भारत जैसे बड़ी जनसँख्या वाले देश में MSME बिजनेस का लोगों को रोजगार प्रदान करने में बहुत अहम योगदान है। इस तरह के कारोबार की सबसे अच्छी बात होती है कि इनको कम जगह और कम पैसों में शुरू किया जा सकता है! और, अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता हैं।

इसके लिए सरकार का बकायदा मंत्रालय काम करता है। एमएसएमई को इंग्लिश में माइक्रो, स्माल, एंड मीडियम एंटरप्राइजेज जिसे हिंदी में हम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के नाम से जानते हैं।

जब नरेन्द्र मोदी पहली बार जब 2014 में प्रधानमंत्री बने थे तभी से इस सेक्टर के अधिक से अधिक सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाने लगी। इस क्षेत्र को नियंत्रित और उसे सुविधाएं प्रदान करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय काम कर रहा है। इसीलिए प्रधानमंत्री लोन योजना की शुरुआत की गई|

MSME में कितने तरह के बिजनेस? 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग में कुल 5 करोड़ तक इन्वेस्ट होने वाले कारोबार आते हैं। इसको तीन कैटेगरी में में विभाजित किया गया है, यह इस तरह है:

  • माइक्रो या सूक्ष्म उद्योग: यह सबसे छोटी इकाई है। इसमें वह सभी उद्योग आते हैं जिनमे कारोबार के लगने वाले मशीनरी, कच्चे माल में कुल 25 करोड़ तक इन्वेस्ट करना पड़े। अगर बिजनेस सर्विस सेक्टर का है तो इसमें अधिकतम 10 लाख तक इन्वेस्ट करना पड़े, वह माइक्रो या सूक्ष्म बिजनेस में आते हैं। जैसे मोमबत्ती बनाने का बिजनेस।

  • लघु उद्योग या स्माल बिजनेस: बिजनेस का यह प्रकार माइक्रो और मीडियम साइज के बीच का बिजनेस है। इस तरह के बिजनेस में सभी खर्च मिलाकर यानी मशीनरी, कारीगरों के सैलरी इत्यादि में 25 लाख से 5 करोड़ का इन्वेस्ट होता हो। लघु उद्योग में सर्विस बिजनेस के लिए इन्वेस्ट की सीमा 10 लाख से 2 करोड़ तक की है।

  • माध्यम उद्योग या मीडियम बिजनेस: MSME सेक्टर में यह सबसे बड़ा बिजनेस है। इस उद्योग में मशीनरी, कारीगरों के सैलरी, और बाकि खर्चों को मिलाकर 5 करोड़ से 10 करोड़ का इन्वेस्ट करने की सीमा होती है।

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देश में सूक्ष्म, लघु एवं मीडियम व्यवसाय का महत्त्व

भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देश में रोजगार की सबसे बड़ी समस्या है। ऐसा कभी संभव नही हो सकता कि सभी नागरिकों को नौकरी मिल जाए। लेकिन परिवार चलाने के लिए सभी को रोजगार के साधन की जरूरत तो होती है। इस कंडीशन में रोजगार का सबसे अच्छा माध्यम बनते हैं माइक्रो, स्माल और मीडियम साइज के बिजनेस। इसमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार तो मिलता ही है, इसके साथ ही भारत देश के अर्थव्यवस्था में भी बहुत मददगार बनते हैं। कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स इस तरह है:

  • भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का टोटल इम्पोर्ट में 45% हिस्सा है।
  • देश की बड़ी जनसंख्या को रोजगार मिला हुआ है।
  • देश के नागरिकों के जरूरत के सामान को यह सेक्टर करीब 60 प्रतिशत पूरा करता है।

क्या MSME बिजनेस के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है

एमएसएमई यानी सूक्ष्म, स्माल और मीडियम इन तीनों के श्रेणियों में किसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए 2006 में बने सूक्ष्म, लघु और मीडियम उद्योग अधिनियम के अनुसार रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन कराने पर ही सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा।

MSME Registration कैसे करें और क्या है इसका लाभ, जानिए

एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी कागजी दस्तावेज (MSME Registration Requirements Documents)

  • पैन कार्ड
  • पहचान पत्र (आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि इनमे से कोई एक)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • अगर आप किराये के भवन पर उद्योग करते है तो किराया रेंट एग्रीमेंट को कॉपी
  • खुद के भवन पर बिजनेस है तो अपने भवन के कागजात की कॉपी
  • एफिडेविट
  • घोषणा दस्तावेज
  • एनओसी

Kya Msme business ke liye registration jruri hai

एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के लाभ

  • बैंको से लाभ: अगर आपना बिजनेस MSME मंत्रालय से रजिस्टर्ड होता हैं तो सभी बैंक बिजनेस लोन के लिए प्राथमिकता पर रखते हैं। बिजनेस लोन की इंटरेस्ट रेट बाकि बिजनेस लोन के तुलना में कम होती है।

  • टैक्स बेनिफिट्स: रजिस्टर्ड एमएसएमई को सरकार एक्साईज टैक्स में छूट प्रदान करती है। साथ ही, कई तरह की सब्सिडी भी दी जाती है।