शहरों की आर्थिक समृद्धि और युवाओं को रोजगार दिए जाने के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है। एक स्थायी एवं मजबूत अर्थव्यवस्था के बिना किसी भी शहर के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। My City My Pride के दौरान उन सभी समस्यायों की पहचान की गई, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास की राह में बाधा बने हुए हैं।

My City My Pride

यह भी पढ़ें:- श्रीकृष्ण से सीखें बिजनेस में सफल होने की ये बातें, होगा करोड़ों का मुनाफा

क्या है My City My Pride

जागरण समूह की इस पहल में आप परिभाषित मानकों पर शहर की जरूरी सुविधाओं यानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, सुरक्षा, सड़क, पानी, बिजली इत्यादि का पारखी नज़रों से मूल्यांकन करेंगे। यह अभियान 02 जुलाई से 30 सितम्बर तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

यह भी पढ़ें:- बिटाना देवी: 5वीं पास उस महिला व्यवसायी की कहानी, जिसे राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

इस अभियान की सहायता से शहरों के कारोबारियों के रास्ते में आ रही समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश होगी। समाधान रिपोर्ट को शहर के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। इसमें जन-प्रशासन के सहयोग से चुने हुए मुद्दों की प्रगति पर लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि आपका शहर और बेहतर हो सके।

इंदौर के कारोबारियों की राय-

भारत के बेहतरीन शहरों में शुमार मध्य प्रदेश के इंदौर को उन समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है, जो शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था की राह में बड़ी रुकावट पैदा कर रहे हैं। इंदौर के कारोबारियों का मानना है कि कारोबार के लिए जरूरी नियम-कानून को सरल बनाए जाने के साथ ही उद्योगों के लिए एक्जिट पॉलिसी लाई जानी चाहिए ताकि यदि कोई उद्योगपति अपना व्यवसाय बदलना चाहे तो वह परिवर्तित कर सके। कारोबारियों के अनुसार जैसे सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) के लिए सस्ती बिजली मुहैया कराई जाती है, वैसे ही MSME को भी रियायती दर पर बिजली दी जाए।

My City My Pride

यह भी पढ़ें:- इन वजहों से नियमित तौर पर चेक करते रहें अपना क्रेडिट स्कोर

उत्तराखंड के कारोबारियों की समस्या-

अगर बात उत्तराखंड के देहरादून की हो तो यहां स्किल्ड लोगों को कमी सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है। कारोबारियों का कहना है कि अगर कौशल विकास, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और मुद्रा योजना को ढंग से अमली-जामा पहनाया जाता है तो उद्योगों के लिए जरूरी कुशल कामगारों की मांग और आपूर्ति में मौजूद असंतुलन को कम किया जा सकता है।

लखनऊ में ग्रामोद्योग उत्पाद के लिए बाजार की कमी-

यूपी की राजधानी लखनऊ के कारोबारियों का मांग है कि लखनऊ को एक ब्रांड की तरह प्रमोट किया जाना चाहिए। ग्राम पंचायतों को सौंपे गए विकास कार्यों के मुताबिक ग्राम सभा स्तर पर संसाधनों की भारी कमी है, जिसे तत्काल उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। ग्रामोद्योग उत्पाद के लिए बाजार की कमी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की राह में सबसे बड़ी बाधा है, जिसका सरकार की तरफ से समाधान किए जाने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें:- आसानी से बिजनेस लोन पाने के लिए यहां क्लिक करें

वहीं शहरों में उद्योगों के विकास की असीमित संभावनाओं के बीच चिकनकारी और जरदोजी के काम में यंग प्रोफेशनल्स को जोड़े जाने की जरूरत है। साथ ही मलीहाबादी आम की ब्रांडिंग और उसकी मार्केटिंग कर किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है। लखनऊ में रहने वाले लोगों का मानना है कि हाईवे के किनारे पारंपरिक उत्पादों के साथ पर्यटन गांव को विकसित किए जाने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजूबती मिलेगी और लोगों को रोजगार भी। वहीं बंद पड़े उद्योगों को भी फिर से शुरू किए जाने के साथ ही छोटे और मझोले उद्योगों को टैक्स में रियायत दिए जाने की जरूरत है।

Source:- Dainik Jagran