One Person Company (OPC) एक तरह से बिजनेस शुरू करने और उसे रजिस्टर करवाने का नया रूप है। वैसे One Person Company भारत में बिजनेस का नया तरीका है, लेकिन ब्रिटेन एवं कई यूरोपीय देशों में काफी लंबे समय से यह बिजनेस का एक सफल रूप है। इस नियम को 2013 में The Companies Act, 2013 के रूप में सामने लाया गया और यह नव युवाओं के लिए बिजनेस शुरू करने का एक नया और आसान रास्ता है। इस नियम के तहत आपको बहुत लोगो पर निर्भर नहीं होना पड़ता है, जैसे कि पारम्परिक तरीके से कंपनीज को रजिस्टर करवाते समय होना पड़ता था। आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देगें और बताएंगें है कि OPC register करवाने के क्या-क्या फायदे और नुकसान हैं।

One Person Company क्या है

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क्या है One Person Company-

OPC यानि कि One Person Company एक ऐसी कंपनी जिसमें केवल एक सदस्य है। OPC की इस परिभाषा को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 के उपधारा 62 में परिभाषित किया गया है। इस तरह की कम्पनी की स्ट्रक्चर में केवल एक ही शेयरहोल्डर हो सकता है। शेयरहोल्डर अपने बाद किसी व्यक्ति को उत्तराधिकारी घोषित कर सकता है, जो उसकी आकस्मिक मृत्यु या अन्य स्थिति में उस कम्पनी का शेयरहोल्डर बन सके। One Person Company में कम से कम एक डायरेक्टर होता है और अधिकतम यह पन्द्रह हो सकते है, कंपनी का एक शेयरहोल्डर भी खुद को डायरेक्टर घोषित कर सकता है।

One Person Company

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कैसे करें OPC के लिए रजिस्ट्रेशन-

One Person Company गठित करने की प्रक्रिया भी किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह ही होती है। सबसे पहले रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में आप अपनी कंपनी के नाम के बारे में पता कर सकते हैं। कंपनी के नाम के पीछे ठीक उसी तरह ‘OPC’ लगाना होगा जैसे ‘प्राइवेट लिमिटेड’ लिखते हैं। इस कंपनी का मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति का होगा, इसलिए आपको नॉमिनी भी चुनना होगा। नॉमिनी को लिखित तौर पर अपनी सहमति रजिस्ट्रार को सौंपनी होगी। मालिक अपनी मर्जी के अनुसार नॉमिनी बदल सकता है, लेकिन उसे हर बार रजिस्ट्रार को इस संबंध में सूचना प्रदान करनी होगी। डॉक्युमेंट मिलने के 7 दिनों के भीतर आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं। अगर कंपनी में सिर्फ एक डायरेक्टर है, तो इस पर कोई प्रावधान लागू नहीं होगा। लेकिन अगर एक से ज्यादा डायरेक्टर होने पर हर साल दो बैठक करना जरूरी है।

One Person Company

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रजिस्ट्रेशन के नियम-

  • सबसे पहले कम्पनी में जो डायरेक्टर के लिए Digital Signature Certificate [DSC] चाहिए होता है।
  • इसके बाद Digital Signature Certificate [DSC] के लिए रजिस्टर करना होता है।
  • फिर आप उसके बाद आप जो अपनी कम्पनी का नाम रखना चाहते है, वो निश्चित करने के बाद वह नाम पहले से रजिस्टर है या नहीं इस बारे में जानने के लिए Ministry of Corporate Office में आवेदन करना होता है।
  • इसके बाद कुछ औपचारिकतायें पूरी करने के बाद आप अपनी OPC के लिए रजिस्टर कर सकते है |

वैसे किसी भी अकेले व्यक्ति के लिए One Person Company रजिस्टर करना एक बेहद पेचीदा काम हो सकता है। इसलिए अगर आप चाहे तो मार्किट में ऐसी बहुत से Firms मौजूद हैं, जो इसमें आपकी मदद कर सकती हैं। आप इस बारे में google करके और जानकारी ले सकते है।

One Person Company के फायदें-

  • OPC का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी की पहचान उसके मालिक की पहचान से अलग होती है। यानी अगर कंपनी किसी कानूनी पचड़े में फंसती है, तो मुकदमा उस कंपनी पर होगा न कि कंपनी के मालिक पर।
  • इसका दूसरा फायदा है कि इसमें लायबिलिटी बेहद कम होती है।
  • इसमें बेहद कम पेपर वर्क शामिल है, जो कि इस पूरी प्रक्रिया आसान बना देता है।
  • OPC छोटे कारोबारियों के लिए काफी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें कारोबारी बिना किसी अतिरिक्त शेयर धारक के भी कंपनी शुरु कर सकता है।
  • One Person Company यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुई हैं।

One Person Company

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One Person Company के नुकसान-

  • इसका सबसे बड़ा नुकसान है, इसके रजिस्ट्रेशन की पेचीदा कार्यवाई।
  • एक person जो OPC रजिस्टर करता है, वो उसी तरह की दूसरी कम्पनी को रजिस्टर नहीं कर सकता है और ना ही ऐसी किसी कम्पनी में नॉमिनी हो सकता है, जो OPC के अंतर्गत आती हो।
  • OPC ऐसी किसी लेन देन में शामिल नहीं हो सकती जो गैर-वित्तीय प्रकृति की हो।
  • माइनर person ऐसी कम्पनी में ना तो शेयरहोल्डर हो सकता है और ना ही नॉमिनी बन सकता है।
  • OPC को बाद में किसी ऐसी कम्पनी में नहीं बदला जा सकता जो company under Section 8 of the Act के अंतर्गत (गैर लाभकारी कम्पनी) आती हो। 

One Person Company के फायदे

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चीन में OPC कॉन्सेप्ट काफी सफल रहा है। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और पाकिस्तान में भी इस तरह की कंपनियां शुरू करने के लिए कानून मौजूद हैं।