पीएम नरेंद्र मोदी जी ने देश को 12 मई 2020 को एक बार फिर से संबोधित किया। अपने संबोधन में नरेंद्र मोदी जी देश को आत्मनिर्भर बनने की तरफ बढ़ने के लिए उत्साहित किया। इसी के साथ नरेंद्र मोदी जी द्वारा लॉकडाउन से उत्त्पन हुई आर्थिक समस्या से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ के भारी भरकम राहत पैकेज की घोषणा भी की हुई। इस राहत पैकेज को उन्होंने “आत्मनिर्भर“ पैकेज का नाम दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित राहत घोषणा “आत्मनिर्भर” पैकेज

  • अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए 20 लाख करोड़ का “आत्मनिर्भर“ पैकेज।
  • जीडीपी का 10 फीसदी के बराबर है यह पैकेज।
  • इस पैकेज में 1.7 लाख करोड़ रुपये का पहला पैकेज भी शामिल है।
  • लॉकडाउन-4 भी होगा लेकिन तमाम तरह की छूट के साथ।
  • आत्मनिर्भर भारत के पांच पिलर निम्न हैं: इकॉनमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्रॉफी और डिमांड।

नरेंद्र मोदी जी ने अपने संबोधन में यह बताया था कि 13 मई 2020 को वित्त मंत्री द्वारा इस राहत पैकेज पर विस्तार से बताया जायेगा। आज दिनांक 13 मई 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण और वित्त राज्य मंत्री जी ने सयुक्त प्रेस कांफ्रेस किया और राहत पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी दिया।

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राहत घोषणा पैकेज हाइलाइट्स

  • कुटीर लघु उद्योग के लिए 6 कदम उठाए जायेंगे।
  • ईपीएफ के लिए 2 कदम उठाए जायेंगे।
  • NBFC के लिए 2 कदम कदम उठाए जायेंगे।
  • एमएफआई के लिए 1 कदम उठाया जायेगा।
  • संकट में फंसे 2 लाख एमएसएमई को कर्ज के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री द्वारा घोषित राहत पैकेज में एमएसएमई के लिए क्या है?

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई के लिए बिना कुछ गिरवी रखे लोन दिए जाने की घोषणा की गई है। लोन की कुल रकम 3 लाख करोड़ बताया गया है। इसी के साथ यह भी बाताया गया है कि इससे 45 लाख एमएसएमई को फायदा पहुंचेगा।

यहां यह स्पष्ट कर देना उचित है कि किस एमएसएमई को कितना धन मिलेगा? यह नहीं बताया गया है। इसी के साथ यह स्पष्ट करना है कि स्पष्ट तौर से यह नहीं बताया गया है कि एमएसएमई को लोन सिर्फ बैंकों से मिलेगा या अन्य वित्तीय संस्थाएं जैसे एनबीएफसी से भी दिए जाने का निर्णय हुआ है।

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इसी के साथ एमएसएमई के लिए एक और अच्छी बात है कि उन एमएसएमई को भी सहज तरीके से लोन मिलेगा, जो एमएसएमई पिछले कई सालों से अपने लोन का भुगतान करने में असमर्थ रही हैं। इस तरह की एमएसएमई को बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा एनपीए की श्रेणी में रख दिया गया था।

जिन एमएसएमई द्वारा अपने पिछले लोन का भुगतान नहीं किया गया है और वह एनपीए की श्रेणी आ चुकी थी। अब उन एमएसएमई को संकट में फंसे होने की श्रेणी में रखा गया है। इस तरह की एमएसएमई संख्या तक़रीबन 2 लाख बताया गया है।

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में एनपीए श्रेणी वाली एमएसएमई को संकट में फंसे होने और स्ट्रेस्ड एमएसएमई की संज्ञा दिया है। इन सभी एमएसएमई को संकट से उबारने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

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वित्त मंत्री श्रीमती सीतारामण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा ने एमएसएमई के लिए जो कहा, जैसे कहा उसको यहां ठीक ज्यों का त्यों रखा जा रहा है:

