RBI आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो रेट में 25 आधार अंक यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। क्योंकि महंगा कच्चा तेल तथा डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से महंगाई के और बढ़ने की उम्मीद है। चौथी 2 महीने की मौद्रिक नीति पर देश के हालात को मद्देनज़र रखते हुए मौद्रिक नीति समिति 3 अक्टूबर से तीन दिवसीय बैठक करेगें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दो बार बढ़ोतरी के बाद मौजूदा समय में रेपो रेट 6.50 फीसदी पर है।

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RBI क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट-

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट RBI को रेपो रेट बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। अगर इस बैठक के बाद RBI रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाती है, तो यह लगातार तीसरी बार दर में बढ़ोतरी होगी। वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर डालें, तो रुपया कमजोर हुआ है और यह डॉलर के मुकाबले 73 के आस-पास है।

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SBI की रिपोर्ट-

SBI ने अपने शोध रिपोर्ट इकोरैप में कहा कि रुपये में गिरावट को रोकने के लिए RBI को नीतिगत दर में कम से कम 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, हम रेपो रेट में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी की बात खारिज करते हैं, क्योंकि इससे बाजार में अफरातफरी मच सकती है। हालांकि तटस्थ रुख में बदलाव की भी संभावना बनती है, क्योंकि लगातार तीन बार दर में बढ़ोतरी के साथ तटस्थ रुख RBI के संदेश को परस्पर विरोधी बना सकता है।

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CRR घटने की संभावना नहीं-

कोटक इकनॉमिक रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विकास दर में अपेक्षित चक्रीय सुधार के अंतर्निहित प्रभाव, रुपये की कमजोरी तथा मध्यम अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के आधार पर एमपीसी अक्टूबर में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि बैंकरों को यह उम्मीद नहीं है कि तरलता से संबंधित समस्या के बावजूद RBI आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में कमी करेगा।

बिजनेस लोन लेना होगा महंगा-

RBI के रेपो रेट बढ़ाने से बैंक लोन लेना महंगा कर सकते हैं, जिससे कि बिजनेस लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएगी। इस साल में पहले ही कई बार बिजनेस लोन की ब्याज दरें बढ़ चुकी हैं। जिसके कारण कारोबारियों को महंगी किस्त चुकानी पड़ी है।

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क्या करें छोटे कोरबारी-

केन्द्रीय बैंक RBI के रेपो रेट के बढ़ाने का सीधा असर बैंकों पर पड़ता है, जिसके कारण इन्हें ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ती है। मगर RBI के रेपो रेट के बदलाव से NBFC सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होती है। तो ब्याज दरों के बढ़ने की स्थिति में छोटे कारोबारी RBI द्वारा मान्यता प्राप्त NBFC Ziploan से कम ब्याज दरों पर बिजनेस लोन ले सकते हैं।