वर्तमान समय में लोन लेना किसी की जरूरत है। किसी को मज़बूरीवश लोन लेना पड़ता है। कोई टैक्स बचाने के लिए लोन लेता है। कारोबारियों के यहां यह कहानी कुछ और ही होती है। कारोबारी के पास अपना पैसा होते हुए भी उनके हाथ में पैसा नही होता है। कारण है कि पैसा मार्केट में लगा होता है।

पैसा मार्केट में लगा होने के चलते कारोबारी को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए धन की जरूरत पड़ती है या नई मशीन खरीदने की जरूरत पड़ती है तो वह तुरंत बिजनेस लोन लेता है। आपको बता दें कि बिजनेस लोन या किसी भी तरह का लोन लेने भर से काम नही खत्म हो जाता है, असल जिम्मेदारी होती है लोन चुकाने की। कारोबारियों को अक्सर यह चिंता होती है कि कर्ज कैसे चुकाए?

अगर ठीक समय पर लिया गया कर्ज नही चुकाया गया तो एक साथ कई तरह की दिक्कते आ जाती हैं। मानसिक परेशानी होती है, बिजनेस खराब होने का डर बना रहता है। ऐसे में लोन लेने के बाद लोन चुकाना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

कई कारोबारी तो पास में पर्याप्त धन होते हुए भी ठीक समय पर बिजनेस लोन की EMI जमा नही कर पाते हैं। इसका कारण है – धन का अनियोजित प्रबंधन यानी पैसों का ठीक से मैनेजमेंट न होना। तो सवाल उठता है कि कर्ज चुकाने का तरीका क्या होता है?

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अगर आपका भी सवाल है कि कर्ज कैसे चुकाए तो इस आर्टिकल में आपको आपके सवाल का जवाब मिल जायेगा। इस आर्टिकल में बताया जायेगा कि सही समय पर कर्ज चुकाने का सही तरीके क्या होते हैं।

कर्ज कैसे चुकाए – समय पर EMI जमा करें

कर्ज यानी लोन लेने के बाद लोन देने वाले बैंक या फाइनेंशियल कंपनी और लोन लेने वाले व्यक्ति के बीच एक करार होता है कि वह व्यक्ति कितने अमाउंट का लोन कितने समय के लिए ले रहा है और उस लोन को कितने महीने की EMI में चुकाएगा। EMI जमा करने की तारीख क्या होगी।

ऐसे में जब EMI जमा करने की तारीख निकलने लगती है तो लोन देने वाले बैंक या फाइनेंशियल कंपनी के तरफ से EMI जमा करने का दबाव बढ़ने लगता है। इससे मानसिक तौर से परेशानी होती है। इससे बचने के लिए बेहतर उपाय यही है कि लोन की EMI ठीक तय की गई तारीख पर या उससे पहले ही जमा कर देना चाहिए।

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मंथली EMI चाहें जितनी भी हो उसके लिए एक अलग से बजट बनाना अनिवार्य होता है। जब आप महीने भर में EMI की बजट के लिए प्लानिंग करके बचत करेंगे तो EMI बाउंस होने का खतरा नही रहेगा।

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सभी लोन की लिस्ट तैयार रखें

यह उनके लिए है जो एक ही समय में कई लोन ले लेते हैं। ऐसे में कभी – कभी यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस लोन की EMI कब कब जमा करना है और दूसरे लोन की EMI कब जमा करना है। इस कंफ्यूजन से बचने के लिए बेहतर ऑप्शन यह है कि अपने लोन की लिस्ट बना लिया जाये। इससे लोन तो याद तो रहेंगे ही साथ ही किस लोन की EMI कब जमा करना है, यह भी याद रहेगा।

अधिक लोन को कम करने की कोशिश करें

अगर किसी कारोबारी पर एक साथ बिजनेस लोन और कई पर्सनल लोन है तो इस स्थिति में उसको ठीक समय पर EMI भरने में दिक्कत हो सकती है। इस कंडीशन में बेहतर यही होगा कि सबसे पहले लोन की संख्या कम की जाये।

लोन की संख्या कम होने से EMI कम हो जाएगी और कर्जदार को मंथली EMI चुकाने में आसानी होगी। दूसरा विकल्प यह भी हो सकता है कि जब अधिक संख्या में लोन लेना बेहद ही जरूरी हो तो उस कंडीशन में आप दो लोन को एक ही में मर्ज कराने की कोशिश करें।

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कर्ज कैसे चुकाए – जरूरत से अधिक लोन न लें

यह सबसे महत्वपूर्ण है। अगर आप कारोबारी है और आपको बिजनेस लोन की जरूरत है तो आप बिजनेस लोन लें जरुर लेकिन इस बात का खास ध्यान रखें कि लोन की धनराशी उतनी ही हो जितने से आपका कार्य सकुशल हो जाये।

लोन लेकर अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने की आदत न बनाएं। लोन से व्यक्तिगत खर्च करना अपने आप को ही परेशानी में डालना होता है। जरूरत से अधिक लोन लेने से बचने की कोशिश करें।

सिबिल स्कोर ठीक रखें

कर्ज प्राप्त करने के लिए सिविल क्रेडिट स्कोर महत्वपूर्ण होता है। सिबिल क्रेडिट स्कोर की जाँच नियमित करते रहें। क्रेडिट स्कोर ठीक रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मंथली EMI की होती है इसलिए कोशिश करना चाहिए कि जो भी मंथली EMI तय हो उसे तय समय पर जमा करना सुनिश्चित हो सके।

इस तरह देखा जाये तो कर्ज कैसे चुकाए सवाल का जवाब आपको मिल गया होगा। यहां बताए गये कर्ज चुकाने के तरीका का इस्तेमाल करके कर्ज तय समय पर चुकाने में सक्षम बन सकते हैं।

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