देश में एक शब्द बहुत तेजी से कहा जा रहा है और सुना जा रहा है। वह शब्द है एनआरसी। एनआरसी शब्द को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। असम सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में हालत सरकार की नियन्त्रण से बाहर है।

अब यह आन्दोलन जोर पकड़ता जा रहा है। एनआरसी के विरोध में देश के अधिकतर यूनिवर्सिटी के छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एनआरसी विरोध का प्रमुख गड़ बनता जा रहा है।

दिल्ली में वर्तमान हालत ऐसे हैं कि दिल्ली पुलिस और छात्रों के झड़प आम बन चुका है। छात्रों का विरोध प्रदर्शन बीच – बीच में हिंसक होता जा रहा है। हालाँकि पुलिस हिंसक आन्दोलन को कुचलने का पूरा प्रयास कर रही है। कहीं – कहीं पर पुलिस द्वारा की जा रही ज्यादती भी देखने को मिल रहा है।

ऐसा कहा जा रहा है कि छात्रों की आड़ में कुछ असामजिक तत्व भी शामिल होकर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान पहुंचा रहे हैं और तोड़फोड़ कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस उपद्रव और आन्दोलन को शांत करने के लिए सख्ती से निपट रही है।

लेकिन इनसब के बीच सबसे अधिक जिस चीज का नुकसान हो रहा है वह है बिजनेस यानी कारोबार। जी हां दिल्ली में जब से एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल का विरोध शुरु हुआ है तब से दिल्ली में कारोबार ठप पड़ गया है।

राज्यों की प्रवेश सीमा बंद कर दी गई है। ऐसे में दिल्ली में किसी ट्रक का प्रवेश न तो हो रहा है और न ही कोई ट्रक दिल्ली से बाहर जा रहा है। दिनांक 19-12-2019 से पूरी दिल्ली में धारा 144 लागु हो गई है। ऐसे में कारोबारियों को खाली बैठना पड़ रहा है।

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ग्राहक खरीददारी के लिए निकल नही रहे हैं। ऐसे में सबसे अधिक जिनका नुकसान हो रहा है वह हैं कारोबारी। जिन कारोबारियों का कच्चे प्रोडक्ट का बिजनेस है उनके माल खराब हो रहे हैं और जो छोटे कारोबारी हैं उनकी रोजाना कि आमदनी बंद है।

ऐसे में कारोबारी एनआरसी और सीएए का विरोध तो सुन रहे हैं लेकिन कई ऐसे हैं जिनको यह नही पता चल पा रहा है कि सीएए और एनआरसी है क्या चीज? आइये समझते हैं कि सीएए और एनआरसी क्या है और इसका बिजनेस पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

सीएए क्या है?

सीएए का फुल फॉर्म कॉमन अमेंडमेंट बिल है। इसे हिन्दी में नागरिकता (संशोधन) कानून के नाम से जाना जाता है। कॉमन अमेंडमेंट बिल पिछले दिनों केन्द्र सरकार द्वारा दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पास करा लिया गया है। इस बिल में तीन पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत में शरण चाहने वाले हिंदू, सिख, इसाई, पारसी, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

यहां यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि नागरिकता उन्हीं लोगों को दी जानी है जो भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं। बिना वैध दस्तावेज के भी भारत में रह रहे हैं। इन लोगों को नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 की मदद से भारत में स्थायी रूप से रहने में मदद मिलेगी।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि अब तक भारत की नागरिकता पाने के लिए इस तरह के लोगों को भारत में 12 साल तक रहना जरूरी था, जिसे कॉमन अमेंडमेंट बिल के जरिये अब कम करके छह साल कर दिया गया है।

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केन्द्र सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किया गया था उसमें दो अहम चीज़ें थीं – पहला, ग़ैर-मुसलमान प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देना और दूसरा, अवैध विदेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान हैं।

एनआरसी क्या है?

एनआरसी का फुल फॉर्म नेशनल सिटिजनशिप रजिस्टर है। इसे हिन्दी में  राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कहा जाता है। यह एक वैध भारतियों के भारतीय नागरिक होने का रजिस्टर है। इस रजिस्टर में जिन नागरिकों का नाम नही होगा उन्हें देश के बाहर भेजने का प्रावधान किया गया है।

एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी कि CAA में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। और एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने का प्रावधान है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि मूल रूप से एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम के लिए लागू किया गया था। इसके तहत अगस्त के महीने में यहां के नागरिकों का एक रजिस्टर जारी किया गया। प्रकाशित रजिस्टर में क़रीब 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया था। जिन्हें इस सूची से बाहर रखा गया उन्हें वैध प्रमाण पत्र के साथ अपनी नागरिकता साबित करनी थी। ऐसे बहुत से लोग पाए गये जो अपनी नागरिकता साबित करने वाले कागज़ी दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं।

वर्तमान में इन्हीं दोनों बिल को लेकर पुरे देश में बवाल हो रहा है। दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी सहित देश के कई यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट इन दोनों बिल का विरोध कर रहे हैं। इन विरोध के बीच अगर किसी का सबसे अधिक नुकसान हो रहा है तो वह देश है।

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देश में कारोबार इस समय ठप हुआ पड़ा है। समय – समय इंटरनेट सेवाएँ बंद करने की नौब्ब्त आ रही है क्योंकि इंटरनेट के जरिये अफवाह फैलने का डर बना हुआ है।

एनआरसी और सीएए का कारोबार पर असर

सीएए कानून के बन जाने से उपजे विरोध से कारोबार का व्यापक मात्रा में नुकसान हो रहा है। दिल्ली के कारोबारी दिन भर अपना बिजनेस खोले बैठे दिखाई दे रहे हैं लेकिन ग्राहकों का पता नही है। ग्राहक इस इसलिए बाजार में नही निकल रहे है क्योंकि कब कहां कौन सा विरोध हो जाये और लाठीचार्ज हो जाये कहा नही जा सकता है।

इस तरह से देखा जाये तो विरोध करने की वजह से किसी का भी भला देखने को नहीं मिल रहा है। छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है इधर कारोबारियों को बिजनेस में नुकसान झेलना पड़ रहा है। अगर किसी कारोबारी का बिजनेस इस विरोध में धीमा हो गया है तो उन्हें सलाह है कि वह बिजनेस लोन के जरिये अपने वर्किंग कैपिटल को ठीक रखें, क्योंकि कुछ ही दिनों में सब कुछ नार्मल हो जायेगा।

ऐसी स्थिति में वर्किंग कैपिटल मैनेज करने के लिए बिजनेस लोन लेना सही निर्णय साबित हो सकता है. आपको बता दें कि बिजनेस लोन किसी भी कारोबारी को सिर्फ 3 दिन* में मिल सकता है. देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से सिर्फ 3 दिन* में 5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन मिल सकता है।

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