इनकम टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होती है। ITR फाइल करने की तिथि आवश्यकता पड़ने आगे बढ़ते रहती है। लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के अंतिम तिथि का इंतजार नही करना चाहिए।

जब भी आपका 31 जुलाई तक डाटा तैयार हो जाये तो ITR फाइल कर देना चाहिए। इनकम टैक्स रिटर्न के लिए अंतिम डेट का इंतजार करने में समझदारी नही होती बल्कि अंतिम समय में भागमभाग हो जाती है जिससे गलत विवरण दर्ज होने की संभवना अधिक हो जाती है।

अगर आईटीआर में गलत विवरण दर्ज हो जाता है तो आयकर विभाग से जुर्मना लगने और नोटिस मिलने का खतरा बना रहता है। आपको बता दें आईटीआर फाइल करने में सिर्फ 15 मिनट का समय लगता है। आइये इस आर्टिकल में आईटीआर फाइल करने के प्रोसेस के बारे में विस्तार से समझते हैं।

ITR क्या होती है?

आयकर रिटर्न यानी ITR इसे इनकम टैक्स रिटर्न भी कहते हैं। यह किसीव्यक्ति के सालाना कमाई और खर्चों का लेखा-जोखा यानी विवरण होता है। इस विवरण में व्यक्ति अपने द्वारा और अपने सभी सोर्सो से होने वाली सालाना इनकम का विवरण भरता है।

किसी व्यक्ति के द्वारा भरे गये विवरण को सरकार के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा करना होता है यानी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना होता है। इसे हम सरल भाषा में आईटीआर फाइल करना कहते हैं।

इसे अगर एक उदहारण से समझेंगे तो और बेहतर तरीके से समझ आएगा: माना आपकी आमदनी 24 लाख सालाना है। और आप इन 24 लाख रुपये को साल में ही खर्च कर देते हैं। आपका दावा है कि आपके पास आपके कमाई का कोई हिस्सा नही बचता है।

लेकिन आपके द्वारा किये गये दावे को सरकार नही मान्यता देगी जब तब कि आपको अपने खर्चों का लिखित रुप से विवरण दर्ज नही करा सकते हैं। मतलब सरकार यह तब तक नही मानेंगी जब तक आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नही कर देते हैं।

जब तक आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नही कर देते हैं तब तक आपके इनकम में से इनकम टैक्स कट जायेगा। जब आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर देते हैं यानी अपनी इनकम का एक – एक ब्यौरा लिखित में दे देते हैं तो आपका जितना पैसा इनकम टैक्स के रुप कटी होगी उतनी रकम टैक्स रिटर्न के रुप में आपको मिल जायेगा।

इनकम टैक्स के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि जब भी आईटीआर फाइल किया जाता है तब वह करेंट फाइनेंशियल ईयर का ही इनकम विवरण दाखिल किया जाता है। आईटीआर में व्यक्ति सभी सोर्सो जैसे सैलरी, कारोबार या पेशे से कितनी रकम कमाया है, इसका लिखित ब्यौरा केंद्र सरकार को देना होता है।

आईटीआर फाइल करने में इन कागज़ी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है

  1. पैन नंबर
  2. आधार
  3. फॉर्म 16
  4. फॉर्म 16 A

इनकम टैक्स रिटर्न कैसे फाइल करते हैं?

आयकर रिटर्न फाइल करने का दो तरीका होता है। ऑनलाइन आईटीआर और ऑफलाइन आईटीआर। ऑफलाइन आईटीआर फाइल करने के लिए इनकम टैक्स की वेबसाइट से ITR फॉर्म डाउनलोड करना होता है। ITR फॉर्म डाउनलोड करने के बाद उसे बेहतर तरीके से भरना होता है।

भरे गये ITR फॉर्म के साथ पैन कार्ड की फोटोकॉपी अटैच करने करके उसे आयकर विभाग के बैंगलोर स्थित केन्द्रीय कार्यालय में साधारण डाक से भेजना होता है।

ऑनलाइन आयकर रिटर्न फाइल करें बस 15 मिनट में

ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए कुछ कागज़ी तैयारी करना आवश्यक होता है:

  • 31 मार्च तक का अपने सभी बैंक अकाउंट की बैंक स्टेटमेंट तैयार रखना होता है।
  • हर बैंक अकाउंट में सालभर में मिले कुल इंटरेस्ट रेट को जोड़ लें। कृपया ध्यान दें कि बचत खातों पर एक साल में 4 बार इंटरेस्ट दिया जाता है।
  • अपने फिक्स्ड डिपाजिट और पोस्ट ऑफिस में जमा धन पर मिले ब्याज को जोड़ लें।
  • इनकम टैक्स रिटर्न में आपको टैक्स बचत के लिए इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत किये गए निवेश की जानकारी देनी होती है, जिसके आधार पर आपको इनकम टैक्स में छूट मिलेगी।
  • अगर आपने होम लोन लिया है तो उसके ब्याज के सर्टिफिकेट और खर्च के पेपर रखें। ब्याज का सर्टिफिकेट आपको लोन देने वाली संस्था की वेबसाइट से मिल जायेगा।

इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म भरने से पहले करें टैक्स देनदारी की गणना

अपनी कर देनदारी के बारे में जानने के लिए आप इनकम टैक्स कैलकुलेटर की मदद ले सकते हैं। यह टूल इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर भी मौजूद है। इनकम टैक्स कैलकुलेटर के लिए इस www.incometaxindiaefiling.gov.in लिंक पर क्लिक करें।

इनकम टैक्स की वेबसाइट पर बायीं तरफ क्विक लिंक्स टैब में तीसरे स्थान पर आपको टैक्स कैलकुलेटर दिखेगा वहां क्लिक करना होता है। इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर क्लिक करने के बाद टैक्स टूल्स पेज खुलेगा। इस पर आपको इन्डिविज्युअल/एचयूएफ वाला विकल्प चुनना है।

इसके नीचे आपको कुछ बॉक्स मिलेंगे। इनमें दूसरी लाइन में दूसरे नंबर पर इनकम टैक्स कैलकुलेटर का बॉक्स मिलेगा। इस पर क्लिक करें। इसके बाद आपको कुछ विकल्प मिलेंगे। सबसे पहले एसेसमेंट ईयर सलेक्ट करना होता है।

अपने बारे में बुनियादी जानकारी देने के बाद आप पांचवें नंबर पर सैलरी से मिली आमदनी का कॉलम भरें। इस बारे में सभी सूचना आपको जहां आप नौकरी करते हैं वहां से मिले फॉर्म 16 में मिलेगी। इसे भरने के लिए आप फॉर्म 16 का पार्ट-बी देखें।

फॉर्म 16 B में ग्रॉस सैलरी मद में लिखी रकम में से सेक्शन 10 के तहत जारी भत्ते घटाने के बाद जो रकम बचेगी उसे वेतन से आमदनी मद में लिखें। अब अगर आपने घर किराये पर दिया है तो उस बारे में जानकारी दें। अगर आपको कैपिटल गेंस से आमदनी हुई है, तो आप उसे यहां किसी टैक्स विशेषज्ञ की मदद से भर सकते हैं।

इसके बाद आप अन्य सोर्स से हुई इनकम के विकल्प में जाकर दायीं तरफ लिखे शो डीटेल्स पर क्लिक करें। अब यहां आप सभी बैंक अकाउंट से मिले ब्याज की रकम का विवरण दें।

अब कैलकुलेटर में नीचे की ओर लिखे डिडक्शन पर आएं। इस लाइन में आपको दायीं तरफ शो डीटेल्स मिलेगा। इस पर क्लिक करें। यहां आपको पहले विकल्प में जीवन बीमा प्रीमियम की रकम का जिक्र मिलेगा। अगर आपने कोई बीमा पॉलिसी खरीदी है तो उसके प्रीमियम की रकम का जिक्र यहां करें।

इसके बाद आपको इनकम टैक्स बचत के लिए अन्य निवेश विकल्प में जमा किये गए रकम की जानकारी देना होता है। इसमें एनएससी, पीपीएफ, यूलिप आदि में निवेश की जानकारी भरना होता है। अगर आपने निवेश के इन विकल्पों में पैसे लगाये हैं तो उसकी जानकारी दीजिये।

इसके बाद ऑप्शन आता है बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च ट्यूशन फीस का विवरण देने का। यहां आप अपने दो बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर इनकम टैक्स में छूट ले सकते हैं। इसमें टैक्स बचत की अधिकतम सीमा 1.50 लाख रुपये है। इसमें स्कूल/कॉलेज की ट्यूशन फीस ही शामिल होती है।

जब आप इन सभी सभी कॉलम को भर देते हैं तो इसके बाद इनका योग यहां खुद आ जायेगा। आपको ध्यान यह रखना है कि इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत सिर्फ 1.50 लाख तक की रकम पर ही टैक्स छूट मिल सकती है।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते इन बातों का रखे ध्यान

  • टैक्स बचत के लिए कटौती बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं।
  • अगर आपने आईटीआर में आमदनी कम और कटौती को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया तो आप पर कार्रवाई हो सकती है।
  • इनकम टैक्स रिटर्न में सभी बैंक अकाउंट की जानकारी देना होता है।
  • बैंक का खाता चालू हो या वित्त वर्ष के बीच में बंद हुआ हो, रिटर्न भरते समय सबकी देना जरूरी होता है।

इस तरह आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न सिर्फ 15 मिनट में फाइल कर सकते हैं। हां इसके जरूरी है कि आपके पास सभी जरूरी कागजात जरूरी रुप से उपलब्ध हों। अगर आईटीआर भरते समय कहीं भी कुछ कन्फ्यूजन होता है तो आईटीआर एक्सपर्ट से सलाह लेने में संकोच ना करें।