व्यक्ति की मासिक आमदनी चाहें जितनी भी हो लेकिन उसे आमदनी नहीं माना जाता है बल्कि आमदनी उस रकम को माना जाता है जो धन व्यक्ति महीने में बचत करता है।

एक कहावत बहुत फेमस है, “पैसों का हाथपैर होता है, वह चलता ही रहता है” अथार्त पैसे को अगर संभाल कर न रखा जाये तो उसे खर्च होने में समय नहीं लगता है।

ऐसा नहीं है की पैसों की बचत होना सिर्फ कम आमदनी वाले लोगों की समस्या है। यह समस्या अमूमन हर किसी के साथ होती होती है।

व्यक्ति की आमदनी कम हो या अधिक सभी के लिए पैसों सही तरीके से मैनेज करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति को बचत करने की आदत डालना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

बचत करने की आदत से ही यह तय होता है की व्यक्ति का फाइनेंशियल भविष्य कैसा होगा। आइये कुछ ऐसे बचत करने के तरीकों के बारें में जानते हैं जिससे अच्छी बचत हो सकती है।

फाइनेंशियल लक्ष्य बनाना

व्यक्ति अगर एक लक्ष्य निर्धारित करता है की उसे एक निश्चित समय में कहां तक पहुंचना है तो वह व्यक्ति अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए हर संभव प्रयास करता है। व्यक्ति वह सभी प्रयास करता है जिससे वह अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल कर सके।

ठीक इसी तरह फाइनेंशियल लक्ष्य बनाना भी बचत करने के बेहतरीन तरीकों में शामिल है। फाइनेंशियल लक्ष्य से आशय यह है की व्यक्ति को यह निर्धारित करना होता है की उसे एक महीने, तीन महीने, छः महीने या एक साल में कितना पैसा सुरक्षित बचाना है।

See also  इस दीवाली चमकेगा भारतीय लाइट बाजार, BIS ने चाइनीज लाइट पर चलाया डंडा

अब जब व्यक्ति यह निर्धारित कर लेता है की हमें इतने समय के भीतर इतना पैसा बचाकर सुरक्षित रखना है तो वह उसके लिए हर संभव प्रयास करता है। जरूरत पड़ने पर अपने निजी खर्चों में भी कटौती करता है।

इसे एक उदाहरण के तौर पर देखें तो: माना श्याम का मासिक वेतन 80 हजार रुपया है। श्याम हर महीने ही 80 हजार रुपया खर्च कर देता है। ऐसे में यह माना जायेगा की श्याम ने 80 हजार रुपया महीने में खर्च किया है। यह नहीं माना जायेगा की श्याम ने 80 हजार रुपये महीने में कमाया है।

वहीं कोई राम की सैलरी 30 हजार रुपये महिना है और राम हर महीने 10 हजार रुपये बचाता है तो यहां पर यह माना जायेगा की राम 10 हजार रुपये कमाता है क्योंकि 10 हजार रुपये महीने में राम बचाता है।

यहां पर आप स्पष्ट तौर प् देख सकते हैं की जो व्यक्ति 80 हजार महिना सैलरी पाता है लेकिन एक भी पैसा बचा नहीं पाता है लेकिन 30 हजार महिना सैलरी पाने वाला व्यक्ति 10 हजार रुपये महीने में बचा लेता है। क्यों? क्योंकि राम का लक्ष्य है महीने 10 हजार रुपये बचाना इसलिए वह कैसे भी करके महीने में 10 हजार रुपये बचा लेता है।

क्रेडिट कार्ड के खर्चों को नियंत्रित करना

आज के दौर में सभी की जरूरते बढ़ गई हैं। मार्केट हर रोज नये प्रोडक्ट लांच होते रहते हैं। ऐसे में लोग शौक पूरा करने के लिए नई – नई चीजें खरीदते रहते हैं। दिक्कत तब होती है जब लोगों के पास चीजों की जरूरत भी नहीं होती लेकिन वह स्टेटस मेंटेन करने के लिए चीजों को खरीदते हैं।

