व्यक्ति बिजनेस कर रहा है या नौकरी कर रहा है। दोनों ही स्थिति में व्यक्ति की इनकम एक समय बाद बढ़ती ही है। जब इनकम बढ़ती है, तब बहुत से लोगों के खर्चे बढ़ जाते हैं। ऐसे में सबसे जरूरी होता है बढ़ते हुए खर्चे को रोकना।

बढ़ती इनकम के साथ बढ़ता खर्च बहुत नुकसानदायक होता है। बढ़ते खर्च के कारण व्यक्ति एक समय बाद महंगी चीजों का शौक़ीन हो जाता है, जिसके कारण बचत करने में बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है।

खर्च और इनकम को लेकर एक कहावत भी बहुत प्रसिद्ध है “जितनी बड़ी चादर हो, उतना ही पैर पसारना चाहिए” यह कहावत बिल्कुल ठीक ही है, क्योंकि इंसान की जितनी आमदनी होती है, उसे अपनी आमदनी में ही खर्च करना और बचत करना सीखना चाहिए।

अगर समय रहते बचत के बारे में सोचा नहीं गया, तो आगे जाकर फिर कई तरह की आर्थिक समस्या बन सकता है। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं कि कैसे अपनी आमदनी में भी बचत करने की आदत डाली जा सकती है:

खुद की जरूरतों को पहचानिए

खर्च दो प्रकार का होता है। एक खर्च फिजूल होता है तथा दूसरा खर्च खुद की जरूरत के अनुसार होता है। फिजूल वाले खर्च में वह सभी प्रकार का खर्च शामिल होता है, जिसे शौक पूरा करने के लिए खर्च किया जाता है।

खुद की जरूरत में वह सभी खर्च आता है, जिसके बगैर जीवन जीना आसान नहीं होता है। मतलब अगर उतना खर्च नहीं किया जाये तो जरूरी काम भी नहीं हो सकत है। ऐसे में इस प्रकार का खर्च करना आवश्यक हो जाता है।

बचत करने के लिए सबसे जरूरी चीज है की सबसे पहले जरूरी खर्च और गैर जरूरी खर्च के को अलग – अलग करके पहचाना सीखना होगा। जिस चीज को खरीदे बिना काम चल सकता है, उसे गैर जरूरी खर्च में रखा जा सकता है। और, जिस चीज को खरीदे बगैर काम नहीं चल पायेगा, उसे जरूरत में शामिल करने से चीजें क्लियर हो जाएगी।

खुद के बजट से अधिक खर्च नहीं करना

संतुलित जीवन जीने के लिए खुद का बजट बनाना बेहद जरूरी होता है। व्यक्ति अगर हर महीने के लिए एक निश्चित बजट निर्धारित कर ले, तो उनके लिए खर्चे मैनेज करना आसान हो जाता है। व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनक खर्च उनके बजट से बाहर न जाये।

महीने का बजट बनाने के लिए मार्केट में ऐसे ढेर सारे मोबाइल ऐप हैं, जिनसे मदद प्राप्त की जा सकती है। बजट बनाने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि लाइफस्टाइल के बढ़ते खर्चों से निपटने में बहुत साहायता मिलती है।

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चाहे जितनी भी बड़ी ख़ुशी क्यों न हो, उसके लिए लोन लेकर जश्न मानना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है। व्यक्ति को इस बात को भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके ऊपर कोई बड़ी देनदारी न बाकाया रहे, देनदारियां जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी निपटा देना चाहिए।

लोन लेकर घी पीने से बचें

यह महज एक कहावत है। लोन लो और घी पीओ। लेकिन कई बार यह देखा गया है कि लोग इस कहावत का पालन अपनी जिंदगी में करते रहते हैं। जिसकी वजह से उन्हें एक समय बाद जाकर बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

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जहां तक संभव हो सके, वहां तक लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चे कम करने का प्रयास करें। यह जरूरी नहीं है कि जितने ट्रेंड में फैशन चल रहा हो, उसके अनुसार कपड़े खरीदना ही हो। ऐसी चीजें को खरीदना फायदेमंद साबित होता है, जो लंबे समय तक चले और जिससे अधिक से अधिक पैसों की बचत हो।

पैसा इन्वेस्ट करने का रेगुलर विकल्प चुने

सभी लोग पैसों की बचत करने का प्रयास करते हैं। सभी लोगों का तरीका अलग होता है। लेकिन, अभी तक यह देखने में आया है कि पैसों का ऑटोमेट इन्वेस्टमेंट करना सबसे बेहतरीन साबित होता है। ऑटोमेट इन्वेस्टमेंट से यह फायदा होता है की जितना पैसा इन्वेस्ट करना होता है, उतना पैसा अपने – आप कट जाता है।

ऑटोमेट इन्वेस्टमेंट में म्यूचुअल फंड जैसे कई फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट हैं, जहां पर अपने – आप पैसा कट कर निवेश में जुड़ जाता है। म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेट प्लान (SIP) इसे शुरू करने का अच्छा तरीका है।

सिप के जरिए एक तय रकम हर महीने आपके खाते से कटकर निवेश हो जाती है। इससे जबरन बचत होती है। ज्यादा पैसा जुटाने के लिए अपने निवेश को बढ़ा देना चाहिए।

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उदाहरण के लिए किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड से 12 फीसदी का सालाना रिटर्न मान लें तो 5,000 रुपये का मासिक सिप 10 साल तक चलाने पर 11 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई जा सकती हैं।

हालांकि, अगर सालाना सिप की रकम में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी जाए तो यही रकम बढ़कर 16 लाख रुपये हो सकती है।

खुद का बिजनेस शुरु करने के बारे में सोचना चाहिए

नौकरी चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हो, एक न एक दिन नौकरी से रिटायर होना ही पड़ता है। जबकि बिजनेस पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। ऐसे में व्यक्ति जब रिटायर हो जाता है, तो उसके पास काम नहीं रह जाता है, कुछ मायनों में पैसों की कमी भी हो जाती है।

इस स्थिति से बचने के लिए सबसे बेहतर उपाय होता है, समय रहते खुद का बिजनेस शुरु करना। व्यक्ति को 30 या 35 साल के बाद खुद के बिजनेस के बारे में सोचना शुरु कर देना चाहिए। अगर व्यक्ति के पास इतना समय न हो कि वह अपना बिजनेस खुद से चला सके, तो इस कंडीशन में बेहतर यह होगा कि किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखकर बिजनेस चलवाया जाये।

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बिजनेस धीरे – धीरे ही सही लेकिन चलना चाहिए। जब नौकरी से रिटायर्मेंट की बारी हो, तो रिटायर होने के बाद पूरा समय बिजनेस के लिए दिया जा सकता है। अगर बिजनेस बढ़ाने के लिए पैसों की दिक्कत हो तो बिजनेस लोन की सहायता लेना सबसे बेहतरीन ऑप्शन होता है।

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