क्या आप अपनी बचत को कहीं निवेश करना चाहते हैं? क्या अपनी चाहते हैं कि आपके द्वारा किया गया निवेश सरकारी कंपनी में हो? क्या आप चाहते हैं कि आपके द्वारा किया गया निवेश कर-मुक्त यानी टैक्स फ्री हो? अगर ऐसा है आपके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सबसे बेहतरीन विकल्प है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक सरकार स्कीम है। जो व्यक्ति लंबे समय के लिए अपने पैसों को कहीं इन्वेस्ट करना चाहते हैं उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सबसे सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में पैसा इन्वेस्ट करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद मिलने वाला ब्याज समेत पैसा टैक्स से मुक्त होता है। पब्लिक प्राविडेंट फंड को हिन्दी में सार्वजनिक भविष्य निधि कहा जाता है।

पब्लिक प्राविडेंट फंड की पिछले साल के कुछ आंकड़ों के बारे में बात करें तो अक्टूबर – दिसंबर 2019 में पीपीएफ (PPF) में जमा पैसों पर 7.9% तक ब्याज लागू थी। इस तरह देखें तो जहां बैंक में फिक्स्ड डिपोजिट करने पर 4% से 6% तक ब्याज मिलता है। वहीं PPF पर 7.9 % ब्याज लागू रही है। इस आर्टिकल में आपको पब्लिक प्राविडेंट फंड के बारें में विस्तार से जानकारी दी जा रही है साथ ही ‘फॉर्म H” के बारें में जानकारी दी जाएगी।

पब्लिक प्राविडेंट फंड क्या है?

पब्लिक प्राविडेंट फंड (PPF) मुख्यतः एक इन्वेस्ट अकाउंट यानी निवेश खाता है। PPF अकाउंट भारतीय डाक विभाग के किसी डाकघर, के साथ किसी भी राष्ट्रीकृत बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक इत्यादि जैसे बैंकों में PPF अकाउंट खोला जा सकता है।

सरकारी बैंकों के आलावा पप्राइवेट सेक्टर का आइसीआइसीआई बैंक अभी तक भारत का पहला निजी स्वामित्व वाला बैंक है जहां PPF खाता खोला जा सकता है। आइसीआइसीआई बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पीपीएफ खाता खोलने की अनुमति प्राप्त है।

PPF अकाउंट का कितना ब्याज मिलता है?

वर्ष 2019 के अक्टूबर-दिसंबर 2019 अवधि के लिए PPF पर ब्‍याज दर 7.9 % लागू था।

कितने रुपये से PPF अकाउंट खोला जा सकता है?

यह ग्राहक के ऊपर निर्भर करता है कि अपना पब्लिक प्राविडेंट फंड (PPF) अकाउंट कितने रुपये से शुरु करना चाहता है। आधिकारिक तौर बात करें तो PPF अकाउंट किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक और पोस्ट ऑफिस में केवल न्यूनतम 100 रुपये के अमाउंट से खुलवाया जा सकता है।

अगर बात करें कि एक साल के भीतर किसी PPF अकाउंट में कितना न्यूनतम और कितना अधिकतम पैसा जमा कर सकते हैं तो एक फाइनेंशियल ईयर (वित्त वर्ष) में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये का इन्वेस्ट (निवेश) किया जा सकता है।

PPF अकाउंट मेच्योर कितने समय में होता है

सामान्य तौर पर कोई भी PPF अकाउंट 15 साल में मेच्योर हो जाता है। यानी PPF का मैच्योरिटी पीरियड 15 साल का होता है। हालाँकि ग्राहक चाहें तो मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद भी अपने PPF अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा है।

जब ग्राहक अपने PPF अकाउंट को PPF का मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने के बाद 5 साल के लिए आगे बढ़ता है तो इन अगले 5 सालों में ग्राहक को हर फाइनेंशियल ईयर (वित्त वर्ष) में मिनिमम इन्वेस्ट (न्यूनतम निवेश) करने की बाध्यता नहीं रहती है।

इस तरह से देखा जाये तो बिना नया पैसा डाले भी PPF अकाउंट जारी रहेगा और मौजूदा पैसों पर ब्याज का फायदा मिलता रहेगा। व्यक्ति को अगर पैसों की तत्काल जरूरत न हो तो उसे अपना PPF खाता आगे बढ़ाते रहना चाहिए। इस तरह व्यक्ति एक पैसा पर डबल ब्याज प्राप्त कर सकता है।

इसी के साथ इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब कोई व्यक्ति बिना नया पैसा डाले अपने PPF के पैसों पर ही डबल ब्याज का फायदा उठाता है तो 5 साल का पीरियड लॉक होने के बाद इसके पूरा होने तक PPF अकाउंट में बीच में कोई नया इन्वेस्ट (निवेश) नहीं किया जा सकता है। हां एक फाइनेंशियल ईयर में एक बार आंशिक पैसा जरुर निकालने का मौका मिल सकता है।

PPF में फॉर्म H क्या है? और इसका क्या रोल है?

पब्लिक प्राविडेंट फंड (PPF) में “फॉर्म H” का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। फॉर्म H उनके लिए होता है जो लोग अपना PPF अकाउंट की निर्धारित समय – सीमा पूरा होने के बाद भी अपना PPF अकाउंट जारी रखना चाहते हैं। अपना PPF अकाउंट अगले 5 साल के लिए फिर से लॉक कराना चाहते हैं।

जो लोग अपना परिपक्क PPF अकाउंट जारी रखना चाहते हैं उन लोगों को फॉर्म H भरना होता है। पोस्ट ओफ़िस में PPF खाता खुलवाने वाले लोगों का फॉर्म H ऑनलाइन उपलब्ध होता है।

इंडियन पोस्ट की वेबसाइट से इस फॉर्म को डाउनलोड करके भरने के बाद इसे पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि फॉर्म H उसी पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है जिस पोस्ट ऑफिस में व्यक्ति का PPF अकाउंट होता है।

PPF खाता मेच्योर होने के बाद इसे फिर से जारी रखने के लिए इस बात का ध्यान रखना होता है कि PPF खाता मेच्योर होने के 1 साल के भीतर ही फॉर्म H भरकर जमा करना होता है। यानी एक साल के भीतर ही आपको सूचना देना होगा।

अगर आप बैंक/पोस्ट ऑफिस को एक भीतर PPF खाता जारी रखने संबंधित कोई सूचना नहीं देते हैं तो इसे बैंक/पोस्ट ऑफिस की ओर से खुद ही आगे बढ़ा दिया जाएगा। ऐसे में मौजूदा बैलेंस पर ब्याज तो मिलता रहेगा लेकिन आप पैसा इन्वेस्ट (निवेश) नहीं कर सकते हैं।

वहीं अगर फॉर्म H भरे बिना खाते में एक साल से अधिक समय तक रकम जमा करते रहेंगे तो आपका नया निवेश अनियमित माना जाएगा और इस पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा। साथ ही इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत कोई लाभ भी नहीं मिलेगा।