सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई  विनिनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का एक महत्वपूर्ण अंग है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता है। हम लोग अपने दैनिक जीवन में जिन भी चीजों का उपयोग करते हैं, उन सभी चीजों की मैन्युफैक्चरिंग  किसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी/फैक्ट्री में होता है।

क्रेडिट लोन के लिए आवेदन करें

दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली चीजें से तात्पर्य है- मोटर, गाड़ी, साइकिल, किचन का सामान, खाने का सामान, पढ़ाई – लिखाई का सामान, ऑफिस में उपयोग होने वाले प्रोडक्ट, टेलीविजन, लाइट, पंखा, स्वीच बोर्ड, कूलर, एसी इत्यादि। इन सभी प्रोडक्ट का हमारे जीवन में दैनिक उपयोग होता है।

इसे भी जानिए: एमएसएमई किसे कहते है और MSME की परिभाषा क्या है?

जिस स्थान पर उपरोक्त प्रोडक्ट  का निर्माण किया जाता है, उस स्थान को मैन्युफैक्चरिंग हब कहते हैं। सरल भाषा में कहें तो मैन्युफैक्चरिंग कारखाना कहा जाता है। क्या आपको पता है कि उपरोक्त जरूरत की चीजें तैयार होने से पहले कैसी दिखती है? तैयार होने से पहले यह सभी चीजें अलग – अलग पुर्जों में विभाजित होता है। जहां पर पुर्जों का निर्माण किया जाता है, उसे एमएसएमई का मैन्युफैक्चरिंग उधम कहते हैं।

एमएसएमई का मैन्युफैक्चरिंग उद्यम

भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के आकार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में कुल 12 करोड़ से अधिक लोग एमएसएमई उद्योगों में काम करते हैं। भारत की कुल जीडीपी में अकेले एमएसएमई सेक्टर 29% की भागीदारी है। मतलब देश में रोजगार सृजन के साथ – साथ देश के विकास दर जीडीपी में भी एमएसएमई सेक्टर उल्लेखनीय भागीदारी निभा रहा है।

See also  ईमानदारी से income tax भरने वालों को सरकार देगी ईनाम, जानिए मिलेगीं कौन-कौन सी सुविधाएं

इसे भी जानिए: जिला उद्योग केंद्र लोन स्कीम क्या है और रजिस्ट्रेशन कैसे होता है?

मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में प्रोडक्ट का निर्माण कई तरह का होता है। हालांकि प्रोडक्ट निर्माण के तौर पर दो प्रकार प्रमुख है। पहला है कम्प्लीट प्रोडक्ट निर्माण करना और दूसरा है कल – पुर्जों का निर्माण करना। कम्प्लीट प्रोडक्ट निर्माण के तौर पर आप पलम्बिंग के लिए बनने वाले नलों, कपडें तैयार करने वाले कारखानों को देख सकते हैं।

वहीं कुल – पुर्जों के तौर पर उन पार्ट्स को बनाया जाता है जिन पार्ट्स की मांग बड़ी मैन्युफैक्चरिंग  उद्योगों द्वारा की जाती है। उदहारण के तौर पर: जब ऑफिस या घर में लाइटिंग इत्यादि का काम होता है तो लाईट की साज – सज्जा करने वाले प्रोडक्ट का निर्माण एमएसएमई के तहत आने वाले मैन्युफैक्चरिंग उद्यमों में किया जाता है।

मैन्युफैक्चरिंग उद्यमों में प्रोडक्ट का निर्माण कैसे किया जाता है?

आपने देखा होगा कि अख़बार के पन्ने बहुत पतले होते हैं। क्या अख़बार का पन्ना हाथ से पतला बनाना कभी संभव है? कभी नहीं। अख़बार का पन्ना भी एमएसएमई  के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में बनाया जाता है। अब सवाल है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्यगों में निर्माण कैसे किया जाता है? तो इस सवाल का उत्तर है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योगं में प्रोडक्ट का निर्माण मशीनों द्वारा किया जाता है।

मैन्युफैक्चरिंग उद्यमों के पास प्रोडक्ट का निर्माण करने के लिए कई तरह की मशीने होती हैं। इन मशीनों का संचालन करने वाले व्यक्ति को मशीन ऑपरेटर कहते हैं। प्रोडक्ट निर्माण की मशीनों को पहले इंजन से या हाथ चलाया जाता था लेकिन अब यह मशीनें बिजली से चलती हैं।

इसे भी जानिए: सर्विस एंटरप्राइज़ के लिए बिज़नेस लोन

समय के बदलाव के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मशीनों में भी बहुत बदलाव हुआ है। यहां भी टेक्नोलॉजी ने अपना कमाल दिखाना शुरु कर दिया है। मैन्युफैक्चरिंग मशीनों का टेक्नोलॉजी इन्बिल्ड होने के चलते कम समय में अधिक प्रोडक्ट का निर्माण होना अब आम हो गया है। इससे कर्मचारियों की थकान भी कम होती है।

See also  खुशखबरी: एमएसएमई कारोबारियों की सरकार के तरफ से मिली सौगात

मैन्युफैक्चरिंग मशीनों का मूल्य कितना होता है?

