आयकर विभाग के नीति बनाने वाले निकाय सीबीडीटी ने मंगलवार को पिछले चार साल के महत्वपूर्ण आयकर और डायरेक्ट टैक्सेज से जुड़े आंकड़े जारी किए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड-सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने कहा कि देश में पिछले चार साल में विभिन्न श्रेणियों के ऐसे करदाताओं की संख्या की संख्या 60 प्रतिशत बढ़कर 1.40 लाख हो गई है, जो अपनी सालाना आय 1 करोड़ रुपये से ज्यादा दिखाते हैं। सीबीडीटी ने कहा ‘एक करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना आय वाले कुल करदाताओं (कंपनियों, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार) की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।’

आयकर

यह भी पढ़ें:- GST में Reverse Charge क्या है और ये कब लगता है?

आयकर रिटर्न्स में 80 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि-

CBDT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिछले चार सालों के दौरान फाइल किए गए आयकर रिटर्न्स में 80 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 3.79 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में 6.85 करोड़ हो गई है। आयकर विभाग का दावा है कि व्यक्तिगत करोड़पतियों में 68 फीसदी का इजाफा हुआ है। सालाना 5.2 लाख रुपए पर गैर-वेतनभोगी की औसत वार्षिक आय वेतनभोगी करदाताओं के लगभग 75 फीसदी है, जो 6.8 लाख रुपए तक बढ़ जाती है। गैर वेतनभोगियों की तुलना में वेतनभोगी करदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों की गिनती 2.3 करोड़ ही है।

आयकर

यह भी पढ़ें:- ITR भरने में आ रही है दिक्कत, तो घर बैठे ऐसे लें आयकर विभाग की मदद

क्या कहना है CBDT के चेयरमैन का-

CBDT के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि यह आंकड़ा पिछले कुछ साल के दौरान आयकर विभाग द्वारा किए गए विधायी, सूचनाओं के प्रसार और प्रवर्तन/ अनुपालन के प्रयासों की वजह से हासिल हो पाया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान विभाग ने प्रौद्योगिकी आधारित कर चोरी रोकने के कई कदम उठाए हैं. चंद्रा ने कहा कि हम देश में कर आधार और बढ़ाने को प्रतिबद्ध हैं. आंकड़ों के अनुसार पिछले चार वित्त वर्षों में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों का आंकड़ा भी 80 प्रतिशत बढ़ा है. 2013-14 में यह 3.79 करोड़ था, जो 2017-18 में 6.85 करोड़ हो गया।

यह भी पढ़ें:- ITR फाइल करने के ये 6 नियम इस बार बदल गए हैं, फटाफट जानिए

सुशील चंद्रा ने करोड़पति टैक्सपेयर्स की संख्या में इस इजाफे का श्रेय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के विभिन्न प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि यह संख्या आयकर विभाग की ओर से पिछले चार सालों के दौरान कानून में सुधार, सूचना के प्रसार एवं कड़ाई से कानून का पालन करवाने की दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम है।