किसी भी देश की आर्थिक समृधि इस बात पर निर्भर होता है, उस देश में छोटे और मध्यम उद्योगों की संख्या कितनी है और उन उद्योगों की हालत कैसी है। हम अगर विकसित देश अमेरिका और चीन का उदाहरण तो बात – बात में देते रहते हैं। हम यह तथ्य भूल जाते हैं कि अमेरिका और चीन में कितनी अधिक संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग हैं। चीन में तो घर – घर किसी न किसी प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता है।

किसी भी देश का आर्थिक विकास न केवल उसके यहां के बड़े उद्योगों और बहुराष्ट्रीय संगठनों पर निर्भर करता है, बल्कि इसके बजाय मध्यम स्तर के उद्योगों, लघु उद्योग और कुटीर उद्योगों पर भी निर्भर करता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए छोटे और मध्यम उद्योग ऑक्सीजन की तरह काम करता है। क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि और सेवा क्षेत्र संबंधित उद्योगों पर निर्भर है।

कृषि क्षेत्र से खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है और सर्विस सेक्टर में जरूरी सेवाएं संचालित की जाती हैं। अधिकतर यह सभी व्यवसाय लघु एवं मध्यम उद्योग के अंतगर्त आते हैं। इसके अतिरिक्त विनिनिर्माण यानी मैनुफैक्चरिंग का उद्योग भी एक महत्वपूर्ण छोटे एवं मध्यम उद्योग का हिस्सा है। भारत मे छोटे और मध्यम उद्योगों की संख्या लाखों में है और इन उद्योगों में काम करने वाले करोड़ो में हैं।

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देश के विकास में छोटे और मध्यम उद्योगों के योगदान को देखते हुए केन्द्र सरकार की तरफ से इन उद्योगों की मदद करने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उधम मंत्रालय बनाया गया है। यह मंत्रालय सूक्ष्म (कुटीर, लघु (छोटे) और मध्यम श्रेणी के उद्योगों के लिए काम करता है। मंत्रालय द्वारा इन उद्योगों को MSME (एमएसएमई) की संज्ञा प्रदान की गई है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एमएसएमई के लिए समय – समय पर लाभकारी योजनाएं चलाई जाती हैं।

इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए छोटे और मध्यम उद्योगों को एमएसएमई का पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। एमएसएमई रजिस्ट्रेशन होने से इन उद्योगों को एक कार्ड मिलता है। इस कार्ड को एमएसएमई रजिस्ट्रेशन कार्ड कहते हैं। इस एमएसएमई कार्ड पर उद्योग का नाम, उद्योग की श्रेणी, उद्योग की जगह, उधमी का नाम और एमएसएमई रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा होता है। आइये आपको इस आर्टिकल में विस्तार से जानकारी देते हैं कि MSME क्या है और आप कैसे आसानी से MSME Registration करा सकते हैं।

क्या है MSME – व्हाट इज एमएसएमई?

MSME kya hai का उत्तर यह हैं कि सरकार द्वारा निर्धारित की गई एमएसएमई एक परिभाषा है। एमएसएमई के तहत मुख्य रुप से दो तरह के उद्योग आते हैं। पहला है – सर्विस सेक्टर और दूसरा है – विनिनिर्माण उद्योग यानी मैनुफैक्चरिंग सेक्टर।

एमएसएमई के तहत सर्विस सेक्टर

सर्विस सेक्टर वह होता है जिसमे ग्राहकों की सेवा की जाती है। मतलब किसी व्यक्ति का कोई काम जब किसी संस्था, कंपनी, व्यक्ति या फैक्ट्री द्वारा किया जाता है तो उसे सर्विस कहते हैं। सर्विस में ऑटो चलाने से लेकर आईटी कंपनी चलाना, ट्रेवेल एजेंसी चलाना और एयरलाइन का संचालन करना तक आता है। सर्विस सेक्टर बहुत बड़ा है। एमएसएमई के तहत हम उन सर्विस उद्योगों को रखते हैं जिन उद्योगों का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक हो (सरकार द्वारा लागू की एमएसएमई की नई परिभाषा जून 2020 के अनुसार मध्यम उद्योग की सीमा)।

