में आ रहे हैं।

राज्य एनपीए रेट (प्रतिशत में)
महाराष्‍ट्र 11.5%
तमिलनाडु 8.0%
गुजरात 6.3%
आंध्रप्रदेश 9.9%
उत्‍तर प्रदेश 8.3%
कर्नाटक 8.2%
दिल्‍ली 10.3%
पश्चिम बंगाल 12.5
राजस्थान 3.5%
हरियाणा 6.9%

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