इस वक्त पूरे विश्व में कोरोना महामारी छाई हुई है। अधिकतर देश कोविड-19 महामारी से बचने के लिए देश को पूरी तरफ से लॉकडाउन करने का विकल्प अपना रहे हैं। लेकिन, लॉकडाउन की अपनी चुनौतियां और समस्याएं हैं। किसी भी देश में एक साथ बहुत अधिक समय तक लॉकडाउन नहीं किया जा सकता है।

लॉकडाउन की वजह से संबंधित देश की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। लोग बेरोजगार हो सकते हैं और देश में भुखमरी की स्थिति आ सकती है। लॉकडाउन में भी जिस क्षेत्र का कार्य सतत तरीके से संचालित होता रहा, वह क्षेत्र है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग यानी मएसएमई इंडस्ट्री

एमएसएमई सेक्टर की विशेषता है कि कम लागत और सीमित संसाधन में भी बेहतर उत्पादन किया जा सकता है। अधिक लोगों को नौकरी पर रखा जा सकता है। भारत में कुल एमएसएमई की संख्या की अगर बात करें तो एमएसएमई मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट (2018-19) के मुताबिक देश में 6.34 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हैं। इन 6.34 करोड़ एमएसएमई में कार्यरत लोगों की संख्या 11 करोड़ से भी अधिक है। (यह आंकड़े एमएसएमई मिनिस्ट्री द्वारा जारी की जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 से लिया गया है)

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भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की अहमियत इसी तथ्य से समझी जा सकती है कि देश की जीडीपी में एमएसएमई क्षेत्र की हिस्सेदारी 30 फीसदी है। जीवीए (GVA) में इसकी हिस्सेदारी 31.8 फीसदी है। देश से होने वाला 48 फीसदी निर्यात यह क्षेत्र करता है। मतलब देश को आर्थिक तौर समृद्ध करने में एमएसएमई का अहम योगदान हैं।

हालांकि, एमएसएमई की समस्याएं किसी से छिपी हुई नहीं हैं। समय – समय पर तमाम एमएसएमई के बंद होने की खबरें तमाम अख़बारों की हेडिंग बनती रहती है। अब सरकार का प्रयास है कि एमएसएमई की हालत को सुधार जाए। एमएसएमई की हालत को सुधारने के लिए और नई एमएसएमई स्थापित करने के लिए भारत सरकार द्वारा माइक्रो फाइनेंस संस्था बनाने की घोषणा की गई है। आइये इस संस्था के बारें में विस्तार से समझते हैं।

क्या है माइक्रो फाइनेंस संस्था?

एमएसएमई को कोरोना संकट से उबारने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 30 हजार करोड़ रुपये का भारी – भरकर पैकेज घोषित किया गया है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित राहत पैकेज में यह कहा गया है कि एमएसएमई और रेहड़ी लगाने वाले दुकानदारों को सरकार द्वारा सस्ते दर पर लोन मुहैया कराया जायेगा। 30 हजार करोड़ रुपये का लोन पैकेज के जरिये एमएसएमई को लोन प्रदान किया जायेगा।

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इसके लिए सरकार ने माइक्रो फाइनेंस संस्था बनाई है। यह संस्था एमएसएमई के लोन आवेदनों पर विचार करेंगी और लोन के लिए अप्रूवल प्रदान करेंगी। इसके बाद बैंक, एनबीएफसी तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं से एमएसएमई कारोबारियों को लोन प्राप्त होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह लोन संस्था उन एमएसएमई को भी लोन के लिए पात्र मानेगी, जिन एमएसएमई का पिछला लोन चुकाया नहीं गया होगा या लोन की रकम एनपीए – नॉन प्रॉफिट ऐसेट में तब्दील ही गया होगा।

लघु उद्योग योजना 2020 के जरिये बिजनेस शुरु किया जा सकता है

केन्द्र सरकार द्वारा पहले से संचालित एमएसएमई का कल्याण करने के लिए फंड जारी किया गया है। इसके साथ ही या कारोबार शुरु करने के लिए भी लोन योजना शुरु की गई है। नया कारोबार शुरु करने के लिए लघु उद्योग योजना 2020 नाम से लोन योजना शुरु की गई है। इस योजना के तहत कारोबार करने की चाहत रखने वाले लोगों को 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का लोन बिना प्रॉपर्टी गिरवी रखे मिल सकेगा।

लघु उद्योग योजना 2020 के संचालन करने की जिम्मेदारी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक यानी सिडबी को दी गई है। सिडबी द्वारा कारोबार शुरु करने की चाहत रखने वालों को लोन देने के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) की स्थापना की गई है। इस ट्रस्ट के माध्यम से लघु उद्योग लगाने के लिए प्लांट स्थापित करने के लिए या जरूरी मशीनें खरीदने के लिए 25 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक लोन मिलेगा।

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सिडबी द्वारा स्थापित क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट द्वारा सूक्ष्म उद्योग यानी माइक्रो इंटरप्राइजेज के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन, लघु उद्योग यानी स्माल इंटरप्राइजेज के लिए 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का लोन और मध्यम उद्योग यानी मीडिल इंटरप्राइजेज के लिए 1 करोड़ से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का लोन प्रदान किया जायेगा।

एमएसएमई के लिए लोन योजनाएं

केन्द्र सरकार का प्रयास है कि देश में अधिक से अधिक संख्या में उद्योग स्थापित हो। इसके लिए सरकार हर स्तर पर तैयारी कर रही है। उद्योग स्थापित करने के लिए और उद्योग का संचालन करने के लिए आर्थिक मदद के तौर लोन मुहैया कराया जा रहा है।

उद्योगों के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल ‘उद्योग आधार’  का निर्माण किया गया है। उद्योगों के पंजीकरण में आने वाली लालफीताशाही को लगभग पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। सबकुछ ऑनलाइन कर दिया गया है। उद्योगों के लिए जो लोन योजना चलाई गई हैं, उनमे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना, क्रेडिट लिंक कैपिटल सब्सिडी स्कीम, एमएसएमई आदि शामिल है।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए आर्थिक मदद के लिए अबतक मुद्रा योजना सफलतम योजना बनकर सामने आई है। प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना 2015 में शुरु की गई थी। इस योजना के तहत एमएसएमई को 3 श्रेणी में 10 लाख रुपये तक का लोन बिना कुछ गिरवी रखे प्रदान किया जाता है।

बिजनेस बढ़ाने के लिए ZipLoan से मिलता है 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन

देश की प्रमुख नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी-एनबीएफसी ‘ZipLoan’ द्वारा एमएसएमई कारोबारियों को 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि ZipLoan से मिलने वाला बिजनेस लोन 6 महीने बाद प्री पेमेंट चार्जेस फ्री होता है। ZipLoan से बिजनेस लोन प्राप्त करने की निम्न पात्रता है:

  • बिजनेस 2 साल से अधिक पुराना होना चाहिए।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर 10 लाख रुपये से अधिक होना चाहिए।
  • बिजनेस के लिए आईटीआर फाइल होना चाहिए। पिछले फाइल की गई आईटीआर डेढ़ लाख रुपये से अधिक की होना चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद कारोबारी के नाम पर या ब्लड रिलेटिव के नाम पर होना चाहिए।

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