एमएसएमई के तहत विनिनिर्माण यानी मैनुफैक्चरिंग उद्योग

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि किसी चीज के निर्माण से संबंधित बात हो रही है। यह बिल्कुल सत्य है यह उद्योग सेक्टर निर्माण से ही संबंधित है। निर्माण में सुई से लेकर हवाई जहाज तक आता है। लेकिन एमएसएमई के तहत उन उन्हीं उद्योगों को विनिनिर्माण उद्योग यानी मैनुफैक्चरिंग इंटरप्राइजेज कहते हैं जिनका सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होता है सरकार द्वारा लागू की एमएसएमई की नई परिभाषा जून 2020 के अनुसार मध्यम उद्योग की सीमा)।

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मतलब देश में मौजूद सभी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को MSME कहते हैं। सूक्ष्म-लघु और मध्यम उद्यम (MSME) छोटे आकार की इकाइयां हैं, जो उनके निवेश के आकार के संदर्भ में परिभाषित हैं। वे अर्थव्यवस्था में उत्पादन, रोजगार निर्यात इत्यादि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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वे बड़ी संख्या में अकुशल और अर्द्ध कुशल लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। निर्यात में योगदान, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ाने और कच्चे माल, मूल सामान, तैयार भागों और घटकों की आपूर्ति करके बड़े उद्योगों को समर्थन प्रदान करके अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब तक आपको ‘MSME kya hai’ यह समझ गए होंगे।

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कितनी मात्रा में MSME उद्योग हैं?

MSME के बारे में जानने के बाद आपको यह भी जान लेना चाहिए की भारत में कितनी संख्या में MSME कारोबार कार्य कर रहें हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत, अपने प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों और विविध जलवायु परिवर्तनों के साथ, इस तरह के उद्योगों का बहुत बड़े पैमाने पर अभ्यास करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है।

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MSME मंत्रालय के ‘एक नजर में MSME’ रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में 36 मिलियन यूनिट हैं और 80 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। सेक्टर 6,000 से अधिक उत्पाद जीडीपी का लगभग 8% योगदान देता है और कुल विनिर्माण उत्पादन में 45% और देश से निर्यात में 40% योगदान देता है। आइए अब यह समझते हैं कि MSME Registration कैसे होता है।

MSME Registration प्रक्रिया कितनी जटिल है?

आज आप जो भी व्यवसाय करते हैं, वह कानूनी तरीके से करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसीलिए सरकार द्वारा सभी तरह के बिजनेस करने के लिए पंजीकरण कराने का प्रावधान किया गया है। बिजनेस का रजिस्ट्रेशन इसलिए जरूरी होता है ताकि सरकार को यह जानकारी हो सके कि देश में कितने बिजनेस/उद्योग इत्यादि चल रहे हैं और उन बिजनेस/उद्योग इत्यादि में कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

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इसके साथ ही जब सरकार द्वारा कोई योजना चलाई जानी होती है तो रजिस्टर्ड बिजनेस/उद्योग की संख्या के आधार पर ही योजना बनाई जाती है ताकि सभी पंजीकृत उद्योगों को लाभ प्राप्त हो सके। इसी क्रम में एमएसएमई के लिए भी रजिस्ट्रेशन करने की व्यवस्था की गई है। पहले MSME Registration प्रक्रिया बहुत मुश्किल होती है। पहले व्यवसाय शुरू करने के लिए दो रूपों में एमएसएमई रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भरना पड़ता था। दोनों एमएसएमई रजिस्ट्रेशन फॉर्म में पहले को EM 1 (उद्यमी ज्ञापन 1) तथा दूसरे को EM 2 (उद्यमी ज्ञापन 2) कहा जाता था। और इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के अन्य 11-12 प्रकार के रूप भी इन दोनों रूपों के रूपों से भरने होते थे।

