GST व्यवस्था लागू होना देश में टैक्स के क्षेत्र में एक क्रांति की तरह था। इसे देश में “एक कर एक देश” के रूप में स्थापित किया गया है। इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही आई GST से जुड़ी कई गलतफहमियां। बहुत से व्यापारी इस टैक्स व्यवस्था से डर गए। राजनैतिक स्तर पर भी इस व्यवस्था को तरह – तरह से अनुचित और व्यापारियों के लिए हानिकारक बताने की कोशिश की गई। चूँकि यह व्यवस्था भारत में पहली बार लागू की गई थी, तो इसे समझने में सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को जरा समय लगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह व्यवस्था देश के टैक्स प्रक्रिया को ही बदल देने वाली है, इसमें किसी का किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नही है।

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गलतफहमी नंबर 1 : GST के बाद भी अन्य तरह के टैक्स देने पड़ेंगे

हकीकत: यह बिलकुल गलत है। GST से पहले जहां व्यापारी को कई तरह के टैक्स देने की व्यवस्था थी। नई व्यवस्था में GST टैक्स का एक ब्रांड बन गया है, अब इसके अंतगर्त केवल तीन प्रकार के टैक्स सरकार लेगी। पहला CGS, इसे केन्द्रीय सरकार लेगी। SGST,इसे राज्य सरकार लेगी, एक अन्य प्रकार जिसे IGST के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के टैक्स उन कारोबारियों को देने है, जिनका बिजनेस एक राज्य से दुसरे राज्य में होता है। इस प्रकार के टैक्स केंद्र सरकार प्राप्त करेगी फिर दोनों राज्यों के बीच बराबर बांट दिया जायेगा।

गलतफहमी नंबर 2: ई-कॉमर्स पर GST नही लागू होता है

हकीकत: यह धारणा बिलकुल गलत है। ई-कॉमर्स कंपनियां अपने माध्यम (प्लेटफ़ॉर्म) का उपयोग करने वाले सप्लायर्स को पेमेंट करने से पहले टैक्स कटेंगी। महत्वपूर्ण बात यह है की यह अधिकतम 2 प्रतिशत होगा। इसमें 1 प्रतिशत CGST और 1 प्रतिशत SGST रहेगा।

गलतफहमी नंबर 3: GST से बढ़ेंगे टैक्स विवाद

हकीकत: यह धारणा बिलकुल गलत है की GST से टैक्स विवाद में बढ़ोतरी होगी। बल्कि ठीक इसके विपरीत इससे कई तरह के टैक्स विवाद से छुटकारा मिलेगा। इससे टैक्स लेते समय टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारीयों द्वारा किसी भी तरह घपलेबाजी करने की संभावना ख़त्म हो जाएगी। अधिकारी डरा – धमका कर एक ही व्यक्ति या संस्था से कई बार टैक्स के नाम पर वसूली नहीं कर पाएंगे।

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गलतफहमी नंबर 4: GST रजिस्ट्रेशन के बाद ही बिजनेस कर सकते है।

हकीकत: व्यापारी अपना कारोबार जारी रख सकते है। यह आप धारणा फैलाई गई की GST लागू होने के बाद बिजनेस करने से पहले ही GST रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। और जिनका बिजनेस पहले से चल रहा है उनको सबसे पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा। लेकिन असलियत यह है कि आप अपने कारोबार को करते हुए 1 महीने के भीतर कभी भी GST रजिस्ट्रेशन करा सकते है।

गलतफहमी नंबर 5: छोटे बिजनेस को नुकसान

हकीकत: GST छोटे बिजनेस को बिलकुल भी नुकसान नही है। छोटे कारोबारियों के लिए सरकार कंपोजिशन स्कीम लेकर आई है। इस स्कीम का 75 लाख तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी लाभ उठा सकते है। कंपोजीशन स्कीम में तीन स्लैब है, पहला बेचने वालों के लिए, इसमें सालाना टर्नओवर का 1 प्रतिशत टैक्स देना है। दूसरा है बनाने वालों का, इसमें 2 प्रतिशत टैक्स देना है। तीसरा छोटे या मध्यम रेस्टोरेंट चलाने वालों के है, इसमें सालाना अपने टर्नओवर का 5 प्रतिशत टैक्स देना हटा है। इस तरह कोई व्यापारी अगर कंपोजीशन स्कीम का फायदा लेता है तो उसे साल में केवल 5 रिटर्न ही दाखिल करने होंगे। इस व्यवस्था से आपको अधिक कागजी कार्यवाई से मुक्ति प्राप्त होगी।

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