कोविड-18 यानी कोरोना महामारी के चलते देश में लॉकडाउन चल रहा है। लॉकडाउन 4 को 4 महीने से अधिक समय हो गया है। लॉकडाउन का सबसे बुरा अस्सर एमएसएमई कारोबार पर पड़ा है। विगत दिनों देश वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सितारमण जी ने क्रम से 5 दिनों तक राहत पैकेज की घोषणा की।

राहत पैकेज में बताया गया था कि अब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया जायेगा। एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव से कारोबारियों को कई लाभ मिलेगा। एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव करने के लिए सरकार के तरफ से आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि 1 जुलाई 2020 से एमएसएमई की पहचान नई परिभाषा से की जाएगी।

क्या है एमएसएमई के लिए आदेश?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 29 जून 2020 को दिए देश के नाम अपने संबोधन में बताया था कि देश धीरे – धीरे अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है। जून में अनलॉक 1 हुआ था। अनलॉक में बहुत सी चीजों के लिए छूट दी गई थी। ठीक इसी तरह से अब अनलॉक 2 होगा। अनलॉक 2 का आदेश 1 जुलाई 2020 से 31 जुलाई 2020 तक के लिए वैध होगा।

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अनलॉक 2 में ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की परिभाषा लागू कर दी जाएगी। ठीक यही हुआ भी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम मंत्रालय ने अधिसूचना जारी करके कहा है कि 1 जुलाई 2020 से सभी एमएसएमई की पहचान नई परिभाषा के अनुसार की जाएगी।

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इसके साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि अब अगर कोई व्यक्ति सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए आवेदन करता है तो उन्हें नई परिभाषा के अनुसार एमएसएमई का पंजीकरण प्रदान किया जायेगा। इसी के साथ आपको जानकारी के लिए बता दें कि 1 जुलाई 2020 से ही नये एमएसएमई के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरु हो गया है।

एमएसएमई की क्या है नई परिभाषा?

उद्योग पुरानी परिभाषा नई परिभाषा उद्योग श्रेणी
सूक्ष्म उद्योग 5 करोड़ से कम सालाना टर्नओवर वाले उद्योग सूक्ष्म यानी स्माल उधोग कहा जाता था। 1 करोड़ तक इन्वेस्टमेंट और 5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले उद्योग को सूक्ष्म उद्योग यानी माइक्रो इंटरप्राइ का दर्जा दिया गया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर।
लघु उद्योग 5 करोड़ से 75 करोड़ के बीच सालाना टर्नओवर वाले उद्योग को लघु उद्योग कहा जाता था। 10 करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट और 50 करोड़ के टर्नओवर वाले इंटरप्राइज को स्मॉल यूनिट (लघु उद्योग) माना गया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर।
मध्यम उद्योग 75 करोड़ से 250 करोड़ के बीच सालाना टर्नओवर वाले उद्योग को मध्यम उद्योग कहा जाता था। 30 करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट और 100 करोड़ के टर्नओवर वालों को मीडियम इंटरप्राइज (मध्यम उद्योग) माना गया है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर।
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एमएसएमई की परिभाषा के अनुसार पंजीकरण कराने के लिए क्या करना होगा?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई के नई परिभाषा के अनुसार पंजीकरण कराना बहुत आसान है। अब एमएसएमई का पंजीकरण घर बैठे ऑनलाइन हो सकेगा। एमएसएमई का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कोई कागजी दस्तावेज जमा नहीं करना होगा। सिर्फ ऑनलाइन तरीके से विवरण ही देना पर्याप्त होगा।

हालांकि, एमएसएमई रजिस्ट्रेशन कराने के लिए उद्यमी के पास आधार नंबर होना अनिवार्य है जिससे उद्यमी को उद्योग आधार मेमोरेंडम (यूएएम)जारी किया जा सके। आधार नंबर के अनुसार कोई भी व्यक्ति जोकि सूक्ष्म, लघु अथवा मध्यम उद्योग स्थापति करना चाहता है उसे बस सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम मंत्रालय के उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर ऑनलाइन तरीके एमएसएमई के लिए रजिस्ट्रेशन करना होगा।

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आपको जानकारी के लिए बता दें कि अब एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के लिए कोई कागजात नहीं देना है। और न ही किसी प्रकार की कोई रजिस्ट्रेशन फीस जमा करना है। पहले व्यक्ति को एमएसएमई की वेबसाइट पर अपना उद्योग को रजिस्टर्ड करना होगा इसके बाद एमएसएमई मंत्रालय द्वारा उद्यमी को स्थाई एमएसएमई पंजीकरण संख्या प्रदान की जाएगी। आपको जानना यह भी आवश्यक है कि एमएसएमई पंजीकरण संख्या उद्यमी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी।

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