प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को नीचले व मध्यम वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए की थी। इसके तहत लोगों को खुद का रोजगार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का कर्ज आसान शर्तों पर दिया जाता है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के लिए अलग वित्तीय संस्थान है, जिसका मुख्यालय मुंबई में है। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। व्यावसायिक बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) और एनबीएफसी जरिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन दिया जा रहा है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (सांख्यिकी मंत्रालय ) के सर्वेक्षण-2018 के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था मे लगभग 5.77 करोड़ लघु व्यवसायिक इकाइयां हैं, जिनमे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12 करोड़ लोग कार्यरत हैं। इन लोगों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तीन प्रमुख घटक (Types of Mudra Loan)

प्रारम्भिक दौर में मुद्रा योजना ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की सहायता से सेवा की शुरुआत की थी। इसकी प्रारंभिक पूँजी ₹200 अरब और क्रेडिट गारंटी कोष ₹30 अरब का था। भविष्य के संभावित अवसरों और योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसमें ₹1 ट्रिलियन का अतिरिक्त निवेश किया गया है।

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मोदी बिजनेस लोन स्कीम निम्न तीन श्रेणियों के तहत लोन देता है।

  • शिशु योजना – स्टार्ट-अप बिजनेस के लिए 50,000 रुपये तक का लोन
  • किशोर योजना – 50,000 रुपये से लेकर 5,00,000 रुपये तक का लोन
  • तरुण योजना – 5,00,000 रुपये से लेकर अधिकतम 10,00,000 रुपये तक लोन

बढ़े अप्रत्यक्ष रोजगार के असवर प्रधानमंत्री मुद्रा योजनाYoutube

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म वित्त और पुनर्वित्त उपलब्ध कराने का काम कर रही है। इस योजना के जरिए छोटे-मोटे कारोबार में लगे असंगठित क्षेत्र के लोग इससे विशेष रूप से लाभान्वित हो रहें हैं। भारत जैसी पूंजी के आभाव वाली अर्थव्यवस्था में मुद्रा योजना एक विशेष अवसर पैदा कर रहीं है, जिससे अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

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Source- The quint