देश की हालत किसी से छिपी नहीं है। देश इस समय मेडिकल इमरजेंसी के दौर में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 14 अप्रैल 2020 तक देश को लॉकडाउन करने का आदेश दिया गया है।

लॉकडाउन की स्थिति में जरूरी चीजों का प्रोडक्ट्शन और सप्लाई छोड़कर सब कुछ ठप पड़ा है। ऐसे में उन लोगों के माथे पर चिंता की लकीरे देखने को मिल रही हैं, जिनका किसी प्रकार का लोन चल रहा है। लोगों की चिंता होना स्वाभाविक भी है।

जिन लोगों का लोन चल रहा है, उनको इस बात की चिंता है की लॉकडाउन की स्थिति में किसी भी तरह का बिजनेस हुआ नहीं, इनकम आई नहीं तो वह लोन की EMI (ईएमआई) कैसे जमा करेंगे?

केन्द्र सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए, इस मुद्दे का बहुत ही शानदार हल निकाल लिया है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों को एक सुझाव/आदेश दिया है। इस सुझाव/आदेश के तहत बैंको और एनबीएफसी से जून 2020 तक EMI नहीं लेने की बात कही गई है।

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जो लोग यह जानना चाहते हैं की क्या उनको अगले महीने की EMI जमा करना है, तो उनके लिए खबर है कि, ‘नहीं, जून 2020 तक किसी भी लोन की EMI नहीं जमा होगी’ हालांकि EMI जमा करवाना है या नहीं करवाना है, यह फैसला लेने के लिए बैंक स्वतंत्र हैं। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है रिजर्व बैंक का आदेश/सुझाव?

यह जगजाहिर है कि भारत 21 दिनों के लिए लॉकडाउन है। लॉकडाउन की वजह से व्यापारी, कारोबारी, उधमी, किसान, मजदूर, कामगार श्रमिक इत्यादि समान रुप से प्रभावित हैं। सभी की आमदनी समान रुप से रुकी हुई है।

इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्तीय संस्थाओं, बैंकों, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों और को-ऑपरेटिव बैंकों को सभी टर्म लोन के लिए तीन महीने के मोरोटोरियम की अनुमति दी है।

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भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीई के गर्वनर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार यानी 27 मार्च 2020 को कहा कि सभी टर्म लोन पर 3 महीने का मोरोटोरियंम होगा। इस आदेश को समझने के लिए हम “टर्म लोन” और “मोरोटोरियंम” शब्द दोनों अर्थ निकालकर देखेंगे तो और अधिक क्लियरिटी होगा।

टर्म लोन क्या होता है?

लोन कई तरह का होता है। कोई व्यक्ति जब एक साल के लिए लोन लेता है, उसे हम डिमांड लोन के रुप में जानते हैं। वहीं जब कोई लोन 1 साल से अधिक के लिए लिया जाता है, उसे टर्म लोन के रुप में जाना जाता है।

टर्म लोन में कौन – कौन सा लोन आता है?

अधिकतर लोन, टर्म लोन ही होता है। टर्म लोन में कार लोन, होम लोन,  बिजनेस लोन और इसके साथ वह सभी लोन जो 1 साल से अधिक के लिए जाता है, उसे टर्म लोन की कैटेगरी में रखा जाता है। यहां यह साफ़ कर देना बेहतर है की क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम टर्म लोन के तहत नहीं आती है।

मोरोटोरियंम क्या होता है?

“मोरोटोरियंम” शब्द का शाब्दिक अर्थ कुछ दायित्वों से पहले एक कानूनी तौर पर अधिकृत स्थगन को छोड़ दिया जाना चाहिए। एक निरंतर गतिविधि का निलंबन। स्थगन होता है। इसे हम फाइनेंशियल व्यवस्था के तहत समझे तो इसका अर्थ कुछ इस तरह निकलता है। “इस अवधि यानी समय में लोन लेने वालों को लोन की EMI जमा करने की आवश्यकता नहीं है”।

क्या EMI नहीं जमा करना है?

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने सभी बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों से लोन की EMI तीन महीने के लिए मोरोटोरियंम करने की अनुमति दे दिया है। साथ ही, बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों को सुझाव भी दिया है कि लोन की EMI तीन महीने के लिए मोरोटोरियंम करने की तरफ वित्तीय संस्थाएं आगे बढ़े।

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ऐसे में अगर बैकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा आरबीआई गर्वनर की सलाह पर अमल किया जाता है, तो सभी टर्म लोन की EMI (किश्त) जून 2020 तक नहीं जमा करना होगा/EMI किश्त नहीं कटेगी। लेकिन आपको यह याद रखना है की EMI जमा करवाना है या EMI नहीं जमा करवाना है, यह फैसला पूर्ण रुप से बैंक और एनबीएफसी के ऊपर निर्भर है। इसमें आरबीआई की तरफ से सिर्फ सलाह दी गई है।

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क्या तीन महीने की EMI माफ़ हो जाएगी?

