एमएसएमई लोन क्या होता है? यह सवाल अधिकतर कारोबारियों का होता है। इस सवाल का उत्तर बहुत ही सिंपल है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) को दिया जाने वाला बिजनेस लोन एमएसएमई लोन कहा जाता है।

एमएसएमई उद्योग (MSME Udhyog)

आइए एक नजर डाल लेते है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (MSME) उद्योग का निर्धारण कैसे होता है? केंद्र सरकार द्वारा 2006 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम विकास नीति 2006 प्रस्तुत किया गया। इस नीति में किसी भी कारोबार हो रहे कुल सालना टर्नओवर के आधार पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग का निर्धारण किया गया है।

MSMED 2006 के अनुसार उद्योगों का दो कैटेगरी में विभाजन किया गया है- पहली कैटेगरी को मैनुफैक्चरिंग और दूसरी कैटेगरी को सर्विस यानी सेवा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। माइक्रो (सूक्ष्म) उद्योग, लघु और मध्यम उद्योग के निर्धारण में भी उद्योग में लगने वाले उपकरण, मशीनरी की लागत के अनुसार परिभाषा तय की गई है।

इन सब के बीच 2018 में तत्कालीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा MSME की परिभाषा में एक बार फिर से बदलाव करने का विधेयक सदन में प्रस्तुत किया गया और विधेयक पारित भी हो गया।

2018 में प्रस्तुत विधेयक के अनुसार उद्योगों में लगने वाली मशीनरी और अन्य उपकरण की लागत के अनुसार परिभाषा न रखकर इन उद्योगों में वार्षिक टर्नओवर के आधार पर नामकरण करने का प्रस्ताव पारित हुआ।

2018 में बनी नई परिभाषा इस प्रकार है:

माइक्रो यानी सूक्ष्म उद्योग

  • जिन उद्योगों में सालाना 5 करोड़ तक का टर्नओवर होता हो उन्हें माइक्रो यानी सूक्ष्म उद्योग के नाम से जाना जायेगा।

लघु यानी स्माल उद्योग

  • जिन उद्योगों में सालाना 5 करोड़ से 75 करोड़ के बीच टर्नओवर होता हो उन्हें लघु यानी स्माल उद्योग के नाम से जाना जायेगा।
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मीडियम यानी मध्यम उद्योग

  • जिन उद्योगों का सालाना टर्नओवर 75 से 250 करोड़ हो उन्हें मीडियम यानी मध्यम उद्योग के नाम से जाना जायेगा।

इस परिभाषा अपनाने के पीछे एमएसएमई मंत्रालय का तर्क था कि इससे अपने देश के कारोबार को वैश्विक स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी। क्योंकि, अधिकतर देशों में उद्योगों की परिभाषा सालाना टर्नओवर के अनुसार तय की जाती है।

एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव का दूसरा महत्वपूर्ण कारण है जीएसटी (GST) यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स। पहले टैक्स की प्रक्रिया अलग- अलग थी तो टैक्स कई स्तर पर वसूल किया जाता था। लेकिन, जीएसटी आने के बाद टैक्स एक केंद्रीकृत प्रक्रिया गया है। इस लिहाज से नई परिभाषा से उद्योगों को पहचानना और टैक्स के लिए व्यवस्थित करना आसान हो जाएगा।

एमएसएमई की नई परिभाषा से उद्योगों का भी लाभ

MSME के लिए बनाई गई टर्नओवर के आधार पर परिभाषा से उद्योगों का भी लाभ है। जहां उद्योगों की सरकारी सब्सिडी लेने में मदद मिलेगी वहीं बैंक से ऋण प्राप्त करने में भी आसानी होगी। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार बैंकों के लिए MSME सेक्टर प्राथमिकता के तहत आता है। जिसका मतलब है कि एमएसएमई को बिजनेस लोन प्राथमिकता के आधार पर दिया जायेगा।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को प्राथमिकता के आधार पर रखने के कई कारण हैं जैसे- इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है, लोगों को अपने क्षेत्र में ही जीवनयापन की व्यवस्था हो जाती है तो उन्हें रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ता है। एमएसएमई उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है और देश की जीडीपी में बेहतर योगदान देते हैं।

अभी तक आपने जाना कि एमएसएमई क्या है और इसके कितने प्रकार है। MSME की परिभाषा क्या है। अब मूल प्रश्न पर आते है- MSME लोन क्या है?