  • MSME को 3 लाख करोड़ रुपये का लोन गारंटी फ्री यानी बिना कुछ गिरवी रखे मिलेगा। इससे 45 लाख एमएसएमई को इससे फायदा मिलेगा।
  • MSME को 4 साल के लिए लोन दिया जाएगा।
  • जिन एमएसएमई का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ होगा, उन्हें 25 करोड़ तक लोन मिल सकता है।
  • लोन लेने के पहले 12 महीने यानी 1 साल तक लोन का मूलधन नहीं चुकाना होगा।
  • जो लोन दिया जाएगा उसे चार सालों में चुकाना है। लोन लेने की स्कीम 31 अक्टूबर 2020 तक वैलिड है।
  • स्ट्रेस्ड (एनपीए कैटेगरी वाली) MSMEs के लिए 20 हजार करोड़ रुपये सब-ऑर्डिनेट डेट दिया जाएगा। इससे 2 लाख एमएसएमई को फायदा मिलेगा।
  • एमएसएमई के लिए 50 हजार करोड़ का फंड ऑफ फंड्स बनेगा।
  • फंड ऑफ फंड्स के जरिए MSMEs के लिए 50 हजार करोड़ रुपये इक्विटी इंफ्यूजन किया जाएगा।
  • एमएसएमई के लिए ई-मार्केट लिंकेज पर जोर दिया जाएगा। सरकार एमएसएमई के बाकी पेंमेंट 45 दिनों के अंदर करेगी।
  • MSME को e मार्केट से जोड़ा जाएगा।
  • एमएसएमई के लिए ई-मार्केट लिंकेज पर जोर दिया जाएगा।
  • सरकार एमएसएमई के बाकी पेंमेंट 45 दिनों के अंदर करेगी।
  • सरकार GSTMSE को 4 हजार करोड़ रुपये का मदद देगी। इससे GSTMSE बैंक को क्रेडट गारंटी देंगे।
  • MSMEs की परिभाषा बदलेगी।

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सरकार ने MSMEs की नई परिभाषा इस प्रकार रखा है

  • 1 करोड़ तक इन्वेस्टमेंट और 5 करोड़ तक के टर्नओवर को माइक्रो इंटरप्राइज (सूक्ष्म उद्योग) का दर्जा दिया जायेगा। यह दर्जा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर को समान रुप से दिया जायेगा।
  • 10 करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट और 50 करोड़ के टर्नओवर वाले इंटरप्राइज को स्मॉल यूनिट (लघु उद्योग) माना जाएगा। यह दर्जा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर को समान रुप से दिया जायेगा।
  • 30 करोड़ तक का निवेश और 100 करोड़ के टर्नओवर वालों को मीडियम इंटरप्राइज (मध्यम उद्योग) माना जाएगा। यह दर्जा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर को समान रुप से दिया जायेगा।

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एमएसएमई की परिभाषा बदलने यह फायदा होगा

अभी तक जो कंपनियाँ अपने कारोबार में नई पूँजी (नया इन्वेस्टमेंट करने) लगाने या टर्नओवर बढ़ाने से कतराती रहती थीं, या फिर वो काग़ज़ों पर आँकड़ा कम दिखाती थीं, अब उन्हें ऐसा करने की ज़रुरत नहीं रह जाएगी।

जब कारोबार में कैपिटल ज्यादा होगा तो टर्नओवर भी बढ़ाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। और इस बिजनेस के लिए बैंक या एनबीएफसी से बिजनेस लोन प्राप्त करने में आसानी होगी।

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एनबीएफसी, माइक्रोलोन्स, हाउसिंग लोन कंपनियों के लिए राहत पैकेज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने कहा कि ऐसा महसूस किया गया है कि एनबीएफसी सेक्टर की हालत सुधारने की जरूरत है। इसी को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा एनबीएफसी सेक्टर के लिए 75 हजार करोड़ रुपये की मदद दी जा रही है। एनबीएफसी सेक्टर को 75 हजार करोड़ रुपये की मदद दो तरीके दी जाएगी।

