बैंक नॉमिनी का मतलब होता है: जब कोई व्यक्ति किसी बैंक में कोई बड़ी रकम जमा करता है या कोई कीमती वस्तु बैंक के लॉकर में जमा करता है। व्यक्ति के अनुपस्थिति में नॉमिनी जमा पैसों, बैंक लॉकर में जमा वस्तु को प्राप्त कर सके।

यानी नॉमिनी व्यक्ति को यह सुविधा दी जाती है की वह अपने संबंधी, परीचित की अनुपस्थिति में बैंक में जमा पैसा, लॉकर में जमा वस्तु को प्राप्त कर सकता है। बशर्ते बैंक ग्राहक द्वारा किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाया गया हो।

नॉमिनी बनाने के पीछे का तर्क यह होता है की ग्राहक द्वारा जमा पैसा या लॉकर में रखी गई वस्तु सुरक्षित हो और उसको प्राप्त करना सुनिश्चित हो सके। ऐसे में सवाल है की क्या जिस व्यक्ति को नॉमिनी बनाया गया है वह व्यक्ति बैंक लॉकर का इस्तेमाल कर सकता है या नहीं कर सकता है?

बैंक लॉकर क्या होता है?

सभी बैंकों के पास बैंक लॉकर की सुविधा उपलब्ध होती है। बैंक लॉकर एक पैसे देकर खरीदी जाने वाली सर्विस है। इसमें व्यक्ति बैंक को इस बात के लिए आवेदन देता है की व्यक्ति को अपना कीमती सामान बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखना है।

बैंक आवेदन मिलने के बाद यह जांच करते हैं की उनके यहां वर्तमान में क्या कोई लॉकर खाली है या नहीं खाली है। अगर लॉकर खाली होता है तो उसे लॉकर के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को एलाट कर दिया जाता है। हर लॉकर की दो चाबी होती है। एक चाबी ग्राहक के पास होती है। दूसरी चाबी बैंक के पास होती है

जिस व्यक्ति को लॉकर एलाट किया जाता है वह व्यक्ति लॉकर में अपनी कीमती सामान रख सकते हैं। बदले में बैंक को लॉकर फीस हर साल देना होता है। बैंक लॉकर की सुविधा हर भारतीय नागरिक को मिल सकती है। बैंक लॉकर सुविधा लेने के लिए बैंक का ग्राहक होना जरूरी नहीं होता है।

बैंक लॉकर में सोने, चाँदी, हीरे इत्यादि के बने गहने और जरूरी कागजात जैसे प्रॉपर्टी, वसीयत के पेपर रखें जाते हैं। बैंक लॉकर लेने वाले व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति को नॉमिनी बनाने की सुविधा दी जाती है। नॉमिनी व्यक्ति लॉकर वाले व्यक्ति के अनुपस्थिति में लॉकर वाली वस्तु प्राप्त कर सकता है।

नॉमिनी क्या होता है और कौन बन सकता है?

नॉमिनी के बारे में सबसे अधिक जो प्रचलित धारणा होती है वह होती है नॉमिनी व्यक्ति मृतक व्यक्ति का लीगल वारिस होता है। यह पूरी तरह न तो सच है और न ही पूरी तरह गलत है।

नॉमिनी के बारे में पूरी सच्चाई यह है नॉमिनी का अधिकार मृतक की संपत्ति / लॉकर में रखी गई वस्तु को अपने अधिकार और विवेक क्षेत्र में लाने तक का होता है। नॉमिनी की हैसियत से प्राप्त हुई संपत्ति / लॉकर में रखी गई वस्तु का वह ट्रस्टी होता है।

अगर मृतक व्यक्ति का कोई उत्तराधिकारी है तो नॉमिनी की जिम्मेदारी है वह उतराधिकारियों के सहमति से प्राप्त संपति / लॉकर से प्राप्त वस्तु का बंटवारा करें या अपने पास रखे।

कौन बन सकता है बैंक लॉकर नॉमिनी

नॉमिनी कोई भी बन सकता है। नॉमिनी बनने के लिए कोई निर्धारित योग्यता तय नहीं की गई है। किसे नॉमिनी बनाना है यह पूरी तरह उस व्यक्ति विवेकाधिकार पर निर्भर करता है जो व्यक्ति बैंक के लॉकर में कोई वस्तु रखना चाहता है।

नॉमिनी बनाने का फायदा क्या है?