एक प्रसिद्ध कहावत है कि, ‘जितना दाम लगाया जाता है, उतना काम निकाला जाता है’ यह कहावत यहां एकदम सही बैठती है। क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग मशीनों का मूल्य अलग – अलग होता है। जैसी मशीन – वैसी कीमत। अथार्त अधिक क्षमता वाली मशीनों का मूल्य अधिक और कम क्षमता वाली मशीनों का मूल्य कम होता है।

उदाहारण के तौर पर देखे कि पेपर बैग बनाने वाली मशीन का मूल्य 5 लाख रुपये से शुरु होता है और 50 लाख रुपये तक जाता है। अब इस 5 लाख रुपये और 50 लाख रुपये के मध्य कई मशीने आती हैं। सभी मशीनों की कुछ खुबियां और कुछ कमियां होती है। जैसे – जैसे मशीन का मूल्य बढ़ता जाता है, वैसे – वैसे मशीन की कमियां कम होती जाती है।

इसे भी जानिए: मशीनरी लोन लेने के लिए होने चाहिए ये जरूरी डाक्यूमेंट्स

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मशीनों का निर्माण करते समय टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है। टेक्नोलॉजी का उपयोग मशीन के मूल्य के अनुसार ही किया जाता है। तो स्वाभाविक है कि 50 लाख रुपये में आने वाली मशीन से जितना उत्पादन प्राप्त होगा, उतना उत्पादन 5 लाख रुपये वाली मशीन से नहीं होगा।

कई बार ऐसा होता है कि कारोबारी चाहते हैं कि वह बड़ी मशीन खरीदें ताकि अधिक उत्पादन किया जा सके। लेकिन, बड़ी मशीन खरीदने के लिए उनके पास पर्याप्त धन नहीं होता है। जिसके चलते वह चाहते हुए भी बड़ी मशीन नहीं खरीद पाते हैं। तो ऐसी स्थिति में ऐसे कारोबारियों को चाहिए कि वह मशीनरी लोन की सहायता से बड़ी मशीन खरीद लें ताकि उनके बिजनेस के उत्पादन पर कोई फर्क न पड़े।

See also  राहत पैकेज पार्ट 3 “आत्मनिर्भर भारत” अभियान: एग्रीकल्चर, फिसरिज और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए घोषणा

आपको जानकारी के लिए बता दें कि ZipLoan कंपनी द्वारा 7.5 लाख रुपये तक का मशीनरी लोन और 3 लाख रुपये तक का लाइन ऑफ क्रेडिट सिर्फ 3 दिनो* में प्रदान किया जाता है।

अपना बिजनेस बढ़ाएं बिजनेस लोन के साथ

‘ZipLoan’ आरबीआई द्वारा पंजीकृत नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) है। ZipLoan  द्वारा एमएसएमई सेक्टर के सभी कारोबारियों को बिजनेस बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन, बिजनेस का वर्किंग कैपिटल मेंटेन रखने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन, लघु उद्योग में मशीन लगाने के लिए मशीनरी लोन इत्यादि बहुत आसान तरीके से प्रदान किया जाता है।

ZipLoan द्वारा 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन और 3 लाख रुये तक का लाइन ऑफ क्रेडिट सिर्फ 3 दिनों* में प्रदान किया जाता है।

बिजनस लोन की पात्रता

  • उद्योग 2 साल से अधिक का पुराना होना चाहिए।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर 10 लाख रुपये से अधिक होना चाहिए।
  • कारोबार के लिए आईटीआर फाइल होना चाहिए। पिछले फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये से अधिक का आईटीआर फाइल होना चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के कारोबारी के नाम पर या कारोबारी के किसी ब्लड रिलेटिव के नाम होना चाहिए।

मशीनरी लोन के लिए निम्नलिखित कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है

  • आधार कार्ड।
  • पैन कार्ड।
  • 9 महीने का बैंक स्टेटमेंट (करेंट अकाउंट)।
  • पिछले वित्तीय वर्ष में फाइल किये गये आईटीआर की कॉपी ।
  • घर या बिजनेस की जगह में से किसी एक का मालिकाना हक का प्रूफ। मालिकाना प्रूफ खुद। कारोबारी के नाम हो या कारोबारी के किसी ब्लड रिलेटिव के नाम पर होगा तो भी मान्य होता है।

अभी बिजनेस लोन पाए

Related Posts

MSME Full FormMSME RegistrationCGTMSE
MSME LoanVAT RegistrationUdyog Aadhaar
GST RegistrationStand Up India SchemeCGTMSE Fee
Shop LoanWhat is CGSTDownload GST Certificate
PM SVAnidhi SchemeCancelled ChequeUPI Full Form
Business Loan EligibilityGST Full FormE-Way Bill Unblocking
CIN NumberGST LoginUAN Number