ITR फाइल करने की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। अगर 31 जुलाई के पहले आपने ITR फाइल नहीं किया है तो आपको इसके लिए भारी जुर्माना देना पड़ेगा। ITR फाइल करने के पहले आपको यह बता दें कि पिछले एक साल में  इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट में कई बदलाव हुए हैं।  इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने ITR दाखिल करने के समय किसी भी प्रकार की गलतियों से बचने के लिए इन परिवर्तनों से अवगत हों। तो आइए जानते हैं, उन छह बदलावों के बारे में जो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर आए हैं।ITR के बदले नियम

1. ई-फाइल खाते को लॉगिन करने पर जन्‍मतिथि देने की जरुरत नहीं-

पिछले साल तक ई-फाइलिंग वेबसाइट पर अपना अकाउंट लॉग-इन करते वक्त जन्मतिथि डालनी होती थी, लेकिन अब इसकी कोई जरूरत नहीं रह गई है। आईटीआर भरने के नियम में यह पहला बदलाव है।

2. ITR से संबंधित दस्‍तावेज पासवर्ड फ्री होंगे-

एक टैक्स फाइलिंग एक्सपर्ट का कहना है कि  ITR फाइलिंग से जुड़े विभिन्न दस्तावेज, जैसे कि फॉर्म 26AS, ITR-V आदि भी बदल गए हैं। आयकर विभाग की जानकारी के अनुसार जो दस्‍तावेज पहले पासवर्ड देने के बाद ही ओपन होते थे वो अब सीधे ही खोले जा सकते हैं।

3. फॉर्म 26 AS को डाउनलोड करने की प्रक्रिया में बदलाव-

फॉर्म 26AS को TRACES वेबसाइट से डाउनलोड करने की प्रक्रिया भी बदल गई है। इसके पहले यह नियम था कि वेबसाइट में यह दिखाता था कि आप फॉर्म 26 AS PDF, HTML या फिर Text Format में खोलना चाहते हैं। मगर  इस वर्ष से आपको पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए भी पहले इसे एचटीएमएल फॉर्मेट में देखना होगा, फिर ‘Export As PDF’ पर क्लिक करना होगा।

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4. वेरिफिकेशन के विकल्प बदले-

वेरिफिकेशन संबंध में एक और परिवर्तन हुआ है। इससे पहले, ई-फाइलिंग वेबसाइट ने रिटर्न जमा होने तक सत्यापन विकल्प नहीं मांगा जाता था। वैसे इस साल भी आपसे ITR के वेरिफिकेशन मेथड के बारे में पूछा जाएगा, लेकिन आईटीआर सबमिट करने के बाद आखिरी चरण में आपको इसे बदलने का मौका भी मिलेगा।उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने पहले ऑफलाइन मेथड का चयन कर लिया तो भी रिटर्न फाइल करने के बाद के चरण में ई-वेरिफिकेशन का तरीका बदलने का विकल्प मिलेगा।’ हालांकि, एक बार जब आप अपनी कर वापसी दर्ज कर लेते हैं, तो आप वैकल्पिक विधि का उपयोग कर सकते हैं, यानी, आपके आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग से उत्पन्न ईवीसी का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक मोड और अपने ITR को सत्यापित करने के लिए।

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पहले, आयकर विभाग ने करदाताओं को अपने रजिस्टर्ड ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP का उपयोग करके अपने ITR (कुछ शर्तों के अधीन) वैरिफाई करने की अनुमति दी, लेकिन अब यह विकल्प पोर्टल पर नहीं देखा जा सकता है। यह विकल्प पहले उन करदाताओं को मिलते थे, जिनका ग्रॉस टोटल इनकम 5 लाख रुपये से कम होता था और उनका मोबाइल नंबर उपयुक्त पैन के अलावा किसी दूसरे पैन से रजिस्टर्ड नहीं होता था।

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5. अगर आप वित्त वर्ष 2017-18 के लिए ITR1-

यदि आप ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के योग्य हैं तो आप ‘Prepare and Submit’ बटन से इसे फाइल कर रहे हैं, तो अब आप कुछ खाने स्वतः भरे जाने का विकल्प चुन सकते हैं। आप इसका इस्तेमाल पिछले साल का आईटीआर या फॉर्म 26AS का चयन करते हुए कर सकते हैं। अगर आप ‘Auto-Populated’ का चेक बॉक्स सिलेक्ट करते हैं तो आपको आईटीआर मेथड से आईटीआर फाइल करते वक्त इन खानों को दोबारा भरना या ऑटो पॉप्युलेटेड मेथड सिलेक्ट नहीं करना पड़ेगा।

6. TDS विवरणों की जांच करें और इसे 26 AS से मिलान करें-

ITR-1 ऑनलाइन दर्ज करने के सबसे बड़े फायदों में से एक यह है कि यह आपके नाम, पता, पैन विवरण और कर विवरण जैसे फॉर्म में अधिकांश विवरणों को स्वतः पॉप्युलेट करता है। यदि आप फॉर्म 26 एएस के साथ टीडीएस विवरण से मेल नहीं खाते हैं, तो आप अपने लिए उपलब्ध कर-क्रेडिट पर चूक सकते हैं। इसलिए, ITR फाइल करते वक्त फॉर्म 26AS से डेटा मिलान जरूर कर लें। अगर आंकड़े मैच नहीं कर रहे तो फॉर्म 26AS के टीडीएस डेटा ही लें।’

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