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एमएसएमई लोन क्या है?

लोन शब्द आते ही दिमाग में यह ख्याल आता है कि किसी के द्वारा धन उधार लेना। कुछ हद तक यह ठीक भी है। बिजनेस लोन मुख्य रुप से 2 प्रकार के होते हैं:

  • सिक्योर्ड बिजनेस लोन
  • अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन

सिक्योर्ड बिजनेस लोन – एमएसएमई लोन 

जब कारोबारी अपनी कोई प्रॉपर्टी किसी बैंक या कंपनी के यहां गिरवी रखकर लोन लेता है तो वह सिक्योर्ड बिजनेस कहलाता है। इस तरह का लोन लेने के लिए आपके पास कुछ ऐसी प्रॉपर्टी होनी चाहिए जिसके वैल्यू आपके द्वारा मांगे गए लोन की कीमत के बराबर हो। तभी आपको लोन मिल सकता है।

प्रॉपर्टी गिरवी रखवाने के पीछे यह तर्क होता है कि जब लोन लेने वाला व्यक्ति डिफाल्टर निकल जाए यानी लोन न चुकाएं तो उसकी प्रॉपर्टी को नीलामी कर लोन की कीमत वसूल कर ली जाएगी। इस तरह बैंक या लोन देने कंपनी अपने धन की सुरक्षा के लिए प्रॉपर्टी गिरवी रखवाते हैं।

एमएसएमई लोन क्या होता है और किसे मिलता है

अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन – एमएसएमई लोन

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो जाता है। यह अनसिक्योर्ड है यानी इस तरह का लोन लेने के लिए प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखना होता है। इस प्रकार का लोन अधिकतर नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियां (एनबीएफसी) प्रदान करती है। सरकार स्तर पर एमएसएमई के लिए योजना के द्वारा बैंकों के जरिए अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन भी दिया जाता है।

अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन पाने में क्रेडिट स्कोर (सिबिल स्कोर) की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। एनबीएफसी कंपनियां बिना प्रॉपर्टी गिरवी रखे बिजनेस लोन देने में सिबिल स्कोर की जांच करती है और क्रेडिट स्कोर ठीक हुआ तो बिजनेस लोन बहुत कम कागजी दस्तावेजों को प्रदान कर देती है।

कारोबारियों के लिए अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन वरदान है

बिजनेस में कब क्या मशीनरी खरीदना पड़ सकता है, कब क्या जरूरत पड़ सकती है कहा नहीं जा सकता है। जब जरूरत पड़ती है तो उसे पूरा करना भी होता है, अन्यथा कारोबार में घाटा हो सकता है। ऐसी स्थिति में जरूरी नहीं कि कारोबारी के पास इक्कठा पैसा हो। पैसा होता है लेकिन कभी- कभी वह मार्केट में लगा होता है जिससे पैसा होते हुए भी धन हाथ में नहीं होता। इस स्थिति में काम आता है अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन यानी बिना कुछ गिरवी रखे बिजनेस लोन।

सिक्योर्ड ओर अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन में अंतर क्या है?

अपने देश में कारोबारियों की कई कैटेगरी है। इसके हिसाब से देखा जाए तो सभी कारोबारियों के पास उतनी प्रापर्टी नहीं होती कि वह उसे गिरवी रखकर लोन ले सके। कुछ कारोबारी अपनी प्रापर्टी गिरवी रखना भी नहीं चाहते है। तो इन सभी बातों का समाधान है अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन। आइए जानते हैं कहां से मिलता है अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन।

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ZipLoan से मिलता 3 दिन में एमएसएमई लोन

ZipLoan’ फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। ‘कंपनी द्वारा सूक्ष्म, लघु उद्योग (एमएसएमई) को से 5 लाख तक का अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन में प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन पाने की शर्ते बहुत कम हैं 

  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख से अधिक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के कई फायदे है

  • बिजनेस लोन की रकम अप्लाई करने के सिर्फ 3 दिन के भीतर मिल जाती है। (यह सुविधा जरुरी कागजी दस्तावेजों को उपलब्ध रहने पर मिलती है)
  • लोन घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है।
  • बिजनेस लोन की रकम 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री है।
  • लोन की रकम 12 से लेकर 24 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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