किसी भी देश का विकास और उत्थान उस देश की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की दशा एवं दिशा पर निर्भर करता है। भारत जब आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था तब भी भारत में लघु एवं कुटीर उद्योग की भूमिका अहम थी।

महात्मा गाँधी जी तो भारत के शैक्षिक व्यवस्था में ही कुटीर उद्योग शामिल करने के पक्ष में थे। यह तब  तत्कालीन जरूरत थी। वर्तमान में व्यावसायिक कुशलता प्राप्त करने के लिए और बेरोजगारी को दूर करने के लिए जरूरी है लघु एवं मध्यम उद्योग आवश्यक है। लघु उद्योग के लिए लोन की सुविधा इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रही है।

सूक्ष्म, लघु उद्योग क्या है

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (Micro, Small and medium enterprises) वे उद्योग हैं जिनमें काम करने वालों की संख्या एक सीमा से कम होती है तथा उनका वार्षिक उत्पादन (turnover) भी एक सीमा के अन्दर रहता है। किसी भी देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।

देश के विकास में छोटे लघु उद्योग का योगदान अहम् योगदान रहा है| कुटीर उद्योग आवश्यक है इससे बेरोजगारी पर नियंत्रण लगाया जा सकता है

भारी एवं लघु उद्योग में क्या अंतर है

लघु उद्योग’ (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ वे इकाइयां होती है जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया जाता है। कुटीर उद्योग बेरोजगारी दूर करने में सहायक है

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जबकि भारी या मयध्म उद्योग में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है और इसमें सूक्ष्म और  लघु उद्योग के अपेक्षाकृत जयदा श्रम शक्ति की ज़रूरत होती है |

लघु उद्योग के लिए लोन:  आर्थिक व्यवस्था में है लघु उद्योग का अहम योगदान

आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेज़ी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट (AI) का एकाधिकार होता जा रहा है। ऐसे में भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका के बारे में अधिक व्यापक और वास्तविक समझ होनी चाहिए।

उद्यमिता की मूल भावना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में निहित है। उद्यमिता अक्सर ज़मीनी स्तर पर अंकुरित होती है और लोगों की रोजगार आकांक्षाओं को साकार करती है इसलिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के बारे में कोई भी चर्चा, आमतौर पर आर्थिक वृद्धि और विशेष रूप से रोजगार संवर्धन के एजेंडा के अंग के रूप में ही किए जाने की ज़रूरत है।

लघु उद्योग के लिए लोन: भारत में उद्यमिता का मौजूदा परिदृश्य

भारत में दो भारत बसता है। एक भारत शहरी है तो दूसरा भारत गाँवों में निवास करता है। मजेदार बात यह है की शहरों में बसने वाले एक तिहाई लोग ग्रामीण एरिया से ही गए हुए हैं। रोचक तथ्य यह है की भारत के शहरों और ग्रामीण दोनों जगहों पर भी अमीर और गरीब दोनों रहते हैं जिनका आमदनी के अवसरों के बारे में अपना- अपना अलग नज़रिया और तरीका है। स्व रोजगार में स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने की क्षमता है।

लघु उद्योग स्वरोजगार हब बन चुका है

वर्तमान यानी 2019 में देखे तो कारोबार के हर क्षेत्र में हब (गढ़) बनाकर काम करने का चलन शुरू हो गया है जिससे हबोनॉमिक्स की नई धारणा का उदय हुआ है। स्वाधीनता के बाद से ही भारत में औद्योगिक विकास की अवधारणा दोमुखी दृष्टिकोण पर आधारित रही है: 1) रोजग़ार के अवसर दिलाना और 2) इन अवसरों को जहां तक संभव हो क्षेत्रीय विकास के साधन के तौर पर गांवों तक ले जाना।

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ऐसे दृष्टिकोण ने बड़ी संख्या में अर्ध-शहरी केंद्रों के पनपने में उल्लेखनीय योगदान दिया है जिससे देश में सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यमों को फलने-फूलने का मौका मिला है। मेक इन इंडिया’ राष्ट्रीय अभियान के रूप में की गई बेहद प्रत्यक्ष पहल है जिसे दो स्तरों पर अपनाए जाने की ज़रूरत है।

लघु उद्योग के लिए लोन प्राप्त करने में चुनौती और अवसर

बिजनेस लोन वर्तमान में सबसे अधिक चलन में है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लघु उद्योग के लिए लोन सुविधा इतनी आसान कर दिया गया है की जो चुनौती एक दशक पहले थी अब वह सभी समस्याएँ समाप्त हो गई हैं। अगर कार्यक्षेत्र की चुनौतियों की बात करें तो यह निम्न हैं:

  • कुशल कामगार की आवश्यकता
  • नियमित तौर पर आर्थिक सहायता की जरूरत
  • लंबी कागज़ी प्रक्रिया
  • सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही
  • संसाधन उपलब्ध न होना (रिसोर्स गैप)

इन सभी चुनौतियों के होते हुए भी लघु उद्योग जिस गति से प्रगति कर रहा है वह काबिलेतारीफ है। हालांकि नीति नियोजन के तहत उन क्षेत्रों में केंद्रीकृत संस्थागत ढांचे और नीतिगत तंत्र स्थापित करना आवश्यक था जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाले निर्णय लिए जाने थे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम  उद्योग लोगों के जीवन में आजीविका के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र में अवसर

लघु उद्योग क्षेत्र में वर्तमान समय में अवसर ही अवसर है। अवसर कई तरह से है, क्योंकि लघु उद्योग शुरु करने के लिए बहुत अधिक जगह या बहुत अधिक पूंजी (पैसों) आवश्यकता की जरूरत नहीं पड़ती है। केंद्र सरकार द्वारा अब लघु उद्योग को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए कई तरह की योजना चलाई जा रही हैं। मुद्रा योजना प्रमुख है

महिला कारोबारियों के लिए बिजनेस लोन की योजनाए

मुद्रा योजना चलाने के पीछे सरकार का उद्देश्य ही लघु उद्योग के लिए लोन प्रदान करना है। मुद्रा योजना में लघु उद्योग के लिए लोन की कुल 3 कैटेगरी है।

  • शिशु लोन
  • किशोर लोन
  • तरुण लोन
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खास बात यह की मुद्रा योजना में लघु उद्योग के लिए लोन सिर्फ कारोबार शुरु करने के लिए ही नहीं बल्कि पुराने बिजनेस का विस्तार करने के लिए भी बिजनेस लोन की सुविधा प्रदान की जाती है।

निष्कर्ष रुप में देखे तो राष्ट्रीय आर्थिक विकास में लघु उद्योगों का अहम योगदान है। आर्थिक विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों  की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक विकास में लघु उद्योग की भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता है।

लघु उद्योग के लिए लोन: ZipLoan से मिलेगा  सिर्फ 3 दिन* में

ZipLoan’ फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। ‘कंपनी द्वारा सूक्ष्म, लघु उद्योग के लिए लोन दिया जाता है। कारोबार बढ़ाने के लिए बेहद कम शर्तों पर 1 से 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन पाने की शर्ते बहुत कम हैं 

  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 10 लाख से अधिक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के कई फायदे है

  • बिजनेस लोन की रकम अप्लाई करने के सिर्फ 3 दिन* के भीतर मिल जाती है। (यह सुविधा जरुरी कागजी दस्तावेजों को उपलब्ध रहने पर मिलती है)
  • लोन घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है।
  • बिजनेस लोन की रकम 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री है।
  • लोन की रकम 12 से लेकर 36 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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