कोरोना काल का यह दौर सभी के लिए संकट का दौर है। कोरोना से बचाव के लिए लगभग सभी देशों में लॉकडाउन किया थ। लॉकडाउन के चलते सभी कुछ एकाएक धड़ाम से रुक गया। और रुक गई लोगों की इनकम। इनकम रुकने की वजह से सबसे अधिक फानेंनशियल सेक्टर प्रभावित सेक्टर हुआ है। फानेंनशियल सेक्टर प्रभावित होने का सबसे बड़ा कारण लोन का वितरण है।

जब लॉकडाउन की घोषणा की गई तो उसी के साथ लोगों का फौरी राहत देने के लिए लोन की किश्तों पर मोरेटोरियम की सुविधा भी दी गई। मोरेटोरियम का सुविधा के कारण लोन लेने वाले लोगों और बिजनेस को तो लोन की ईएमआई चुकाने से कुछ समय के लिए राहत मिल गई। लेकिन लोन देने वाले बैंक और एनबीएफसी के लिए मार्केट से पैसा वापस न आने पर कई तरह की चुनौती खड़ी हो गई।

इसे भी जानिए: RBI की घोषणा से कारोबारियों को मिलेगा 3 प्रमुख लाभ

हालांकि अब लॉकडाउन को धीरे – धीरे समाप्त किया जा रहा है और देश में अन-लॉक की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही यह भी चुनौती है कि कोरोना का संकट पूरी तरह से टला नहीं है। तो लोग अभी भी लोन पर मोरेटोरियम की मांग करने लगे थे। हालांकि यह भी सत्य है कि अगर मोरेटोरियम का समय बढ़ाया गया तो इसका सीधे असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर होगा।

अर्थव्यवस्था का ध्यान रखते हुये और फाइनेंनशियल संस्थाओं का ध्यान रखते हुए केन्द्र सरकार की तरफ से लोन की मोरेटोरियम सुविधा को आगे न बढ़ाते हुए लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग की सुविधा दी गई है। लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग की सुविधा में फाइनेंनशियल संस्था और ग्राहक दोनो का लाभ होगा। आइये इस आर्टिकल में बताते हैं कि लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग क्या है और इसका लाभ किसे मिलेगा।

लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग क्या है? Loan Restructuring kya hai in hindi

रिस्‍ट्रक्‍चरिंग का अर्थ फिर से तैयार करना होता है। लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग का मतलब लोन की शर्तों को फिर से तैयार करना होता है। यानी लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग का सीधा-सादा मतलब लोन की मौजूदा शर्तों को बदलना है। लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग में ग्राहक को लोन चुकाने के लिए अधिक समय मिल जाता है और वित्तिय संस्थानों को ब्याज की रकम। इस तरह लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग सें दोनो का फायदा होता है।

लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग में क्या सुविधा मिलती है?

कोरोना की महामारी ने कई लोगों के सामने ऐसी ही स्थितियों को खड़ा कर दिया है. इससे लोगों की कर्ज लौटाने की क्षमता पर असर पड़ा है. हालांकि जिन लोगों की आमदनी लॉकडउन के कारण प्रभावित नहीं हुई है, उन्हें मोरेटोरियम या लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग का लाभ नहीं लेना चाहिए। लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग का विकल्‍प बिल्‍कुल अंत में चुना जाता है. ऐसा तब किया जाता है जब लगता है कि डिफॉल्‍टर होने का खतरा है। लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग में मुख्य रुप से दो सुविधा मिलती है।

  1. रिस्‍ट्रक्‍चरिंग में लोन चुकाने की अवधि बढ़ाई जा सकती है.
  2. लोन कंपनी या बैंक पहले से तय शर्तों के तहत ब्‍याज देनदारी की फ्रीक्‍वेंसी में बदलाव कर सकते हैं।

लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग को एक उदाहरण के रुप में समझिए

मान लेते हैं कि जतिन एक जनरल स्टोर चलाता है। जतिन ने अपने बिजनेस के लिए 5 लाख रुपया का बिजनेस लोन लिया है। 2 सालो का लिए। बिजनेस लोन की ईएमआई 25000 है। जतिन का जनरल स्टोर लॉकडाउन में भी चला। जिसके चलते जतिन की इनकम लॉकडाउन में भी प्रभावित नहीं हुई। इनकम प्रभावित न होने के चलते जतिन अपने बिजनेस लोन की ईएमआई असानी से जमा कर सकता है। इस तरह जतिन का बिजनेस लोन तय समय पर समाप्त हो जायेगा।

वहीं एक अन्य कारोबारी है, जिसका नाम राहुल है। राहुल का बिजनेस होटल का है। राहुल ने भी लिए 5 लाख रुपया का बिजनेस लोन लिया है। 2 सालो का लिए। बिजनेस लोन की ईएमआई 25000 है। राहुल  का जनरल स्टोर लॉकडाउन में नहीं चला। जिसके चलते राहुल की इनकम लॉकडाउन में भी प्रभावित हुई। इनकम प्रभावित होने के चलते राहुल अपने बिजनेस लोन की ईएमआई समय पर जमा नहीं कर सकता है।

इसे भी जानिए: बिजनेस बढ़ाने में बिजनेस लोन का योगदान क्या है? जानिए

जब राहुल बिजनेस लोन की ईएमआई 25000 समय पर जमा नहीं करेगा तो राहुल फाइनेंनशियल कंपनी की नजर में डिफॉल्‍टर हो जायगा। और राहुल पर कानूनी कार्यवाई होना शुरु हो जायेगी। लेकिन अब यहीं पर राहुल लोन रिस्‍ट्रक्‍चरिंग सुविधा का लाभ उठाकर अपने बिजनेल लोन का समय 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर लेता है तो राहुल का बिजनेस लोन की ईएमआई 12500 हो जायेगी। इस तरह राहुल के लिए अपने लोन का भुगतान करना आसान हो जायेगा।

बिजनेस लोन के लिए अप्लाई करें