See also  अपने मैन्यूफैक्चरिंग व्यवसाय का करें विस्तार, बिजनेस लोन के साथ

तब और अधिक दिक्कत होती है जब व्यक्ति के पास चीजें खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं होता है तो वह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते चीजों की खरीददारी कर लेते हैं। इस तरह बेवजह उनके ऊपर कर्ज लद जाता है जिसे उन्हें किसी भी कीमत पर चुकाना ही होता है।

चूंकि क्रेडिट कार्ड एक उधार कार्ड होता है। इससे व्यक्ति अधिक खर्च करने की छुट मिल जाती है लेकिन यही छुट व्यक्ति के लिए तब भारी साबित होती है जब उन्हें क्रेडिट कार्ड की बिल जमा भरना होता है। ऐसे में हम कह सकते हैं की क्रेडिट कार्ड का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए।

इसे हम इस तरह भी कह सकते हैं की आमदनी अगर अठ्ठनी है तो खर्च रुपैया नहीं करना चाहिए। आमदनी के हिसाब खर्च करना चाहिए और बचत करने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए।

जितना जल्द हो सके लोन छुटकारा पाना चाहिए

आज की डेट में किसी को नौकरी मिले न मिले लोन जरुर मिल जायेगा। लोन चाहे बिजनेस लोन के रुप में मिले या पर्सनल लोन के तौर लेकिन मिल जरूरत जाता है। वर्तमान में लोन लेना चुनौती नहीं है बल्कि लोन चुकाना बड़ी चुनैती है।

व्यक्ति अगर कारोबारी है तो उन्हें बिजनेस के खर्चों को पूरा करने के लिए बिजनेस लोन की जरूरत पडती ही है। या फिर व्यक्ति को कोई तत्कालीन जरूरत आ गई है और व्यक्ति के पास आवश्यक धन नहीं है तो वह पर्सनल लोन लेता ही लेता है।

See also  बिजनेस फंड प्राप्त करने के लिए बैंक के अलावा और कौन से विकल्प हैं?

यहां पर हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं की लोन लेना कोई खराब बात नहीं है। लोन लगभग सभी बड़े व्यापारी लेते हैं। चूंकि लोन की रकम ब्याज पर मिलती है लेकिन लोन को वापस करने का विकल्प तैयार होना चाहिए।

अगर जल्दी से लोन वापस नहीं हुआ तो उसका ब्याज बढ़ता ही रहता है, जिसे ठीक नहीं कहा जा सकता है। ब्याज के रुप में दी जाने वाली रकम व्यक्ति द्वारा चुकाई जाने वाली अतिरिक्त रकम होती है।

अतः हम यहां पर यह सलाह देना चाहेंगे की जरूरत पड़ने पर लोन जरुर लीजिये लेकिन जितनी जल्दी हो सके लोन को चुकाने का प्रयास कीजिये।

इमरजेंसी फंड बनायें

जैस की हम सभी लोगों ने देखा होगा की जगह – जगह पर अग्निशमन यंत्र रखा होता है। हर समय तो आग लगती नहीं है लेकिन अग्निशन यंत्र रखा होता है। समय – समय अग्निशमन में विभाग में लोगों की भर्ती भी होती है। ऐसा क्यों होता है?

ऐसा इसलिए होता है ताकि जब कभी ऐसी स्थिति बने जिससे कहीं आग लग जाये तो उस आग पर तुरंत काबू पा लिया जाये और उसे बुझा दिया जाये।

ठीक यहीं होता फाइनेंशियल मैनेजमेंट में। व्यक्ति को अपनी इनकम में से जितना संभव हो सके एक हिस्सा इमरजेंसी फंड के तौर पर रखना चाहिए। ऐसा नहीं है इमरजेंसी फंड में एक साथ बहुत अधिक पैसा रखा जाए बल्कि हर महीने छोटी – छोटी रकम इमरजेंसी फंड में रखा जा सकता है।

Related Posts

MSME Full FormMSME RegistrationCGTMSE
MSME LoanVAT RegistrationUdyog Aadhaar
GST RegistrationStand Up India SchemeCGTMSE Fee
Shop LoanWhat is CGSTDownload GST Certificate
PM SVAnidhi SchemeCancelled ChequeUPI Full Form
Business Loan EligibilityGST Full FormE-Way Bill Unblocking
CIN NumberGST LoginUAN Number