  1. सभी NBFC/ HFC/ MFI के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की विशेष लिक्विडिटी योजना शुरू की जाएगी।
  2. पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम 2.0 के जरिए 45 हजार करोड़ का लिक्विडिटी इंफ्यूजन किया जाएगा।

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30 हजार करोड़ रुपये की विशेष लिक्विडिटी योजना

नकदी संकट से जूझ रहीं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी), आवास वित्त निगमों (एचएफसी) और माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (एमएफआई) की मदद के लिए वित्त मंत्री द्वारा 30 हजार करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की गई है।

एनबीएससी के लिए राहत पैकेज

इस योजना में सरकार एनबीएफसी, एचएफसी और एमएफआई के निवेश ग्रेड के लोन पत्र (Debt Paper) खरीदेगी। ये ऋण पत्र सिर्फ हाइ क्वालिटी के नहीं होंगे इसमें कम रेटिंग वाली एनबीएफसी भी शामिल हैं। इन सभी लोन पत्र की पूरी गारंटी भारत सरकार लेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि जो एनबीएफसी एमएसएमई को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही हैं, उनकी रेटिंग खराब होने पर भी मदद किया जायेगा।

पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम 2.0 के जरिए 45 हजार करोड़ का लिक्विडिटी इंफ्यूजन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एनबीएफसी के लिए 45 हजार करोड़ रुपये की आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम की भी घोषणा हुई है। आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत एनबीएफसी को आरबीआई से मदद प्राप्त हो सकती है।

सरकार ने दिया एनबीएफसी को राहत पैकेज

अन्य महत्वपूर्ण राहत घोषणा

  • 8 हजार करोड़ रुपये टैक्स पेयर्स को रिफंड देकर राहत दी गई है। 14 लाख टैक्सपेयर्स को इसका फायदा भी मिला है।
  • 15,000 से कम वेतन वालों का पीएफ अगले 3 महीने तक सरकार देगी। 72 लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। 2,500 करोड़ का लाभ लोगों को इस योजना से मिलेगा।
  • टीडीएस और टीसीएस 31 मार्च में 2021 तक 25 फीसदी घटाया गया है।
  • इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख को 31 जुलाई 2020 और 31 अक्टूबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दिया गया है। वहीं टैक्स ऑडिट की समयसीमा को 30 सितंबर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 कर दिया गया है।
  • Discom में 90 हजार करोड़ की नकदी डालेंगे।
  • ईपीएफ में 2500 करोड़ रुपए का निवेश होगा।
  • EPF को लेकर पहले दी गई राहत जून, जुलाई और अगस्त में भी सरकार द्वारा दी जाएगी।
  • ईपीएफ में सरकारी मदद से 72 लाख कर्मचारियों को फायदा पहुंचेगा।
  • कर्मचारियों का 12 फीसदी की जगह 10 फीसदी ईपीएफ कटेगा, पीएसयू में 12 फीसदी ही कटेगा ईपीएफ।
  • ईपीएफ में कटौती से इम्प्लॉयर्स को 6800 करोड़ का फायदा।
  • सरकार की तरफ से सभी तरह का भुगतान समय पर होगा। यह कल से यानी 14 मई 2020 से 31 मार्च तक रहेगा लागू।
  • अब 200 करोड़ तक के सरकारी कामों के लिए ग्लोबर टेंडर नहीं होंगे।
  • ठेकेदारों के लिए बड़ी राहत का एलान करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी केंद्रीय एजेंसियां कॉन्ट्रैक्टर्स को बिना किसी शुल्क के काम पूरा करने के लिए छह माह का अतिरिक्त समय देंगी।
  • रियल एस्टेट डेवलपर्स को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने परियोजना पूरी करने और रजिस्ट्रेशन की समयसीमा को छह माह के लिए बढ़ा दिया है।

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