8 बड़े क्षेत्रों का इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन के लिए यह योजना लाई गई है। इन क्षेत्रों में कोयला, खनिज, रक्षा निर्माण, हवाई क्षेत्र, और केंद्र शासित प्रदेश, अंतरिक्ष क्षेत्र, और परमाणु ऊर्जा में बिजली वितरण कम्पनियां शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि खनिज सेक्टर में विकास के मौके हैं। निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। इसी के साथ वित्त मंत्री ने कहा कि हमें कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिये खुद को तैयार करना होगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला की चुनौतियों का सामना करने के लिये तैयार रहना होगा। आइये जानते हैं कि राहत पैकेज पार्ट 4: “आत्मनिर्भर भारत” अभियान की मुख्य घोषणाएं क्या हैं।

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कारोबारियों को कई सुविधा प्रदान की गई है

  • जीएसटी, आईबीसी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबारी सुगमता) से जुड़े सुधार, पावर सेक्टर से जुड़े सुधार, टैक्स सिस्टम में सुधार किया जायेगा।
  • प्रत्येक मंत्रालय में प्रोजेक्ट डेवलपमेंट सेल बनेगा, जो तय करेगा कि किस क्षेत्र में निवेश आ सकता है और कौन निवेश कर सकता है।
  • निवेश करने वालों को दिक्कत नहीं आएगी।
  • राज्यों की रैंकिंग भी होगी कि निवेश को आकर्षित करने के लिए उनकी कौन सी योजनाएं हैं।
  • नए चैंपियन सेक्टर्स जैसे सोलर पीवी को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

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कोयला क्षेत्र के लिए राहत घोषणा

  • कोयला क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग होगी और सरकार का एकाधिकार खत्म होगा। कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने भी प्राइवेट सेक्टर को दी जायेंगी।
  • कोयला उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता कैसे बने और कैसे कम से कम आयात करना पड़े, इसपर काम किया जायेगा।
  • इससे देश के उद्योगों को बल मिलेगा। 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे। पात्रता की बड़ी शर्तें नहीं रहेंगी।गैसिफिकेशन के लिए भी काम किया जाएगा।
  • राजस्व साझेदारी के आधार पर कमर्शियल माइनिंग को कोयला सेक्टर में शामिल किया जायेगा।
  • कोयला निकासी की बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कोल इंडिया लिमिटेड की खदानें भी निजी सेक्टर को दी जाएंगी।
  • राजस्व साझेदारी के आधार पर कमर्शियल माइनिंग को कोयला सेक्टर में शामिल किया जायेगा।
  • ज्यादा से ज्यादा खनन हो सके और देश के उद्योगों को बल मिले। 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे। पात्रता की बड़ी शर्तें नहीं रहेंगी।
  • कोयला सेक्टर में मौके बढ़ाने के लिए सरकार 50 हजार करोड़ का निवेश करेगी।
  • 500 माइनिंग ब्लॉक की नीलामी की जाएगी। माइनिंग लीज का ट्रांसफर भी किया जा सकेगा।
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मिनरल माइनिंग क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाया जायेगा

मिनरल में एक्सप्लोरेशन माइनिंग प्रॉडक्शन सिस्टम लाया जायेगा। नई व्यवस्था में 500 माइनिंग ब्लॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें 50,000 करोड़ का खर्च इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा। बॉक्साइट और कोयला का ज्वाइंट ऑक्शन होगा।

इससे खनन में वृद्धि होगी और रोजगार सृजन होगा। एल्यूमिनियम इंडस्ट्री को भी इससे लाभ मिलेगा। सालाना 40 फीसदी उत्पादन बढ़ेगा। कंसेशन्स इन कमर्शियर टर्म्स लगभग 5,000 करोड़ रुपये के होंगे। मिनरल इंडेक्स बनाया जाएगा और टैक्स सिस्टम भी आसान किया जाएगा।

बॉक्साइट, कोयला, और खनिज ब्लॉकों के लिए संयुक्त नीलामी की व्यवस्था होगी। नई व्यवस्था में 500 माइनिंग ब्लॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकिया से बिजली की लागत भी कम हो जाएगी।

रक्षा उत्पादन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाया जायेगा

वित्त मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए मेक इन इंडिया जरूरी है। इसके लिए कई कदम उठाए गए। साल दर साल हथियारों की लिस्ट को नोटिफाई किया जाएगा और आयात के लिए प्रतिबंध लगाया जाएगा। इनकी स्वदेशी आपूर्ति की जाएगी।

इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा। इससे डिफेंस आयात बिल में भारी कटौती होगी, जिसका सीधा लाभ भारत में की उन कंपनियों को मिलेगा जो हिंदुस्तान में सैन्य सामान की आपूर्ति करेंगी।

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वित्त मंत्री ने कहा कि इस दिशा में जवाबदेही के लिए ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड का निगमीकरण करने की बात हम कर रहे हैं ताकि कामकाज में सुधार हो। हथियार प्रतिबंध के माध्यम से रक्षा आयात को कम करने का प्रयास होगा।

हथियार के पुर्जों के स्वदेशीकरण करने का प्रयास किया जायेगा। समयबद्ध रक्षा खरीद के लिए सरकार कदम उठाएगी। इसके साथ ही ट्रायल और टेस्टिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा। रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लिमिट 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी जाएगी।

सिविल एविएशन सेक्टर में बदलाव किया जायेगा

वित्त मंत्री ने कहा कि सिविल एविएशन सेक्टर को लेकर तीन कदम हैं। भारतीय नागरिक विमानों को लंबे रास्ते लेने पड़ते हैं। भारतीय हवाई क्षेत्र को सुगम बनाने के लिए मिलिटरी अफेयर विभाग के साथ समन्वय करके इसको दो महीने के अंतर्गत सुलझा लिया जाएगा।

इससे विमानन क्षेत्र को 1 हजार करोड़ रुपये का फायदा होगा। एयर फ्यूल भी बचेगा और पर्यावरण भी बचेगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने छह में से तीन हवाई अड्डों का अनुबंध प्रदान किया है। पीपीपी के माध्यम से इसके लिए काम होगा।

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वित्त मंत्री ने कहा कि कि पीपीपी मॉडल के तहत 6 नए एयरपोर्ट्स की नीलामी होगी। इससे लगभग 2300 करोड़ की डाउन पेमेंट मिलेगी। 12 हवाई अड्डों में पहले और दूसरे चरण में लगभग 13,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा।

छह अन्य एयरपोर्ट्स की नीलामी तीसरे चरण में होगी। भारत का एमआरओ हब बनने से उड़ानों की लागत में 1000 करोड़ रुपये की कमी आएगी। एमआरओ इकोसिस्टम को रैश्नलाइस किया गया। इससे 800 से 2000 करोड़ रुपये तीन सालों में जो एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस के लिए जो खर्च होता है, उसमें बचत होगी। डिफेंस और सिविल सेक्टर को कन्वर्ज करके भी इसके लिए बढ़ावा दिया जा सकता है।

इसरों की सुविधाएं अब प्राइवेट सेक्टर को भी प्राप्त होंगी

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय स्पेस सेक्टर को प्राइवेट सेक्टर के लिए भी खोला जा रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी स्टार्टअप की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।

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अब प्राइवेट सेक्टर की कम्पनियां भी सैटेलाइट लांच कर पाएंगी। प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को इसरो की सुविधाओं का इस्तेमाल करने का मौका दिया जाएगा। इस काम में इसरो (Indian Space Research Organisation) कंपनियों की मदद भी करेगा।

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