कोई व्यक्ति किसी बैंक के लॉकर में कोई वस्तु रखना है और वह किसी को नॉमिनी नहीं बनाता है तो अगर किसी अनहोनी में व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके द्वारा लॉकर में रखी गई वस्तु किसी को भी नहीं मिलेगी। यानी वह वस्तु एक निश्चित समय के बाद संबंधित बैंक का ऐसेट बन जायगी।

जबकि अगर कोई व्यक्ति उस वस्तु का नॉमिनी होता है तो संबंधित व्यक्ति को लॉकर में रखी वस्तु को प्राप्त करने का अधिकार मिल जायेगा। वस्तु प्राप्त करने का यह क़ानूनी अधिकार होता है। नॉमिनी को वस्तु देने से बैंक भी मना नहीं कर सकते हैं।

इसका एक बड़ा फायदा है। अगर किसी अनहोनी के चलते लॉकर खुलवाने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो नॉमिनी इसका इस्तेमाल कर सकता है। लॉकर का उपयोग करने के लिए यह प्रक्रिया अपनानी होगी।

क्या नॉमिनी बैंक लॉकर का इस्तेमाल कर सकता है?

हां नॉमिनी बैंक लॉकर का इस्तेमाल कर सकता है। अगर नॉमिनी बैंक लॉकर का इस्तेमाल करना चाहता है तब उसे संबंधित बैंक में लॉकर का इस्तेमाल करने के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ कुछ कागजात भी अटैच करना होता है। कागजातों की लिस्ट ये है:

  • लॉकर खुलवाने वाले व्यक्ति के मृत्यु प्रमाणपत्र की कॉपी
  • केवाईसी गाइडलाइंस के अनुसार नॉमिनी का फोटो पहचान पत्र
  • फॉर्म के अनुसार एकनॉलेजमेंट

नॉमिनी द्वारा बैंक लॉकर इस्तेमाल की प्रक्रिया क्या है?

नॉमिनी को लॉकर से चीजें निकालने की अनुमति देने से पहले बैंक द्वारा लॉकर कस्टोडियन वस्तुओं की इंवेंट्री बनाया जाता है। यह इंवेंट्री नॉमिनी या जीवित होल्डरों की मौजूदगी में बनाई जाती है। इस दौरान दूसरे गवाह भी मौजूद होते हैं।

आपको जानकारी के लिए बता दें की बैंक लॉकर पर इंश्योरेंस भी किया जाता है। बैंक लॉकर सुविधा लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना अनिवार्य होता है।

बैंक लॉकर सुविधा के बारें में जरूरी जानकारी

  • बैंक लॉकर की सुविधा सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंकों में मौजूद होती है।
  • लॉकर सुविधा का लाभ उठाने के लिए हर साल मेंटेनेस फीस देना होता है। सरकारी बैंक एक लॉकर के लिए सालाना 1 हजार से 7 हजार रुपये के बीच फीस लेते हैं। प्राइवेट बैंक 3 हजार रुपये से 20 हजार रुपये के बीच फीस लेते हैं। फीस की रकम इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप जिस शाखा में लॉकर लेना चाहते हैं, वह कहां स्थित है और किस साइज का लॉकर लेना चाहते हैं।
  • बैंक की लॉकर सुविधा लेने के लिए बैंक में अकाउंट होना जरूरी नहीं है। लेकिन, बैंक वाले अधिकतर चाहते हैं की जो व्यक्ति लॉकर सुविधा लेना चाहता है वह उनके यहां अकाउंट ओपन करें। अगर आप अकाउंट ओपन नहीं करना चाहते हैं तो बैंक वाले जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं।
  • लॉकर में रखी गई वस्तु 90% सुरक्षित होती है लेकिन 10% असुरक्षित भी होती है। इस बात ध्यान रखना चाहिए।