देश में मौजूद सभी सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्योगों को MSME कहा जाता है। MSME का इंग्लिश में Micro, Small and Medium Enterprises कहते हैं। MSME सेक्टर के कारोबार देश की आर्थिक व्यवस्था एवं रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम व्यापारों की देश में महत्वपूर्ण भागीदारी को देखते हुए और इस सेक्टर के कारोबारियों की सुविधा के लिए सरकार ने एक मंत्रालय का गठन किया है। जिसका नाम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय है। (Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) यह मंत्रालय उद्योगों को जरूरत पड़ने पर बिजनेस लोन और अन्य तरह की सुविधा मुहैया कराता है।

MSME मंत्रालय के एक रिपोर्ट के अनुसार देश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम क्षेत्र में 36 मिलियन यूनिट कार्य करती हैं। इन सभी यूनिट से 80 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार सुलभ होता है। यह सेक्टर देश में 6,000 से अधिक उत्पाद जीडीपी का लगभग 8% योगदान देता है और कुल विनिर्माण उत्पादन में 45% और देश से निर्यात में 40% योगदान देता है।

उद्योग आधार

उद्योग आधार केंद्र सरकार की एक योजना है। इस योजना का मकसद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बिजनेस लोन उपलब्ध कराना है। उद्योग आधार योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय (Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) द्वारा चलाई जा रही है।

क्या उद्योग आधार और MSME में कोई अंतर है या दोनों एक ही हैं?

अगर उद्योग आधार और MSME के अंतर या समानता की बात करें तो, दोनों एक दुसरे के पूरक है। मतलब न तो दोनों में कोई अंतर है और न ही दोनों अलग – अलग हैं। क्योंकि MSME केंद्र सरकार का एक मंत्रालय है और उद्योग आधार उस मंत्रालय की योजना।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही उद्योग आधार योजना को आधार योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना के अंतर्गत कारोबारी लघु उद्योगों से लेकर मध्यम उद्योगों का उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन (udyog aadhar registration) करा कर के सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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