नई दिल्ली: केन्द्र में बनी नई सरकार ऑनलाइन शॉपिंग से जुडी दिक्कतों को समाप्त करने के लिए गाइडलाइन लाने जा रही है। इस प्रक्रिया पर काम शुरू भी हो गया हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इसे 100 दिनों में ड्राफ्ट पूरी तरह बनाकर इसे क़ानूनी मान्यता भी प्रदान कर दिया जाये।

क्या है पूरा मामला

दरअसल पिछले समय से ऑनलाइन खरीदारी को लेकर कस्टमर्स पैसा रिफंड पाने में और प्रोडक्ट के रिटर्न या एक्सचेंज जैसी कई की परेशानियों से जूझते थे। सरकार के पास यह शिकायत पिछले कार्यकाल में ही हुई थी की ऑनलाइन कम्पनियां पैसा रिफंड करने या सामान बदलने में बहुत अधिक समय लेती है या आनाकानी करती है।

क्या है सरकार का रुख

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनने के बाद सरकार इस मसले का स्थाई समाधान चाहती है। समाधान के क्रम में सरकार ऑनलाइन खरीदारी के लिए एक गाइडलाइन बनाने पर विचार कर रही है। यह गाइडलाइन ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों को कुछ क़ानूनी अधिकार प्रदान करेंगे। गाइडलाइन से कस्टमर्स को अच्छी खासी राहत मिलने की उम्मीद है। गाइडलाइन के साथ ही कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री का लक्ष्य कंज्यूमर फोरम का आधुनिकीकरण करने का भी विचार है।

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पिछले दिनों हुई बैठक के महत्वपूर्ण प्रस्ताव

  • सरकार द्वारा 100 दिन का अजेंडा तैयार किया गया है, क़ानून बनाने का ड्राफ्ट बनाने की तैयारियां स्टार्ट हो चुकी है
  • नई गाइडलाइन से ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को सामान रिटर्न, पैसा रिफंड इत्यादि में काफी सहूलियत मिलेगी
  • कस्टमर्स कंपनियों द्वारा किये जाने वाले धोखाधड़ी से बच जायेंगे

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कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री से मिली जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर सरकार काफी गंभीर है। धोखाधड़ी की इस समस्या से निपटने के लिए सौ दिवसीय प्लान पर काम करना चाहती है। इन सौ दिनों में मंत्रालय के अधिकारी ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े कानून बनायेंगे, क़ानूनी ड्राफ्ट में अगर कुछ अधिक फेरबदल नहीं हुआ तो इसको अंतिम रूप देकर कानून बना दिया जायेगा।

कंज्यूमर अफेयर्स के सचिव विनाश श्रीवास्तव के अनुसार, ‘ऑनलाइन खरीदारी के लिए आने वाली नई गाइडलाइंस से रिटर्न, एक्सचेंज और रिफंड में पारदर्शिता आएगी। ये गाइडलाइंस कंज्यूमर को ई-कॉमर्स कंपनियों की धोखाधड़ी से बचाएंगी। 100 दिन में नई गाइडलाइंस जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। कंज्यूमर फोरम का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा।’

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नरेंद्र मोदी सरकार अपने प्रथम कैविनेट बैठक में ऑनलाइन शॉपिंग में कस्टमर्स को राहत देने के लिए रेग्युलेटर बनाने की बात कही थी। काफी शिकायतें आने के बाद सरकार ने कहा था कि खराब प्रॉडक्ट की जिम्मेदारी भी अब ऑनलाइन कंपनियों को उठानी होगी और वो सेलर की गलती बताकर उसे टाल नहीं पाएंगी, उनकी जिम्मेदारी तय किया जायेगा, सरकार अब ऑनलाइन कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कानून बना रही है।

Source – Navbharat Times