प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना – Mudra Loan Yojna 

हमारे देश की कुल जनसँख्या 1 करोड़ 30 लाख से भी अधिक हो गई है. जीवनयापन के लिए हर इंसान को पैसों की जरूरत होती है. बिना कोई रोजगार के इनकम हो भी सकती है. ऐसे में रोजागर का ऑप्शन बनता है नौकरी या स्वरोजगार.

जितना यह सच है कि जीवन बिना रोजगार के नही चल सकता है उतना ही यह भी सच है कि देश के सभी लोगों को नौकरी भी नही मिल सकती है. सरकारी नौकरी की संख्या तो वैसे भी बहुत कम है. प्राइवेट नौकरी भी सभी को संभव नही हो सकती है.

चूँकि हर किसी को नौकरी मिलना संभव नही है तो ऐसे में क्या बाकी लोग जीवन जीना छोड़ देंगे? नही. ऐसा बिल्कुल भी नही हो सकता है. यहां एक पुरानी कहावत बहुत फिट बैठती हैं – भगवान ने पेट दिया है तो उसको भरने का जरिया भी दे ही देता है.

नौकरी न होने के स्थिति में विकल्प की बात करना बेहतर होता है. विकल्प आता है स्वरोजगार का. जी हां. स्वरोजगार यानी खुद से किया जाने वाला रोजगार. स्वरोजगार में इंसान खुद से कोई बिजनेस करता है और उससे कमाई करता है उससे वह अपना जीवनयापन करता है.

स्वरोजगार तक तो बात ठीक है. जैसा कि हम सब को पता है कि बिना पैसा लगाये कोई बिजनेस शुरु नही किया जा सकता है. ऐसे में जिन लोगों के पास पैसा न हो और वह बिजनेस करना चाहते हो तो वह क्या करेंगे?

इस स्थिति में सरकार लोगों की मदद करने के लिए सामने आती है. केन्द्र सरकार द्वारा मुद्रा लोन योजना, स्टैंड-अप इंडिया लोन योजना सहित कई ऐसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिसमे कारोबारियों को बिजनेस लोन दिया जाता है.

मुद्रा लोन योजना – PMMY योजना

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना चलाई जा रही है. मुद्रा लोन योजना में कारोबारियों को 10 लाख तक का बिजनेस लोन बिना कुछ गिरवी रखे दिया जाता है.

आपको बता दें की नया कारोबार शुर करने के लिए और पुराने कारोबार को बढ़ाने के लिए मुद्रा लोन 3 कैटेगरी में दिया जाता है.

  • शिशु लोन – 50 लाख तक
  • किशोर लोन – 50 लाख से 5 लाख तक
  • तरुण लोन – 5 लाख से 10 लाख तक

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का देश में योगदान

मुद्रा लोन योजना के जरिये देश में लघु उद्योग शुरु करने वाले उद्यमियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. पहले जहां लोगों के पास बिजनेस का आइडिया होते हुए भी लोग पैसों की कमी के कारण बिजनेस शुरु नही कर पाते थे वहीं अब लोग मुद्रा लोन के जरिये बड़ी संख्या में लघु उद्योग शुरु कर चुके है.

कारोबार की बढ़ोतरी की तस्दीक इस बात से होती है कि 2015 में शुरु हुई प्रधानमंत्री मुद्रा लोन स्कीम का प्रभाव अब पूरी तरह दिखने लगा है. देश में लघु उद्योगों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.

उद्योग के मामले में जहां बिहार को पिछड़ा राज्य माना जाता था वहीं 2017 के बाद से बिहार में लघु उद्योग की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. एमएसएमई मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देखें तो उद्योग आधार और मुद्रा लोन योजना के कारण लघु और मध्यम उद्योगों की संख्या में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.

बढ़ोतरी का यह आंकड़ा 2016 और उसके पिछले वर्षों के अनुसार है. वर्ष 2016 – 17 के दौरान रजिस्टर्ड सूक्ष्म, लघु, और मध्यम उद्योग (MSME) की कुल संख्या 4 करोड़ 53 लाख थी जो कि साल 2017 तक बढ़कर 6.33 करोड़ हो गई.

लघु उद्योग बढ़ने के पीछे रहस्य का रहस्य खुद कारोबारी ही बताते हैं कि जब से ऑनलाइन उद्योग रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरु हुई है और प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से बिजनेस लोन मिलना शुरु हुआ है तब से लघु उद्योग लगाना और चलाना काफी आसान हो गया है.

मुद्रा लोन योजना: देश में SME की संख्या में बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016 में पंजीकृत सूक्ष्म, लघु, और मध्यम उद्योग (MSME) की कुल संख्या 4 करोड़ 53 लाख थी वह साल 2017 में बढ़कर 6.33 करोड़ हो गई. यानी सीधे तौर पर 25 प्रतिशत के आसपास तक की बढ़ोतरी.

एमएसएमई मंत्रालय द्वारा 2017 – 18 में एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल में केन्द्र सरकार द्वारा स्माल, मीडियम एंटरप्राइज सेक्टर (SME) को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक उठाये गये है जिनकी वहज से देश में एसएमई सेक्टर तेजी से विकास कर रहा है. सकरात्मक क़दमों में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना (PMMY) प्रमुख है.

[block]3[/block]

किस राज्य में कितना बढ़ा लघु उद्योग

एमएसएमई मंत्रालय द्वारा जारी साल 2017-18 की रिपोर्ट के मुताबिक रजिस्टर्ड MSME की संख्‍या इस प्रकार है:

उत्‍तर प्रदेश : 89.99 लाख

पश्चिम बंगाल : 88.67 लाख

तमिलनाडु : 49.48 लाख

महाराष्‍ट्र : 47.78 लाख

कर्नाटक : 38.34 लाख

बिहार : 34.46 लाख

आंध्र प्रदेश : 33.87 लाख

गुजरात : 33.16 लाख

राजस्‍थान : 26.87 लाख

मध्‍य प्रदेश : 26.74 लाख

अन्‍य राज्‍य : 164.52 लाख

इस प्रकार देखें तो देश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग – MSME की कुल संख्या: 6.334 करोड़ है. (यह डाटा सरकार द्वारा 2017-18 में जारी किया गया है. क्या आप जानते हैं कि किस राज्य की मुद्रा लोन योजना सबसे अधिक लाभ मिला है?

इस राज्य को मुद्रा लोन योजना का सबसे अधिक लाभ मिला है

केन्द्र सरकार की सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योगों (MSME) के मंत्रालय की साल 2017-18 में द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक मुद्रा लोन योजना का सबसे अधिक लाभ बिहार राज्य को प्राप्त हुआ है. मजेदार बात यह है कि लघु उद्योग के मामले में बिहार राज्य अभी कुछ वर्षों तक टॉप 10 लघु उद्योग वाले राज्यों में भी नही गिना जाता था.

इस तरह देखें तो प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत देश में लघु और मध्यम उद्योग बड़ी संख्या में खुले हैं. इन उद्योगों का सबसे अधिक लाभ देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षेत्र में मिला है.