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लेकिन देश में जैसे – जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ती गई वैसे – वैसे चीजें आसान होती गई। इंटरनेट के प्रसार ने तो रजिस्ट्रेशन और बैंकिंग को एकदम से आसान बना दिया है। अब एमएसएमई का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन ही हो जाता है। ऑनलाइन एमएसएमई रजिस्ट्रेशन करने के अब सिर्फ एक एमएसएमई रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होता है।

MSME Registration प्रक्रिया अब हुई आसान

MSME Registration के लिए मोदी सरकार ने एक एक संयुक्त पोर्टल बनाया है। इस पोर्टल का नाम उद्योग आधार रखा गया है। एमएसएमई की प्रकिया को उद्योग आधार ऑनलाइन पर लाकर इसे बहुत आसान बना दिया है। उद्योग आधार पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में अपने छोटे से मध्यम लागत वाले व्यवसाय को ऑनलाइन पंजीकृत करके अपनी पंजीकरण पावती रजिस्टर प्राप्त कर सकते हैं।

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मतलब कुछ ही मिनट में एमएसएमई रजिस्ट्रेशन करके अपना एमएसएमई रजिस्ट्रेशन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जिन्होंने एक छोटा या मध्यम धर्म व्यवसाय शुरू किया है। अपने व्यवसाय शुरू करने के बाद नए लोगों को इसके लिए आवेदन करना होगा। उद्योग आधार पर एमएसएमई के रजिस्ट्रेशन के लिए आपको सबसे पहले उद्योग आधार की आधिकारिक वेबसाइट यानी पोर्टल लॉग इन करना होता है। उद्योग आधार पोर्टल ओपन होने के बाद दाई साइड में रजिस्टर्ड एमएसएमई नामक टैब दिखेगा। इस टैब पर क्लिक कर देना होता है। टैब पर क्लिक करते ही एमएसएमई रजिस्ट्रेशन फॉर्म ओपन हो जायेगा। इस फॉर्म में मांगी गई जानकारियाँ सही – सही भरना होता है। फॉर्म भरने के बाद आपको अपना मोबाइल नंबर सत्यापित करना होता है।

मोबाइल नंबर सत्यापित करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर देना होता है। बस हो गया एमएसएमई का रजिस्ट्रेशन। फॉर्म सबमिट होने के कुछ ही मिनट में आपके मोबाइल नंबर पर आपके रजिस्टर्ड एमएसएमई का एमएसएमई नंबर मैसेज के रुप में मिल जायेगा। और एमएसएमई रजिस्ट्रेशन कार्ड आपके रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेज दिया जाता है। जहां से आप अपना एमएसएमई रजिस्ट्रेशन कार्ड प्रिंट कर सकते हैं। आगे आपको MSME registration के फायदों के बारे में बताया जा रहा है।

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MSME Registration के लाभ

MSME Registration से होने वाले लाभ इस प्रकार हैं-

  • बैंकों से आसान वित्त उपलब्धता
  • सरकारी निविदाएं खरीदने में प्राथमिकता
  • प्रत्यक्ष कर कानून के तहत छूट
  • ISO प्रमाणन पर सब्सिडी
  • मूल्य वरीयता में वेटेज (उद्यम आधार पर भिन्न हो सकता है)
  • बैंकों से ब्याज दर में कमी
  • नि: शुल्क लागत सरकार निविदाओं
  • स्टाम्प ड्यूटी और ऑक्टोई लाभ
  • बिजली बिल में रियायत
  • निर्माण/उत्पादन क्षेत्र उद्यम के लिए आरक्षण नीतियां
  • आईएसओ प्रमाणन खर्च की प्रतिपूर्ति
  • उत्पाद शुल्क छूट योजना

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