बिल्कुल भी नहीं। अगर बैंक और एनबीएफसी कंपनी आरबीआई का सुझाव मानते हुए मोरोटोरियंम के तहत तीन महीने तक EMI नहीं जमा कराती हैं तो इन तीन महीने की EMI माफ़ नहीं होगी, बल्कि आगे बढ़ जाएगी।

इसे इस तरह से समझिये। अगर किसी व्यक्ति का लोन जनवरी 2021 में खत्म हो रहा होगा, तो मोरोटोरियंम के कारण उसे तीन महीने EMI नहीं जमा करना होगा। अब उस व्यक्ति का लोन अप्रैल 2021 में समाप्त होगा। मतलब EMI माफ़ नहीं होगी, बल्कि लोन के आखिरी महीने के बाद जुड़ जाएगी।

EMI जमा न करने से क्या क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो जाएगी?

बिल्कुल भी नहीं। अगर मोरोटोरियंम के तहत तीन महीने तक लोन की EMI नहीं जमा करने का विकल्प मिलता है तो किसी को इस बात के लिए बिल्कुल भी परेशान नहीं होना है, कि उसकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो सकती है।

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आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर ब्याज भुगतान को टाले जाने को चूक नहीं माना जाएगा, इससे कर्जदार की रेटिंग (क्रेडिट हिस्ट्री) पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत है। निजी बैंकों में जमा भी बिल्कुल सुरक्षित है। लोगों को घबराकर पैसा निकालना नहीं चाहिए।

कब लिया गया यह फैसला?

यह फैसला रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने लिया है। समिति की बैठक 31 मार्च को होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से बढ़ते संकट के बीच इसे समय से पहले अंजाम दिया गया। अर्थव्यवस्था को कोरोना वायरस से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने कई तरह के कदम उठाए हैं।

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आपको क्या करना है?

अगर आपका भी किसी प्रकार का कोई लोन चल रहा है, तो आप 31 मार्च के बाद अपने बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) संपर्क कर के यह जान लीजिये कि आपके लोन की EMI जमा होगी या मोरोटोरियंम के तहत आपको लोन की किश्त लोन के अंतिम में जमा करना है। आपको हमारा सुझाव है कि आप ऑनलाइन तरीके से या फोन से ही अपने बैंक या एनबीएफसी कंपनी से संपर्क करें।

रेपो दर भी घटाया गया

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की तीन दिवसीय समिति की बैठक के बाद शु्क्रवार यानी 27 मार्च 2020 को रेपो दर में .75 प्रतिशत की कटौती कर दी। इस कटौती के बाद रेपो दर 4.40 प्रतिशत पर आ गई गई है।(आरबीआई के अनुसार)

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इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर में भी .90 प्रतिशत की कटौती कर इसे 4 प्रतिशत पर ला दिया। रिजर्व बैंक ने बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी एक प्रतिशत की कमी की है जो कि घटकर तीन प्रतिशत रह गई।इन तमाम उपायों से अर्थव्यवस्था में 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी बढ़ने का अनुमान है। (दैनिक हिंदुस्तान के अनुसार)

emi पर RBI का आदेश

किसको होगा फायदा?

देश में लॉकडाउन की वजह से सभी तरह का संचालन बंद है। दुकाने बंद हैं। कारोबार ठप पड़े हैं। फैक्ट्रियों में ताला लटक गया है। इससे दुकानदारों, कारोबारियों, उधमियों को सीधे तौर पर वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। लेकिन कहने न कि जान है तो जहान है।

यही कारण है की सभी लोन लॉकडाउन का सपोर्ट कर रहे हैं। जहां तक लोन की EMI तीन महीने तक न जमा करने का और रिवर्स और रेपो दर कम करने से होने वाले फायदों की बात है, इससे सीधे तौर पर आम आदमी, कारोबारी, उधमी और दुकानदार लाभान्वित होंगे।

कारोबारी, दुकानदार और उधमी जहां बिजनेस लोन लेकर अपने कारोबार में पैसा लगाये हुए हैं, उनको बिजनेस लोन की EMI से राहत मिलेगी। इससे उन्हें अपना बिजनेस सस्टेन करने का अवसर प्राप्त होगा।

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